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Panchkula News: पुलिस विभाग का टेंडर दिलाने का झांसा देकर 43.50 लाख ठगने वाली महिला गिरफ्तार

Mon, 13 May 2024 05:20 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 13 May 2024 05:20 AM IST
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Woman arrested for defrauding Rs 43.50 lakh on the pretext of getting police department tender
संवाद न्यूज एजेंसी
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पंचकूला। पुलिस विभाग में शीशे का टेंडर दिलवाने का झांसा देकर 43.50 लाख रुपये ठगने के मामले में एमडीसी पुलिस ने एक महिला को गिरफ्तार किया है। आरोपी महिला की पहचान भावना कोहली दिल्ली निवासी के रूप में हुई है। पुलिस ने महिला को अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया है। रिमांड के दौरान पुलिस महिला से रुपयों की बरामदगी करेगी। पुलिस इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार करेगी।
पुलिस के अनुसार, एमडीसी निवासी आशीष सिंह वालिया ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उनकी शीशे की फैक्टरी है। पिछले साल जून में उनके दोस्त सतविंदर ने उनकी मुलाकात दिल्ली निवासी इंद्रपाल और सैम कोहली से करवाई। कोहली ब्रदर्स ने बताया कि उनकी हरियाणा की राजनीतिक और उच्च अधिकारियों में काफी पहुंच है। इसके अलावा हरियाणा पुलिस के कई आला अधिकारी उनको जानते हैं।
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पांच करोड़ का टेंडर दिलाने का दिया झांसा

आरोपियों ने कहा कि वे पुलिस विभाग में शीशे का टेंडर दिलवाएंगे। अगस्त 2023 में इंद्रपाल, भावना कोहली और सैम कोहली ने शिकायतकर्ता को पुलिस विभाग में पांच करोड़ का शीशे के काम का टेंडर देने के बार में बताया। शिकायतकर्ता ने कहा कि उनके पास कोई लाइसेंस नहीं है। इस कारण वे सरकारी टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकते हैं। इंद्रपाल ने कहा कि वह लाइसेंस और टेंडर दोनों दिलवा देगा। इसके लिए 10 प्रतिशत यानि कि 50 लाख रुपये बतौर कमिशन विभाग के अधिकारियों को देने होंगे।
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शिकायतकर्ता ने 24 जुलाई को 16 लाख, 27 जुलाई को 6 लाख और 17 अगस्त 2023 को 20 लाख रुपये इंद्रपाल को दिए। इसके बाद दोबारा सितंबर 2023 में शिकायतकर्ता से 1.50 लाख रुपये मांगे शिकायतकर्ता ने डेढ़ लाख रुपये दे दिए। सितंबर माह में आरोपियों ने शिकायतकर्ता को टेंडर के अलॉटमेंट की कॉपी दी जिसकी जांच करने पर वह फर्जी निकला। धोखाधड़ी सामने आने पर जब पुलिस विभाग में शिकायतकर्ता ने जांच करवाई तो पता चला कि इस तरह के किसी भी काम का टेंडर भी नहीं हुआ है

मांगने के बाद भी शिकायतकर्ता ने 43.50 लाख रुपये वापस नहीं किया। जब शिकायतकर्ता ने अपने स्तर पर खोजबीन की तो पता चला कि दिल्ली के अलग-अलग थानों में उनके खिलाफ धोखाधड़ी और मारपीट के मामले दर्ज हैं।
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