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Panipat News: किसान और दूध सप्लाई एजेंटों ने जताया विरोध
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समालखा। बहुराष्ट्रीय कंपनी नेस्ले इंडिया को दूध सप्लाई एजेंटों के बीच दूध के भाव को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। फिर कुछ किसान व दूध सप्लाई एजेंटों ने मंगलवार को नेस्ले फैक्ट्री के गेट पर टेंट लगाकर धरना दिया और प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने दूध के उचित भाव नहीं देने का आरोप लगाते हुए रोष प्रकट किया।
किसान नेत्रपाल व दूध सप्लाई एजेंट संदीप रावल ने बताया कि पहले भी कई बार दूध के भाव को लेकर प्रबंधक से बात हुई थी। इसका अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेस्ले कंपनी दूध में फंगस बता रही है। जिसके कारण दूध नहीं लिया जा रहा। धरना प्रदर्शन में पानीपत व बापौली के 35-40 दूधिया व किसानों ने हिस्सा लिया। जिसमें किसान नेत्रपाल गढ़ी भलौर ,संदीप रावल दूधिया एजेंट जलमाना, दलवीर बड़ोली, आदेश डाडोला, जयपाल नन्हेड़ा, नरेश बापौली, बलिंदर रिशपुर, वकील खेड़ा आदि ने काफी देर तक नेस्ले के खिलाफ नारेबाजी की। काफी देर बाद प्रदर्शनकारियों का एक प्रतिनिधि मंडल कमेटी बनाकर अंदर अधिकारियों से मिलने गया। जहां नेस्ले अधिकारी अरविंद ने उन्हें दूध में अच्छा फैट पाने के लिए अपने पशुओं को अच्छा फीड व हरा चारा खिलाने का मशविरा दिया। उन्होंने कहा कि दूध में फैट होने पर ही दूध लिया जाएगा, जिसके आश्वासन पर दूध सप्लाई एजेंटों ने अपना धरना समाप्त किया।
वहीं कंपनी के अधिकारी ने बताया कि नेस्ले के लिए उत्पादों की गुणवत्ता अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसके लिए हमारे पास सख्त गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाएं हैं ताकि केवल सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद ही हमारे उपभोक्ताओं तक पहुंच सकें। हम फार्म और भोजन पद्धतियों तथा दूध की गुणवत्ता में सुधार के लिए अपने किसानों के साथ नियमित रूप से जागरूकता सत्र आयोजित करते हैं। उक्त प्रकरण में दूध में गुणवत्ता संबंधी समस्या थी जिसके कारण दूध स्वीकार नहीं किया गया।
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किसान नेत्रपाल व दूध सप्लाई एजेंट संदीप रावल ने बताया कि पहले भी कई बार दूध के भाव को लेकर प्रबंधक से बात हुई थी। इसका अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेस्ले कंपनी दूध में फंगस बता रही है। जिसके कारण दूध नहीं लिया जा रहा। धरना प्रदर्शन में पानीपत व बापौली के 35-40 दूधिया व किसानों ने हिस्सा लिया। जिसमें किसान नेत्रपाल गढ़ी भलौर ,संदीप रावल दूधिया एजेंट जलमाना, दलवीर बड़ोली, आदेश डाडोला, जयपाल नन्हेड़ा, नरेश बापौली, बलिंदर रिशपुर, वकील खेड़ा आदि ने काफी देर तक नेस्ले के खिलाफ नारेबाजी की। काफी देर बाद प्रदर्शनकारियों का एक प्रतिनिधि मंडल कमेटी बनाकर अंदर अधिकारियों से मिलने गया। जहां नेस्ले अधिकारी अरविंद ने उन्हें दूध में अच्छा फैट पाने के लिए अपने पशुओं को अच्छा फीड व हरा चारा खिलाने का मशविरा दिया। उन्होंने कहा कि दूध में फैट होने पर ही दूध लिया जाएगा, जिसके आश्वासन पर दूध सप्लाई एजेंटों ने अपना धरना समाप्त किया।
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वहीं कंपनी के अधिकारी ने बताया कि नेस्ले के लिए उत्पादों की गुणवत्ता अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसके लिए हमारे पास सख्त गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाएं हैं ताकि केवल सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद ही हमारे उपभोक्ताओं तक पहुंच सकें। हम फार्म और भोजन पद्धतियों तथा दूध की गुणवत्ता में सुधार के लिए अपने किसानों के साथ नियमित रूप से जागरूकता सत्र आयोजित करते हैं। उक्त प्रकरण में दूध में गुणवत्ता संबंधी समस्या थी जिसके कारण दूध स्वीकार नहीं किया गया।
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