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Panipat News: हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति ने मनाई मुंशी प्रेमचंद जयंती
Fri, 01 Aug 2025 03:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Fri, 01 Aug 2025 03:18 AM IST
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समालखा। हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति की ओर से गांधी कॉलोनी के शहीद वीरेंद्र स्मारक भवन में मुंशी प्रेमचंद जयंती व शहीद उधम सिंह के शहादत दिवस पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया। इसका संचालन समिति के सदस्य रविंद्र और अध्यक्षता समिति की अध्यक्षा शीतल तथा वीरेंद्र, स्मारक समिति के प्रधान राजपाल दहिया ने की। मुख्य वक्ता स्मारक समिति के सचिव डॉ. शीशपाल रहे।
डॉ. शीशपाल ने बताया कि प्रेमचंद ने शुरुआती लेखन उर्दू में शुरू किया। उन्होंने अपने साहित्य में गैर बराबरी अंधविश्वास, महिला उत्पीड़न, बेमेल -विवाह, विधवा - विवाह की समस्याओं के बारे में लिखा। उनकी कहानियों में यथार्थ और समाधान शामिल था। भगत सिंह व प्रेमचंद दोनों इस बात की पैरवी करते हैं कि हमारे दुश्मन अंग्रेज हैं और दूसरा दुश्मन, समाज में फैली कुरीतियां है जो हमें एक नहीं होने देती। हमारे भविष्य को बेहतर बनाने की दो शर्तें हैं हमें अपने इतिहास का पता होना चाहिए और आज समाज में क्या क्या-क्या हो रहा है इसकी जानकारी होनी चाहिए। तभी एक बेहतर समाज की संरचना हो सकती है। समिति के सचिव वेदपाल ने उधम सिंह के जीवन के बारे में बताया कि उन्होंने जलियांवाला बाग हत्या कांड का बदला लेने के लिए प्रतिज्ञा व संकल्प लिया जो उन्होंने 21 वर्षों बाद जनरल ओ डायर को मारकर पूरा किया। जब उन्हें गिरफ्तार किया गया तब उनके अंतिम शब्द थे कि मेरे जीवन का लक्ष्य पूरा हुआ मैंने अपने देश के अपमान का बदला ले लिया है। अब मुझमें जीने की कोई इच्छा शेष नहीं है। ऐसे क्रांतिकारी देश भक्त शहीद हमेशा हमारे लिए प्रेरणा पुंज बने रहेंगे। इस अवसर पर जोगिंदर शर्मा, मास्टर बृजमोहन, मदनपाल छौक्कर, सीताराम, सतीश चौहान, सागर,सत्येंद्र, संगीता व वीर सिंह उपस्थित रहे। संवाद
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डॉ. शीशपाल ने बताया कि प्रेमचंद ने शुरुआती लेखन उर्दू में शुरू किया। उन्होंने अपने साहित्य में गैर बराबरी अंधविश्वास, महिला उत्पीड़न, बेमेल -विवाह, विधवा - विवाह की समस्याओं के बारे में लिखा। उनकी कहानियों में यथार्थ और समाधान शामिल था। भगत सिंह व प्रेमचंद दोनों इस बात की पैरवी करते हैं कि हमारे दुश्मन अंग्रेज हैं और दूसरा दुश्मन, समाज में फैली कुरीतियां है जो हमें एक नहीं होने देती। हमारे भविष्य को बेहतर बनाने की दो शर्तें हैं हमें अपने इतिहास का पता होना चाहिए और आज समाज में क्या क्या-क्या हो रहा है इसकी जानकारी होनी चाहिए। तभी एक बेहतर समाज की संरचना हो सकती है। समिति के सचिव वेदपाल ने उधम सिंह के जीवन के बारे में बताया कि उन्होंने जलियांवाला बाग हत्या कांड का बदला लेने के लिए प्रतिज्ञा व संकल्प लिया जो उन्होंने 21 वर्षों बाद जनरल ओ डायर को मारकर पूरा किया। जब उन्हें गिरफ्तार किया गया तब उनके अंतिम शब्द थे कि मेरे जीवन का लक्ष्य पूरा हुआ मैंने अपने देश के अपमान का बदला ले लिया है। अब मुझमें जीने की कोई इच्छा शेष नहीं है। ऐसे क्रांतिकारी देश भक्त शहीद हमेशा हमारे लिए प्रेरणा पुंज बने रहेंगे। इस अवसर पर जोगिंदर शर्मा, मास्टर बृजमोहन, मदनपाल छौक्कर, सीताराम, सतीश चौहान, सागर,सत्येंद्र, संगीता व वीर सिंह उपस्थित रहे। संवाद
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