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रसायनिक खादों से बढ़ रहा कैंसर का खतरा : सतीश कुमार
Sun, 21 Dec 2025 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sun, 21 Dec 2025 01:39 AM IST
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सनौली। खंड कृषि विभाग ने बापौली में शनिवार को किसान जागरूकता शिविर लगाया जिसमें नेशनल फार्मिंग व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को जागरूक किया गया। बीईओ ने कहा कि रसायनिक खादों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। खंड कृषि अधिकारी सतीश कुमार ने कहा कि अधिक पेस्टीसाइड प्रयोग करने से कैंसर जैसी घातक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा हैं इसलिए वे आधुनिक तरीके से गोबर खाद, वर्मी कंपोस्ट खाद आदि को भूमि में डालकर प्राकृतिक खेती की तरफ आएं। किसान धान, गेहूं फसल चक्र को छोड़कर अन्य दलहन, तिलहन फसलें व सब्जी आदि उगाएं जिनमें कम लागत में अधिक पैदावार देगी।
कृषि भूमि में अधिक मात्रा में रासायनिक खादों व कीटनाशकों का प्रयोग करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म होती जा रही है और जल प्रदूषण प्रतिदिन बढ़ रहा है इसलिए अपने कृषि भूमि को बचाने के लिए किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की आवश्यकता है। कृषि विकास अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि प्राकृतिक खेती में कृषि जीवाणुओं की वृद्धि होती है। कम लागत में अधिक पैदावार हो सकती हैं। राज्य में प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को विभिन्न अनुदान और सहायता प्रदान की जाती है जैसे देसी गाय की खरीद पर 25 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जाती हैं। प्राकृतिक खेती के उत्पादों को पैकिंग सीधे खेती से की जाती है। इसके ग्राहकों को उत्पाद की गुणवत्ता पर विश्वास होता है। किसानों को प्राकृतिक खेती के चार हजार रुपये प्रति एकड़ की अनुदान राशि दी जाती है ।
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कृषि भूमि में अधिक मात्रा में रासायनिक खादों व कीटनाशकों का प्रयोग करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म होती जा रही है और जल प्रदूषण प्रतिदिन बढ़ रहा है इसलिए अपने कृषि भूमि को बचाने के लिए किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की आवश्यकता है। कृषि विकास अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि प्राकृतिक खेती में कृषि जीवाणुओं की वृद्धि होती है। कम लागत में अधिक पैदावार हो सकती हैं। राज्य में प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को विभिन्न अनुदान और सहायता प्रदान की जाती है जैसे देसी गाय की खरीद पर 25 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जाती हैं। प्राकृतिक खेती के उत्पादों को पैकिंग सीधे खेती से की जाती है। इसके ग्राहकों को उत्पाद की गुणवत्ता पर विश्वास होता है। किसानों को प्राकृतिक खेती के चार हजार रुपये प्रति एकड़ की अनुदान राशि दी जाती है ।
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