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नेशनल और स्टेट हाईवे पर नहीं दौड़ीं बसें, स्टेशन पर रुकी रहीं ट्रेनें
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Buses did not run on national and state highways, trains stopped at the station
- फोटो : Panipat
तीन कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के चार महीने पूरे होने पर शुक्रवार को संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 11 घंटे तक भारत बंद का असर जिले के नेशनल और स्टेट हाईवे पर दिखाई दिया। जिले से निकलने वाले नेशनल और स्टेट हाईवे पर किसान-मजदूर संगठन सुबह 6 बजे ही पहुंच गए और सभी रास्तों को बंद कर दिया। पानीपत से होकर दिल्ली-चंडीगढ़, जींद-सफींदो, उत्तर प्रदेश- शामली, रोहतक-राजस्थान के रास्ते बंद हो गए। इस बंद की वजह से करीब 10 लाख लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ है। हालांकि बंद में भी किसानों ने सभी आपाताकालीन वाहनों को आने जाने दिया। शाम पांच बजे लोगों की असुविधाओं को देखते हुए किसानों ने इस बंद को एक घंटे पहले ही खोल दिया।
सबसे पहले किसानों ने सुबह छह बजे ही रोहतक जाने वाले राजमार्ग को शाहपुर गांव के पास बंद कर दिया। इसके बाद दिल्ली-चंडीगढ़ रूट के जीटी रोड को पानीपत टोल प्लाजा पर सुबह दस बजे बंद किया गया। इसके बाद असंध-सफीदों के रास्ते जींद जाने वाले रास्ते को मतलौडा को सुबह 7 बजे बंद किया गया। इसके बाद सनौली से होते हुए वाया शामली के उत्तर प्रदेश के रास्ते को गांव निंबरी और छाजपुर में भी सुबह 10 बजे के बाद बंद लगाया गया। इस बंद में जिले से आने जाने वाला हर प्रकार का ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम तक प्रभावित हुआ है। रोडवेज की अधिकतर बसें डिपो में ही दिखाई दीं, रेलवे स्टेशन पर ट्रेन खड़ी रहीं और दिन भर इनके सवार सिर्फ बंद के खुलने का इंतजार करते दिखाई दिए।
पानीपत टोल बैरियर से रोजाना 60 से 70 हजार गाड़ियां आवागमन करती हैं। वहीं रोहतक जाने वाले रास्ते पर डाहर टोल से भी करीब 30 से 50 हजार गाड़ियां आवगमन करती हैं। इसी अनुमान के हिसाब से जींद और उत्तर प्रदेश जाने वाले रास्तों पर भी लाखों गाड़ियों का पहिया जाम रहा। इसके अलावा रोडवेज व ट्रेन का ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम बंद रहने से अनुुमानित करीब दस लाख लोग अपने गंत्वय तक समय रहते पहुंच नहीं पाए।
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वहीं, ये भी देखने को मिला कि किसानों के इस बंद के पहले से किए गए ऐलान से लोग भी पहले से सचेत हो गए थे और अधिकतर लोग घरों से निकले ही नहीं थे। जिस कारण सभी राष्ट्रीय और राजमार्गों पर आम दिनों की तरह ज्यादा वाहन देखने को नहीं मिले। जो निकले वो बंद की वजह से जाम में फंसे रहे।
इस भारत बंद का पूरा असर जिले की आउटर सड़कों पर दिखाई दिया। सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक इस बंद की 12 घंटे तक रखने की घोषणा की जा चुकी थी, लेकिन लोगों की असुविधा को देखते हुए किसानों ने इसे एक घंटा पहले ही यानी शाम पांच बजे ही खोल भी दिया। जिससे आवगमन करने वाले यात्रियों ने राहत की सांस ली। इस दौरान बंद को खुलवाने के लिए कई जगहों पर यात्रियों की किसानों के साथ तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
सुबह 8 बजे से पहले ही रोडवेज ने सभी बसों को रवाना कर दिया, जिसमें सबसे ज्यादा बसें लंबे रूट की शामिल रही। जिसमें हरिद्वार, शामली, देहरादून के रूटों पर बसों को दौड़ाया गया। शाम को भारत बंद आंदोलन से समाप्त होने के बाद बाकी के बचे हुए रूटों की बसों को चलाया गया। वहीं दिन भर बसें ना चलने के कारण पानीपत से समालखा व अन्य रूटों पर ऑटों चालकों ने मनमानी किराया वसूलने में जुटे दिखाई दिए।
