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Panipat News: मुझे मेरी मां की जुदाई दो पल भी सहन नहीं होती...
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पानीपत। अंकन साहित्यिक मंच द्वारा रविवार को आर्य पीजी कॉलेज में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। मुख्यातिथि डॉ. अंजलि दीवान व नरेश लाभ रहे। कार्यक्रम में जवाहर लाल शर्मा की छठी पुस्तक उत्कर्ष के सिद्धांत का विमोचन किया गया।
मंच संरक्षक डॉ. एपी जैन ने शर्मा के बारे में बताया और कहा कि वह एमए, एमएड हैं और हरियाणा व पंजाब में चार शैक्षणिक संस्थाओं के संचालक हैं। अंकन साहित्यिक मंच के संयोजक भी रहे हैं। इस अवसर पर राजेंद्र चुग, कृष्ण लाल जुनेजा, अनिल आदि उपस्थित रहे। संचालन जवाहर लाल शर्मा व कमलेश कुमार पालीवाल ने किया। इसकी अध्यक्षता सुलेख जैन ने की।
इस डॉ. एपी जैन ने कहा कि युगों बीते हमें बंदर से इंसान बनने में, वक्त लगता कहां अंदर से शैतान बनने में। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि मुझे मेरी मां की जुदाई दो पल भी सहन नहीं होती, और बेटियां ना जाने यह हुनर कहां से लाती हैं। सुभाष भाटिया ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था पर आस्था टिकी रहे जन सामान्य की, सर्वोच्च न्यायालय की किश्ती को डगमगाने से बचाना होगा। डॉ. अंजली दीवान ने कहा कि लोग हमारे बारे में क्या कहते इसकी परवाह नहीं, अपने आप को बेहतर बनाने की कोशिश हम दिन-रात करते हैं। जवाहर लाल शर्मा ने कहा कि प्रखर साधना, साहस और बल से, भारत में नव सृजन कर दिखलाएं। नव चिंतन, विद्या से विभूषित हो, कर्म शक्ति के जोहर दिखलाएं।
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कृष्ण कुमार निर्माण ने कहा कि फकत इतनी है इस दौर की हकीकत, दर-बदर हंस हैं, बगुले राज बिराजे हैं। अनूपिंदर सिंह अनूप ने कहा कि आशा की किरण जागी उम्मीद मुबारक हो, खुशियां जो बहुत लाई वो ईद मुबारक हो। फिर सुख का दिखे चंदा, खुशहाल हो हर बंदा, खुशियों भरे लम्हों की फिर दीद मुबारक हो। धर्मेंद्र अरोड़ा मुसाफिर ने कहा कि जय हिंद की महिमा जो धड़कन में बसाते हैं, वो अमर रिश्ते ही इतिहास बनाते हैं, दिल करे मुसाफिर का वंदन इन वीरों को, इस देश की खातिर जो सर्वस्व लुटाते हैं। गुलशन सपड़ा ने कहा कि आदमी भी कितना नादान है मंदिर में शंख और घंटे बजाता है, सोया हुआ खुद है और भगवान को जगाता है। भूखे को रोटी नहीं खिलाता और मंदिर में छप्पन भोग लगता है, अंधेरा दिल में है और दिए मंदिर में जलता है।
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मंच संरक्षक डॉ. एपी जैन ने शर्मा के बारे में बताया और कहा कि वह एमए, एमएड हैं और हरियाणा व पंजाब में चार शैक्षणिक संस्थाओं के संचालक हैं। अंकन साहित्यिक मंच के संयोजक भी रहे हैं। इस अवसर पर राजेंद्र चुग, कृष्ण लाल जुनेजा, अनिल आदि उपस्थित रहे। संचालन जवाहर लाल शर्मा व कमलेश कुमार पालीवाल ने किया। इसकी अध्यक्षता सुलेख जैन ने की।
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इस डॉ. एपी जैन ने कहा कि युगों बीते हमें बंदर से इंसान बनने में, वक्त लगता कहां अंदर से शैतान बनने में। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि मुझे मेरी मां की जुदाई दो पल भी सहन नहीं होती, और बेटियां ना जाने यह हुनर कहां से लाती हैं। सुभाष भाटिया ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था पर आस्था टिकी रहे जन सामान्य की, सर्वोच्च न्यायालय की किश्ती को डगमगाने से बचाना होगा। डॉ. अंजली दीवान ने कहा कि लोग हमारे बारे में क्या कहते इसकी परवाह नहीं, अपने आप को बेहतर बनाने की कोशिश हम दिन-रात करते हैं। जवाहर लाल शर्मा ने कहा कि प्रखर साधना, साहस और बल से, भारत में नव सृजन कर दिखलाएं। नव चिंतन, विद्या से विभूषित हो, कर्म शक्ति के जोहर दिखलाएं।
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कृष्ण कुमार निर्माण ने कहा कि फकत इतनी है इस दौर की हकीकत, दर-बदर हंस हैं, बगुले राज बिराजे हैं। अनूपिंदर सिंह अनूप ने कहा कि आशा की किरण जागी उम्मीद मुबारक हो, खुशियां जो बहुत लाई वो ईद मुबारक हो। फिर सुख का दिखे चंदा, खुशहाल हो हर बंदा, खुशियों भरे लम्हों की फिर दीद मुबारक हो। धर्मेंद्र अरोड़ा मुसाफिर ने कहा कि जय हिंद की महिमा जो धड़कन में बसाते हैं, वो अमर रिश्ते ही इतिहास बनाते हैं, दिल करे मुसाफिर का वंदन इन वीरों को, इस देश की खातिर जो सर्वस्व लुटाते हैं। गुलशन सपड़ा ने कहा कि आदमी भी कितना नादान है मंदिर में शंख और घंटे बजाता है, सोया हुआ खुद है और भगवान को जगाता है। भूखे को रोटी नहीं खिलाता और मंदिर में छप्पन भोग लगता है, अंधेरा दिल में है और दिए मंदिर में जलता है।