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डायस्पोरा केवल भौगोलिक विस्थापन नहीं है, बल्कि यह स्मृतियों के साथ जीने की एक निरंतर प्रक्रिया : डॉ. अशोक कुमार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 15 Feb 2026 02:34 AM IST
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Diaspora is not just a geographical displacement, but a continuous process of living with memories: Dr. Ashok Kumar
राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य वक्ता का स्वागत करते प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता। स्रोत : कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
पानीपत। आर्य पीजी कॉलेज में अंग्रेजी विभाग और हरियाणा उच्चतर शिक्षा निदेशालय के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इसका विषय डायस्पोरा, मेमोरी और होमलैंड : नेरेटीव ऑफ बिलोंगिग एंड एलिएनेशन रहा। सेमिनार में 103 शोधार्थियों ने विषय पर अपने विचार साझा किए।
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कॉलेज प्रबंधक समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र शिंगला, उपाध्यक्ष वीरेंद्र शिंगला व प्राचार्य प्रो. डॉ. जगदीश गुप्ता ने वक्ताओं और शोधार्थियों का कॉलेज प्रांगण में स्वागत किया। मुख्यातिथि एमएन कॉलेज शाहाबाद मारकंडा के प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार रहे। उन्होंने कहा कि डायस्पोरा केवल भौगोलिक विस्थापन नहीं है, बल्कि यह स्मृतियों के साथ जीने की एक निरंतर प्रक्रिया है। अपनी जड़ों से कटने का दर्द और नए परिवेश में खुद को ढालने की जद्दोजहद ही साहित्य को जन्म देती है।
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कॉलेज प्रबंधन समिति के प्रधान सुरेंद्र शिंगला ने कहा कि इस तरह के सेमिनार विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता को बढ़ाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि डायस्पोरा जैसे वैश्विक विषयों पर चर्चा करने से छात्रों को अंतरराष्ट्रीय सामाजिक परिस्थितियों को समझने में मदद मिलती है। प्रमुख वक्ता भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय खानपुर कलां से प्रोफेसर रवि भूषण रहे। उन्होंने होमलैंड की अवधारणा को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि इसमें एक प्रवासी व्यक्ति हमेशा दो दुनिया के बीच अंतर्द्वंद्व बना रहता है। उन्होंने स्मृतियों को एक पुल बताया जो मनुष्य को उसके अतीत और वर्तमान से जोड़े रखती हैं।
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दिल्ली यूनिवर्सिटी के दयाल सिंह कॉलेज से एसोसिएट प्रोफेसर सचिन एन ने संसाधन पुरुष के रूप में प्रवासी साहित्य के तकनीकी और भावनात्मक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने अकेलेपन और पहचान के संकट के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक युग में डायस्पोरा की कहानियां केवल विलाप नहीं हैं, बल्कि ये नए सांस्कृतिक मिलन की भी गाथाएं हैं। प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने कहा कि साहित्य में होमलैंड की तलाश वास्तव में खुद की तलाश है। उन्होंने सफल आयोजन के लिए पूरे अंग्रेजी विभाग को शुभकामनाएं दी। कॉलेज के उप-प्रधान वीरेंद्र शिंगला ने कहा कि अपनी जड़ों और संस्कृति को याद रखना ही मनुष्य की असली पहचान है। उन्होंने कहा कि कॉलेज भविष्य में भी ऐसे उच्च स्तरीय अकादमिक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. बरती विश्वास ने बंगाली डायस्पोरा बंगाली भद्र लोक और छोटा लोक से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय डायस्पोरा होमलैंड के बीच अंतर्द्वंद्व को बारीकी से बताया।

कॉलेज की उप-प्राचार्या अनुराधा सिंह ने कहा कि स्मृति और अकेलेपन के बीच के संघर्ष को एक प्रवासी झेलता है। वही इस विषय की आत्मा है। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध की बारीकियों से अवगत कराया और स्मृति की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ. मीनल तालस, डॉ. विजय सिंह, डॉ. अकरम खान, प्राध्यापिका सुमन शिंगला, रेखा, नेहा, ममता, निकिता, डिंपल, पंकज व दीपक मौजूद रहे। मंच संचालन प्राध्यापिका डॉ. सोनिया सोनी व मानवी ने किया।

राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य वक्ता का स्वागत करते प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता। स्रोत : कॉलेज

राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य वक्ता का स्वागत करते प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता। स्रोत : कॉलेज- फोटो : अमर उजाला

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