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पीयू में संस्कृत की पढ़ाई कर पा सकते हैं अच्छी नौकरी
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चंडीगढ़। एक समय संस्कृत के ज्ञान के जरिए दुनिया भर में प्रकाश फैलाया जाता था लेकिन बीच में संस्कृत को हल्की सी नजर लग गई। अब फिर से संस्कृत का भविष्य उज्ज्वल दिखने लगा है। संस्कृत से मास्टर डिग्री करने के बाद अगर आप संस्कृत से पीएचडी हैं तो आप अच्छी नौकरी पा सकते हैं। साथ ही सरकारी व प्राइवेट सेक्टर में ट्रांसलेटर की नौकरी भी मिल सकती है।
पंजाब विश्वविद्यालय के संबद्ध कॉलेजों में संस्कृत की पढ़ाई में युवाओं ने रुचि नहीं दिखाई लेकिन पीयू संस्कृत विभाग में इन युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले यहां एडमिशन कम होते थे लेकिन अब हर साल यह आंकड़ा बढ़ रहा है। यहां एमए संस्कृत में 60 सीटें हैं। हर साल 30 से 35 विद्यार्थी यहां एडमिशन लेने आते हैं। सीटें पूरी भर जाएं और विद्यार्थियों को इस कोर्स के महत्व के बारे में पता चले, इसके लिए विभाग समय-समय पर कार्यशाला आदि करता है। इस बार विभाग ने पूरी तैयारी की है कि सीटें पूरी भरें, इसके लिए युवाओं को संस्कृत से एमए करने के बाद रोजगार की स्थिति के बारे में बताया जा रहा है। यदि एमए संस्कृत से कर ली तो ट्रांसलेटर की नौकरी के लिए वह किसी भी क्षेत्र में अप्लाई कर सकते हैं। साथ ही संस्कृत भाषा मजबूत है, व्याकरण का भी यही हाल है। ऐसे में हिंदी भाषा भी इससे मजबूत होती है। इस बार मई में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होगी।
विभाग में अनुभवी शिक्षक हैं जो हर क्षेत्र में अपनी पकड़ रखते हैं। यहां के शिक्षक विद्यार्थियों को संस्कृत के अलावा अन्य विषयों के बारे में ज्ञान बांटकर उन्हें परिपक्व करते हैं। संस्कृत से पढ़ाई करने वाले युवा प्रशासनिक सेवाओं से लेकर कई क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रहे हैं। संस्कृत में यहां पीएचडी भी कराई जाती है। पीएचडी करने के बाद इंटर व डिग्री कॉलेजों में शिक्षक की नौकरी मिलती है। प्रारंभिक वेतन भी 60 से 80 हजार के मध्य होता है। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है तो वेतन भी बढ़ता जाता है।
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संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र कुमार अलंकार कहते हैं कि एमए संस्कृत में अब दाखिले अधिक हो रहे हैं। विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। संस्कृत की पढ़ाई करके कई क्षेत्रों में रोजगार पाया जा सकता है।
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पंजाब विश्वविद्यालय के संबद्ध कॉलेजों में संस्कृत की पढ़ाई में युवाओं ने रुचि नहीं दिखाई लेकिन पीयू संस्कृत विभाग में इन युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले यहां एडमिशन कम होते थे लेकिन अब हर साल यह आंकड़ा बढ़ रहा है। यहां एमए संस्कृत में 60 सीटें हैं। हर साल 30 से 35 विद्यार्थी यहां एडमिशन लेने आते हैं। सीटें पूरी भर जाएं और विद्यार्थियों को इस कोर्स के महत्व के बारे में पता चले, इसके लिए विभाग समय-समय पर कार्यशाला आदि करता है। इस बार विभाग ने पूरी तैयारी की है कि सीटें पूरी भरें, इसके लिए युवाओं को संस्कृत से एमए करने के बाद रोजगार की स्थिति के बारे में बताया जा रहा है। यदि एमए संस्कृत से कर ली तो ट्रांसलेटर की नौकरी के लिए वह किसी भी क्षेत्र में अप्लाई कर सकते हैं। साथ ही संस्कृत भाषा मजबूत है, व्याकरण का भी यही हाल है। ऐसे में हिंदी भाषा भी इससे मजबूत होती है। इस बार मई में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होगी।
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विभाग में अनुभवी शिक्षक हैं जो हर क्षेत्र में अपनी पकड़ रखते हैं। यहां के शिक्षक विद्यार्थियों को संस्कृत के अलावा अन्य विषयों के बारे में ज्ञान बांटकर उन्हें परिपक्व करते हैं। संस्कृत से पढ़ाई करने वाले युवा प्रशासनिक सेवाओं से लेकर कई क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रहे हैं। संस्कृत में यहां पीएचडी भी कराई जाती है। पीएचडी करने के बाद इंटर व डिग्री कॉलेजों में शिक्षक की नौकरी मिलती है। प्रारंभिक वेतन भी 60 से 80 हजार के मध्य होता है। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है तो वेतन भी बढ़ता जाता है।
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संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र कुमार अलंकार कहते हैं कि एमए संस्कृत में अब दाखिले अधिक हो रहे हैं। विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। संस्कृत की पढ़ाई करके कई क्षेत्रों में रोजगार पाया जा सकता है।