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प्रॉपर्टी टैक्स में श्रेणी बदलवाना बना मुसीबत, अगर बदल तो बनेगी निगम के गले में फांस
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जितेंद्र नरवाल
पानीपत। नए प्रॉपर्टी टैक्स सर्वे की खामियों की वजह से जनता और अधिकारी दोनों मुसीबत में आ गए हैं। सर्वे कंपनी ने प्रॉपर्टी की श्रेणी गलत भर दी है, जिसकी वजह से जिन प्रॉपर्टी का टैक्स हजारों में होना चाहिए वह लाखों में पहुंच चुका है। शहर में ऐसी करीब एक हजार प्रापर्टी हैं। कहीं आवासीय प्रॉपर्टी को व्यावसायिक तो कहीं व्यावसायिक को औद्योगिक दिखा दिया है। इस तरह कम टैक्स वाली प्रॉपर्टी को अधिक टैक्स दर वाली श्रेणी में सर्वे कंपनी ने डाल दिया है। इसे ठीक करवाने के लिए लोग निगम के चक्कर काट रहे हैं। अब मुसीबत यह है कि श्रेणी नहीं बदली गई तो लोगों को अधिक टैक्स भरना पड़ेगा। अगर निगम श्रेणी बदलता है तो रिकार्ड के मुताबिक अनुमानित टैक्स वसूली कम होने से वित्तीय नुकसान होगा। जिसकी जवाबदेही निगम की होगी।
संकट से उबरने के लिए अब अधिकारियों ने निगम प्रतिनिधियों से सुझाव मांगा है। अधिकारियों को भय है कि अगर प्रॉपर्टी की श्रेणी बदल दी और राजस्व कम हुआ तो भ्रष्टाचार के आरोप लग सकते हैं। यह सवाल भी उठेगा कि किस आधार पर टैक्स माफ किया गया। प्रॉपर्टी टैक्स की श्रेणी नहीं बदलने पर आम जनता परेशान होगी। अब सदन के निर्णय के बाद ही प्रापर्टी की श्रेेेणी बदली जाएगी।
बदली दी श्रेणी तो निगम को करीब 10 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान
नए सर्वे के मुताबिक शहर में पौने दो लाख प्रॉपर्टी हैं। इनमें से करीब एक हजार प्रॉपर्टी ऐसी हैं, जिनकी श्रेेेणी गलत भर दी गई है। इस खामी की वजह से एक प्रॉपर्टी पर 50 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का टैक्स बकाया है। अगर सभी प्रॉपर्टी की श्रेणी बदल दी तो करीब 10 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान होने का अनुमान है।
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टैक्स नहीं भरा तो न एनओसी मिलेगी न होगी रजिस्ट्री
इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जिन्होंने अपनी प्रॉपर्टी को बेचना या खरीदना है और इसकी रजिस्ट्री भी करवानी है। अगर प्रॉपर्टी टैक्स नहीं भरा तो निगम से नॉन ऑब्जेशन सर्टिफिकेट यानी एनओसी नहीं मिलेगी और लोगों की प्रॉपर्टियों की रजिस्ट्रियां नहीं हो पाएंगी। वहीं, अगर टैक्स नहीं भरा गया तो इस पर निगम ब्याज भी लगाएगा, जिससे लोगों को अपनी प्रॉपर्टी को सील होने से बचाने के लिए इसे मजबूरन भरना भी पड़ेगा।
पारदर्शिता के लिए मांगा है सुझाव : डीएमसी
प्रॉपर्टी टैक्स की श्रेणी में बदलाव के लिए निगम उच्च अधिकारियों व प्रतिनिधियों से सुझाव मांगा गया है। इसमें निगम सदन से मंजूरी ली जाएगी कि प्रॉपर्टी श्रेणी में बदलाव के आधार को सुनिश्चित किया जाए।
-जितेंद्र कुमार, डीएमसी, नगर निगम, पानीपत।
संबंधित पार्षद और सदन देगा मंजूरी : भट्ट
इस विषय को सदन में रखा जाएगा। सदन से सुझाव लिया जाएगा। सभी पार्षद इस पर अपना निर्णय देंगे। इसमें संबंधित एरिया की प्रॉपर्टी के लिए संबंधित पार्षद की जिम्मेवारी लगाना भी सुनिश्चित किया जा सकता है।
-दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर, पानीपत।
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पानीपत। नए प्रॉपर्टी टैक्स सर्वे की खामियों की वजह से जनता और अधिकारी दोनों मुसीबत में आ गए हैं। सर्वे कंपनी ने प्रॉपर्टी की श्रेणी गलत भर दी है, जिसकी वजह से जिन प्रॉपर्टी का टैक्स हजारों में होना चाहिए वह लाखों में पहुंच चुका है। शहर में ऐसी करीब एक हजार प्रापर्टी हैं। कहीं आवासीय प्रॉपर्टी को व्यावसायिक तो कहीं व्यावसायिक को औद्योगिक दिखा दिया है। इस तरह कम टैक्स वाली प्रॉपर्टी को अधिक टैक्स दर वाली श्रेणी में सर्वे कंपनी ने डाल दिया है। इसे ठीक करवाने के लिए लोग निगम के चक्कर काट रहे हैं। अब मुसीबत यह है कि श्रेणी नहीं बदली गई तो लोगों को अधिक टैक्स भरना पड़ेगा। अगर निगम श्रेणी बदलता है तो रिकार्ड के मुताबिक अनुमानित टैक्स वसूली कम होने से वित्तीय नुकसान होगा। जिसकी जवाबदेही निगम की होगी।
संकट से उबरने के लिए अब अधिकारियों ने निगम प्रतिनिधियों से सुझाव मांगा है। अधिकारियों को भय है कि अगर प्रॉपर्टी की श्रेणी बदल दी और राजस्व कम हुआ तो भ्रष्टाचार के आरोप लग सकते हैं। यह सवाल भी उठेगा कि किस आधार पर टैक्स माफ किया गया। प्रॉपर्टी टैक्स की श्रेणी नहीं बदलने पर आम जनता परेशान होगी। अब सदन के निर्णय के बाद ही प्रापर्टी की श्रेेेणी बदली जाएगी।
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बदली दी श्रेणी तो निगम को करीब 10 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान
नए सर्वे के मुताबिक शहर में पौने दो लाख प्रॉपर्टी हैं। इनमें से करीब एक हजार प्रॉपर्टी ऐसी हैं, जिनकी श्रेेेणी गलत भर दी गई है। इस खामी की वजह से एक प्रॉपर्टी पर 50 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का टैक्स बकाया है। अगर सभी प्रॉपर्टी की श्रेणी बदल दी तो करीब 10 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान होने का अनुमान है।
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टैक्स नहीं भरा तो न एनओसी मिलेगी न होगी रजिस्ट्री
इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जिन्होंने अपनी प्रॉपर्टी को बेचना या खरीदना है और इसकी रजिस्ट्री भी करवानी है। अगर प्रॉपर्टी टैक्स नहीं भरा तो निगम से नॉन ऑब्जेशन सर्टिफिकेट यानी एनओसी नहीं मिलेगी और लोगों की प्रॉपर्टियों की रजिस्ट्रियां नहीं हो पाएंगी। वहीं, अगर टैक्स नहीं भरा गया तो इस पर निगम ब्याज भी लगाएगा, जिससे लोगों को अपनी प्रॉपर्टी को सील होने से बचाने के लिए इसे मजबूरन भरना भी पड़ेगा।
पारदर्शिता के लिए मांगा है सुझाव : डीएमसी
प्रॉपर्टी टैक्स की श्रेणी में बदलाव के लिए निगम उच्च अधिकारियों व प्रतिनिधियों से सुझाव मांगा गया है। इसमें निगम सदन से मंजूरी ली जाएगी कि प्रॉपर्टी श्रेणी में बदलाव के आधार को सुनिश्चित किया जाए।
-जितेंद्र कुमार, डीएमसी, नगर निगम, पानीपत।
संबंधित पार्षद और सदन देगा मंजूरी : भट्ट
इस विषय को सदन में रखा जाएगा। सदन से सुझाव लिया जाएगा। सभी पार्षद इस पर अपना निर्णय देंगे। इसमें संबंधित एरिया की प्रॉपर्टी के लिए संबंधित पार्षद की जिम्मेवारी लगाना भी सुनिश्चित किया जा सकता है।
-दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर, पानीपत।