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Panipat News: जिले के काला आंब में कल मनाया जाएगा शौर्य दिवस
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पानीपत। मराठाओं की वीरता और मुगलों की क्रूरता का गवाह पानीपत हर वर्ष उस गौरवशाली तिथि को याद करता है, जिस दिन मराठों के संघर्ष ने इस देश के इतिहास को नई दिशा दी थी। पानीपत की तीसरी लड़ाई की स्मृति में शौर्य दिवस समारोह 14 जनवरी को काला आंब में मनाया जाएगा।
इसमें पहली बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय मंत्री समेत महाराष्ट्र सरकार के कई मंत्री और सांसद शामिल होंगे। प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी इसमें शामिल हो सकते हैं। इनके अलावा प्रदेश के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा समेत कई मंत्री और नेता शामिल होंगे।
शौर्य स्मारक ट्रस्ट पानीपत के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप पाटील, प्रस्तावित कार्यक्रम के आयोजन के संबंध में रविवार को सेक्टर-12 स्थित एक लॉन में मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने बताया कि मराठों ने हिंदुत्व और हिंदुस्तान को बचाने के लिए पानीपत आकर अहमद शाह अब्दाली के साथ संघर्ष किया था। 14 जनवरी 1761 को पानीपत की धरती पर युद्ध हुआ था। महाराष्ट्र और हरियाणा के वातावरण में काफी अंतर होता है। वहां इस समय गर्मी है, जबकि उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दी है।
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मराठों को वातावरण को लेकर जानकारी नहीं थी। उन्होंने इन सबका सामना करने के बाद पानीपत पहुंचकर अहमद शाह अब्दाली का सामना किया। मराठों की वीरता के आगे अहमद शाह अब्दाली हिंदुस्तान पर राज नहीं कर पाए। बताया जाता है कि यहां इतना खून बहा था कि आम का पेड़ भी काला पड़ गया था।
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इसमें पहली बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय मंत्री समेत महाराष्ट्र सरकार के कई मंत्री और सांसद शामिल होंगे। प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी इसमें शामिल हो सकते हैं। इनके अलावा प्रदेश के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा समेत कई मंत्री और नेता शामिल होंगे।
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शौर्य स्मारक ट्रस्ट पानीपत के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप पाटील, प्रस्तावित कार्यक्रम के आयोजन के संबंध में रविवार को सेक्टर-12 स्थित एक लॉन में मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने बताया कि मराठों ने हिंदुत्व और हिंदुस्तान को बचाने के लिए पानीपत आकर अहमद शाह अब्दाली के साथ संघर्ष किया था। 14 जनवरी 1761 को पानीपत की धरती पर युद्ध हुआ था। महाराष्ट्र और हरियाणा के वातावरण में काफी अंतर होता है। वहां इस समय गर्मी है, जबकि उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दी है।
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मराठों को वातावरण को लेकर जानकारी नहीं थी। उन्होंने इन सबका सामना करने के बाद पानीपत पहुंचकर अहमद शाह अब्दाली का सामना किया। मराठों की वीरता के आगे अहमद शाह अब्दाली हिंदुस्तान पर राज नहीं कर पाए। बताया जाता है कि यहां इतना खून बहा था कि आम का पेड़ भी काला पड़ गया था।