बाजारों में भारत बंद पूरी तरह से बेअसर दिखाई दिया जहां सुबह से लेकर शाम तक दुकानदारों ने दुकान खोली। बाजारों में पहले ही तरह ही भीड़ उमड़ी रही जहां लोगबऌ में भारत बंद को लेकर कोई चिंता भी नजर नहीं आई। वहीं किसानों का भी पूरा फोकस आउटर के रास्तों पर दिखाई दिया। बाहर से आने जाने वाले कुछ लोग छोटे रास्तों से भी आवागमन कर जाम में फंसे नजर आए।
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सबसे पहले किसानों ने सुबह छह बजे ही रोहतक जाने वाले राजमार्ग को शाहपुर गांव के पास बंद कर दिया। इसके बाद दिल्ली-चंडीगढ़ रूट के जीटी रोड को पानीपत टोल प्लाजा पर सुबह दस बजे बंद किया गया। इसके बाद असंध-सफीदों के रास्ते जींद जाने वाले रास्ते को मतलौडा को सुबह 7 बजे बंद किया गया। इसके बाद सनौली से होते हुए वाया शामली के उत्तर प्रदेश के रास्ते को गांव निंबरी और छाजपुर में भी सुबह 10 बजे के बाद बंद लगाया गया। इस बंद में जिले से आने जाने वाला हर प्रकार का ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम तक प्रभावित हुआ है। रोडवेज की अधिकतर बसें डिपो में ही दिखाई दीं, रेलवे स्टेशन पर ट्रेन खड़ी रहीं और दिन भर इनके सवार सिर्फ बंद के खुलने का इंतजार करते दिखाई दिए।
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पानीपत टोल बैरियर से रोजाना 60 से 70 हजार गाड़ियां आवागमन करती हैं। वहीं रोहतक जाने वाले रास्ते पर डाहर टोल से भी करीब 30 से 50 हजार गाड़ियां आवगमन करती हैं। इसी अनुमान के हिसाब से जींद और उत्तर प्रदेश जाने वाले रास्तों पर भी लाखों गाड़ियों का पहिया जाम रहा। इसके अलावा रोडवेज व ट्रेन का ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम बंद रहने से अनुुमानित करीब दस लाख लोग अपने गंत्वय तक समय रहते पहुंच नहीं पाए।
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वहीं, ये भी देखने को मिला कि किसानों के इस बंद के पहले से किए गए ऐलान से लोग भी पहले से सचेत हो गए थे और अधिकतर लोग घरों से निकले ही नहीं थे। जिस कारण सभी राष्ट्रीय और राजमार्गों पर आम दिनों की तरह ज्यादा वाहन देखने को नहीं मिले। जो निकले वो बंद की वजह से जाम में फंसे रहे।
इस भारत बंद का पूरा असर जिले की आउटर सड़कों पर दिखाई दिया। सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक इस बंद की 12 घंटे तक रखने की घोषणा की जा चुकी थी, लेकिन लोगों की असुविधा को देखते हुए किसानों ने इसे एक घंटा पहले ही यानी शाम पांच बजे ही खोल भी दिया। जिससे आवगमन करने वाले यात्रियों ने राहत की सांस ली। इस दौरान बंद को खुलवाने के लिए कई जगहों पर यात्रियों की किसानों के साथ तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
सुबह 8 बजे से पहले ही रोडवेज ने सभी बसों को रवाना कर दिया, जिसमें सबसे ज्यादा बसें लंबे रूट की शामिल रही। जिसमें हरिद्वार, शामली, देहरादून के रूटों पर बसों को दौड़ाया गया। शाम को भारत बंद आंदोलन से समाप्त होने के बाद बाकी के बचे हुए रूटों की बसों को चलाया गया। वहीं दिन भर बसें ना चलने के कारण पानीपत से समालखा व अन्य रूटों पर ऑटों चालकों ने मनमानी किराया वसूलने में जुटे दिखाई दिए।
बाजारों में भारत बंद पूरी तरह से बेअसर दिखाई दिया जहां सुबह से लेकर शाम तक दुकानदारों ने दुकान खोली। बाजारों में पहले ही तरह ही भीड़ उमड़ी रही जहां लोगबऌ में भारत बंद को लेकर कोई चिंता भी नजर नहीं आई। वहीं किसानों का भी पूरा फोकस आउटर के रास्तों पर दिखाई दिया। बाहर से आने जाने वाले कुछ लोग छोटे रास्तों से भी आवागमन कर जाम में फंसे नजर आए।