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नगर निगम से जीआईएस कंपनी की फाइल हुई गुम, निगम ने लेना था सर्वे का 50 प्रतिशत भुगतान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jul 2021 12:45 AM IST
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GIS company's file was lost from the municipal corporation, only 50 percent of the survey was paid
जितेंद्र नरवाल
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। नगर निगम से फाइलों के गुम होने का सिलसिला रुक नहीं रहा। अब निगम से जीआईएस प्रॉपर्टी टैक्स सर्वे की फाइल गुम हो गई। 2012 में हुए सर्वे में कंपनी ने शहर की करीब सवा लाख प्रॉपर्टियों का डिजिटल और फिजिकल सर्वे कर डाटा नगर निगम को सौंपा था। इसकी एवज में एक करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था, जिसमें सें 50 प्रतिशत ही पेमेंट हो पाई थी, बाकी 50 प्रतिशत पेमेंट की फाइल निगम से गुम हो गई है।
कंपनी को ये भुगतान दो भागों में करना था। निगम ने पहले भाग का भुगतान पहले देने के बजाए दूसरे भाग का भुगतान पहले किया। पहले भाग के भुगतान को रोक दिया गया था। अब निगम के रिकार्ड से फाइल गुम होने से कंपनी प्रतिनिधियों ने इसका जवाब जनप्रतिनिधियों से मांगा है। दूसरी ओर नया सर्वे करने वाली याशी कंपनी निगम अधिकारियों से लिखित में चाहती है कि उसका सर्वे सही हुआ है, जिससे कंपनी का बकाया भुगतान हो सके। हालांकि नया सर्वे शहर के लोगों के गले की फांस बन चुका है। प्रॉपर्टी टैक्स से लिंक एनडीसी पोर्टल पर भी टैक्स जमा करवाने के बाद सिस्टम अपडेट नहीं कर रहा है।
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डाटा एकीकृत न होने पर याशी ने जीआईएस को ठहराया था जिम्मेदार
नए सर्वे के बाद जब करीब 30 प्रतिशत डाटा एकीकृत नहीं हो पाया तो लोगों की परेशानी बढ़ने लगी। निगम अधिकारियों समेत जनप्रतिनिधियों ने भी याशी कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इसमें याशी कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि जीआईएस कंपनी का डाटा गलत था। जिससे लोग आज भी परेशान हो रहे हैं। डाटा का मिलान हो रहा है।
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जीआईएस ने कहा- हमारा सर्वे बेस्ट था, अब हो रहे लोग परेशान
जीआईएस कंपनी के प्रतिनिधि धीरज शर्मा ने कहा कि उनका सर्वे बेस्ट था। इस सर्वे के रिकार्ड को कंपनी ने निगम को सौंप दिया था। पूरा डाटा मैच करवाया गया था। बेस्ट ऑनलाइन सॉफ्टवेयर तक दिए गए थे। इसमें कोई भी उपभोक्ता अपनी प्रॉपर्टी का स्वयं आकलन कर टैक्स भर तक सकता था। सॉफ्टवेयर में टैक्स की जी-8 रसीद तक काटने का प्रावधान था, लेकिन पता नहीं किन कारणों से निगम ने इस सॉफ्टवेयर को बंद करवा दिया और नया सर्वे करवाने की आवश्यकता समझी।
8 साल में आबादी तो बढ़ी, लेकिन डाटा एकीकृत नहीं हो सका
जीआईएस कंपनी प्रतिनिधियों ने बताया कि इसमें कोई शक नहीं है कि 8 साल में शहर की आबादी के साथ प्रॉपर्टी भी बढ़ी है। 2012 के सर्वे के अनुसार शहर में करीब सवा लाख प्रॉपर्टी थी, नए सर्व के अनुसार करीब पौने दो लाख प्रॉपर्टी पाई गईं हैं। इन समय सीमा में 50 हजार प्रॉपर्टी तो बढ़ी पाई गई हैं, लेकिन पुराने डाटा से नए डाटा का इंटेग्रेटिड न होना लोगों के लिए चुनौती साबित होगा।

पुरानी सर्वे कंपनी जीआईएस की पेमेंट की फाइल निगम से गुम होने की शिकायत मिली है। निगम अधिकारियों को फाइल को ढूंढने के लिए कहा गया है। फाइल देखने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है।
दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर, नगर निगम।
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