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कर्म, सरलता और ईमानदारी मनुष्य जीवन की नींव : उपेंद्र मुनि
Sat, 30 Aug 2025 12:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sat, 30 Aug 2025 12:33 AM IST
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जैन स्थानक में प्रवचन करते उपेंद्र मुनि। संस्था
समालखा। अनाज मंडी स्थित जैन स्थानक में जैन मुनि उपेंद्र मुनि महाराज ने कर्म, सरलता और ईमानदारी का महत्व बताया। उन्होंने कहा मनुष्य सत्य की राह पर चलकर लक्ष्य को हासिल कर सकता है।
उन्होंने बताया कि यह जैन धर्म के दस लक्षण पर्व का तीसरा धर्म है, जो व्यक्ति से मायाचार, छल और पाखंड को त्यागने का आह्वान करता है। इस धर्म को अपनाने से जीवन में सादगी, सच्चाई और पारदर्शिता आती है। जिससे आत्मा को शांति और स्थायित्व मिलता है। अपने मन में जो हो, वही जुबान से बोलना और वही कर्म करना। दिखावे के बजाय सच्चाई को महत्व देना और जीवन में पारदर्शिता लाना। उपेंद्र मुनि ने समझाया कि जिस प्रकार एक टेढ़ी तलवार सीधी म्यान में समा नहीं सकती। उसी प्रकार वक्र हृदय वाले व्यक्ति में आर्जव धर्म समा नहीं सकता। आर्जव धर्म हमें सिखाता है कि हमें दिखावे के जीवन से बाहर निकलकर अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों में ईमानदार रहना चाहिए। संवाद
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उन्होंने बताया कि यह जैन धर्म के दस लक्षण पर्व का तीसरा धर्म है, जो व्यक्ति से मायाचार, छल और पाखंड को त्यागने का आह्वान करता है। इस धर्म को अपनाने से जीवन में सादगी, सच्चाई और पारदर्शिता आती है। जिससे आत्मा को शांति और स्थायित्व मिलता है। अपने मन में जो हो, वही जुबान से बोलना और वही कर्म करना। दिखावे के बजाय सच्चाई को महत्व देना और जीवन में पारदर्शिता लाना। उपेंद्र मुनि ने समझाया कि जिस प्रकार एक टेढ़ी तलवार सीधी म्यान में समा नहीं सकती। उसी प्रकार वक्र हृदय वाले व्यक्ति में आर्जव धर्म समा नहीं सकता। आर्जव धर्म हमें सिखाता है कि हमें दिखावे के जीवन से बाहर निकलकर अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों में ईमानदार रहना चाहिए। संवाद
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