पानीपत: गन्ने की 80 लाख क्विंटल पैदावार होने की उम्मीद, पुरानी मिल की क्षमता महज 30 लाख, नई जल्द शुरू करने की मांग
पानीपत जिले में गन्ने की फसल की बंपर पैदावार की उम्मीद है। लेकिन यहां पर किसानों को मजबूरी में दूसरे राज्यों में गन्ना बेचना पड़ सकता है। जिले में इस साल करीब 80 लाख क्विंटल पैदावार होने की उम्मीद है और शुगर मिल की क्षमता महज 30 लाख क्विंटल है।
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पानीपत के गांव डाहर में बन रही नई शुगर मिल की आस में जिले के के किसानों ने अबकी जमकर पसीना बहाया। करीब 80 लाख क्विंटल पैदावार होने की उम्मीद जताई जा रही है वहीं शुगर मिल की क्षमता महज 30 लाख क्विंटल है। ऐसे में बंपर फसल उनके लिए परेशानी का सबब बनेगी क्योंकि उन्हें गन्ना बेचने के लिए मजबूरन दूसरे राज्यों की रुख करना पड़ेगा।
आंकड़ों की बात करें तो पिछली बार से उन्होंने करीब 30 लाख क्विंटल गन्ने की ज्यादा पैदावार की है लेकिन अब तक मिल शुरू नहीं हो सकी है। पुरानी शुगर मिल में हर साल की तरह वे 30 लाख क्विंटल गन्ने की फसल ही बेच सकते हैं। इसके बाद भी 50 लाख क्विंटल फसल बच रही है, इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। उन्हें दूसरे राज्य में फसल बेचनी पड़ेगी। अगले सप्ताह तक गन्ने की फसल तैयार हो जाएगी और इसे बेचने के लिए उन्हें पंजाब और यूपी के जिलों में जाना पड़ेगा।
जिले के किसानों का कहना है कि पानीपत में फसल न बिकने के बाद किसानों को मजबूरी में दूसरे राज्य जाना पड़ता है। पंजाब की धूरी शुगर मिल तक एक ट्रॉली गन्ने की फसल ले जाने में किसानों का 15 हजार रुपये खर्चा आता है। वहीं सर्दियों में धुंध के कारण सड़क हादसे का भी भय बना रहता है।
दूसरी ओर नई शुगर मिल को शुरू करने को लेकर जिले के किसानों ने 31 दिसंबर की चेतावनी दी है। जिले के किसानों का कहना है कि यदि एक जनवरी तक नई शुगर मिल शुरू नहीं होती है तो वह धरना करेंगे। निर्माणाधीन कार्य के अनुसार शुगर मिल को शुरू होने पर एक महीने से ज्यादा का समय और लगेगा। माना जा रहा है कि फरवरी तक यह चालू हो सकेगी। ऐसे में तब तक आधे से ज्यादा किसान दूसरे राज्य में जाकर अपनी फसल बेच चुके होंगे।
यूपी में अटके किसानों के 16 करोड़ रुपये
पानीपत में फसल न बिकने के कारण 2016 में जिले के साथ ही हरियाणा के अन्य जिले के किसानों ने अपनी फसल यूपी में बेची थी। उस समय सरकार ने फसल तो खरीद ली, लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी 33 करोड़ की पेमेंट नहीं दी, जिसमें लगभग 16 करोड़ रुपये की पेमेंट अकेले पानीपत के किसानों की है। - रतन मान, प्रदेश अध्यक्ष, भाकियू
फरवरी में कटाई के देने होंगे तीन गुना ज्यादा दाम
मिल शुरू न होने पर जिले के किसानों को इस बार भी दूसरे राज्य यूपी व पंजाब में जाकर अपनी फसल बेचनी होगी। यदि हमने पानीपत की नई मिल के इंतजार में फसल नहीं कटवाई तो फरवरी में फसल कटवाई के प्रति क्विंटल 100 रुपये देने होंगे जबकि अभी 35 रुपये क्विंटल के हिसाब से कटाई हो जाती है। - कुलदीप बलाना, पूर्व जिला प्रधान भाकियू