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Panchkula News: उड़ने लगा मजाक तो चेते अधिकारी हटवाई पहाड़ के नीचे लगी रेलिंग

Fri, 07 Feb 2025 12:55 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 07 Feb 2025 12:55 AM IST
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When the joke started flying, the officers were alerted and removed the railing at the bottom of the mountain
मखौल उड़ने के बाद निकाली गई रेलिंग। संवाद 
मोरनी। लोक निर्माण विभाग की बड़ी गलती को अमर उजाला की ओर से प्रमुखता से उठाए जाने के बाद अधिकारियों की नींद टूटी है। खबर प्रकाशित होने के बाद पहाड़ की साइड में लगाई गई रेलिंग को आनन-फानन में हटा दिया गया है। अब इस रेलिंग को सही स्थान पर लगाया जाएगा, जिससे इस मार्ग पर चलने वाले वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
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विभाग की इस लापरवाही की सोशल मीडिया पर भारी आलोचना हो रही है, और लोग इसे ‘पीडब्ल्यूडी का अजूबा’ कहकर मजाक बना रहे थे। खबर सामने आने के बाद लोक निर्माण विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गलत स्थान पर लगी रेलिंग को हटाने का आदेश दिया। अब इसे सही स्थान पर लगाया जाएगा ताकि सड़क की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। हालांकि, यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि इतनी बड़ी गलती होने के बाद भी लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या नहीं?
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इस गलती के बाद आम जनता में गहरी नाराजगी है। लोग सोशल मीडिया पर विभाग की आलोचना कर रहे हैं और इसे ‘खानापूर्ति’, ‘लापरवाही’, और ‘फील्ड से गायब अधिकारियों की देन’ बता रहे हैं। इस मामले ने सरकारी तंत्र की कार्यशैली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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रेलिंग के बजाय बचाव दीवार बनाई जानी चाहिए थी


दरअसल नालाघाट गांव से समलोठा गांव तक बनाई जा रही सड़क पर जिस स्थान पर बचाव दीवार बनाई जानी थी, वहां विभाग ने गलती से रेलिंग लगा दी। ग्रामीणों के अनुसार, पहाड़ से गिरने वाले पत्थरों को रोकने और सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए मजबूत बचाव दीवार आवश्यक थी। लेकिन विभाग ने लापरवाही बरतते हुए वहां केवल रेलिंग लगा दी, जो न तो पहाड़ से गिरने वाले मलबे को रोक सकती है और न ही सड़क पर चलने वाले वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती थी। इसके उलट सड़क के संकरी होने से हादसों का खतरा और बढ़ गया था।




अधिकारी नहीं करते निगरानी, मनमर्जी से काम करते हैं ठेकेदार

मामला सामने आने के बाद स्थानीय संगठनों और पंचायत प्रतिनिधियों ने नाराजगी व्यक्त की है। समाजसेवी दीपक शर्मा और रमेश मांधना का कहना है कि पीडब्ल्यूडी विभाग की ऐसी लापरवाहियां आम हो गई हैं। करोड़ों से लेकर लाखों रुपये तक के विकास कार्यों में कोई भी अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं रहता, जिससे ठेकेदार मनमानी तरीके से काम निपटा देते हैं। बिना निगरानी के हो रहे इन निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की भारी अनदेखी होती है, जिससे जनता को नुकसान झेलना पड़ता है।
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