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Panipat News: हेरिटेज वाक से जाना अंबाला का इतिहास
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हेरिटेज वाक के माध्यम से इतिहास प्रेमियों ने अंबाला शहर का इतिहास जाना। प्रवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। हेरिटेज वाक के माध्यम से इतिहास प्रेमियों ने अंबाला शहर का इतिहास जाना। यह हेरिटेज वाक रविवार को दार्जियां वाली गली से आरंभ होकर पीपली बाजार, हलवाई बाजार, पताशे वाली गली, जैन मंदिर, मीना बाजार से होती हुई कोतवाली सराय तक गई। बाजार तंदूरान से होते हुए विरासत प्रेमी पुरानी अनाज मंडी तक आए।
फूड वाक होने के कारण बाहर से आए सभी लोगों को अंबाला के देसी खानों का स्वाद चखाया गया। यहां के प्रसिद्ध घेवर, चाट, पूड़ी, कचौड़ी के अलावा जलेबी का आनंद आगंतुकों ने प्राप्त किया। डॉ. प्रदीप शर्मा ने हिंदी दिवस होने के कारण सभी लोगों को हिंदी की बढ़ती लोकप्रियता एवं प्रासंगिकता के विषय में बताया। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की ओर से विनीत भनवाला ने सभी का आभार व्यक्त किया गया।
इस अवसर पर सहयोगी अंबाला बाइट के तुषार सहित, अधिवक्ता नम्रता गौड़, डॉ. अविमुक्त जैन, डॉ. नरेंद्र, डॉ. वीरेंद्र नरवाल, विनय भोला, डॉ. कौशिक, अनुज, कविता, रवि, विपिन सहित कई लोग उपस्थित रहे।
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दिशाओं के अनुसार ही लोगों को बसाया जाता था : डाॅ. चांद
इतिहास प्रवक्ता डॉ. चांद सिंह ने बताया कि भारत के इतिहास में पूर्व काल से ही अंबाला का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इस शहर की भौगोलिक स्थिति ही इसे विशेषता प्रदान करती है। पश्चिम से आने वाले सभी लोग चाहे वह व्यापारी हो या आक्रमणकारी अथवा साम्राज्यवादी सभी अंबाला से होकर ही आगे दिल्ली और भारत की ओर बढ़े। जीटी रोड पर स्थित होने के कारण अंबाला ने लगभग हर कालखंड को देखा। आज के पुराने शहर में अधिकतर इमारतों पर ब्रिटिश एवं मुगलकाल की छाप दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि मुगलों के समय में समाज में कुछ स्थिरता आने के बाद ज्यादातर बस्तियां नगरों में बदलने लगीं। डॉ. अनुराधा जिंदल ने भवन निर्माण कला की बारीकियों, उनकी निर्माण सामग्री, कारीगरों, पेंटर इत्यादि पर बात की। उन्होंने अलग-अलग सभ्यताओं के निर्माणों की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।
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अंबाला सिटी। हेरिटेज वाक के माध्यम से इतिहास प्रेमियों ने अंबाला शहर का इतिहास जाना। यह हेरिटेज वाक रविवार को दार्जियां वाली गली से आरंभ होकर पीपली बाजार, हलवाई बाजार, पताशे वाली गली, जैन मंदिर, मीना बाजार से होती हुई कोतवाली सराय तक गई। बाजार तंदूरान से होते हुए विरासत प्रेमी पुरानी अनाज मंडी तक आए।
फूड वाक होने के कारण बाहर से आए सभी लोगों को अंबाला के देसी खानों का स्वाद चखाया गया। यहां के प्रसिद्ध घेवर, चाट, पूड़ी, कचौड़ी के अलावा जलेबी का आनंद आगंतुकों ने प्राप्त किया। डॉ. प्रदीप शर्मा ने हिंदी दिवस होने के कारण सभी लोगों को हिंदी की बढ़ती लोकप्रियता एवं प्रासंगिकता के विषय में बताया। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की ओर से विनीत भनवाला ने सभी का आभार व्यक्त किया गया।
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इस अवसर पर सहयोगी अंबाला बाइट के तुषार सहित, अधिवक्ता नम्रता गौड़, डॉ. अविमुक्त जैन, डॉ. नरेंद्र, डॉ. वीरेंद्र नरवाल, विनय भोला, डॉ. कौशिक, अनुज, कविता, रवि, विपिन सहित कई लोग उपस्थित रहे।
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दिशाओं के अनुसार ही लोगों को बसाया जाता था : डाॅ. चांद
इतिहास प्रवक्ता डॉ. चांद सिंह ने बताया कि भारत के इतिहास में पूर्व काल से ही अंबाला का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इस शहर की भौगोलिक स्थिति ही इसे विशेषता प्रदान करती है। पश्चिम से आने वाले सभी लोग चाहे वह व्यापारी हो या आक्रमणकारी अथवा साम्राज्यवादी सभी अंबाला से होकर ही आगे दिल्ली और भारत की ओर बढ़े। जीटी रोड पर स्थित होने के कारण अंबाला ने लगभग हर कालखंड को देखा। आज के पुराने शहर में अधिकतर इमारतों पर ब्रिटिश एवं मुगलकाल की छाप दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि मुगलों के समय में समाज में कुछ स्थिरता आने के बाद ज्यादातर बस्तियां नगरों में बदलने लगीं। डॉ. अनुराधा जिंदल ने भवन निर्माण कला की बारीकियों, उनकी निर्माण सामग्री, कारीगरों, पेंटर इत्यादि पर बात की। उन्होंने अलग-अलग सभ्यताओं के निर्माणों की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।