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पिता बीमार हुए तो संभाला घरबार, एमएससी कर रहीं कनिका बांटतीं हैं अखबार
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पंचकूला। एमएससी गणित की पढ़ाई कर रहीं 21 वर्षीय कनिका रोजाना सुबह अखबार बांटती हैं। पहले पिता अनिल यह काम करते थे लेकिन हार्ट अटैक के बाद से वह बीमार चल रहे हैं और इस हालत में नहीं कि सुबह उठकर यह काम कर सकें। ऐसे में बेटी ने पढ़ाई के साथ पिता का काम संभाल लिया है। कनिका कहती हैं कि यह सिर्फ काम नहीं, एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। पिता को भी अपनी बेटी पर गर्व है।
कनिका का परिवार बलटाना की गिल कॉलोनी में रहता है। पिता की बीमारी के बाद से कनिका रोजाना सुबह साढ़े चार बजे उठकर पंचकूला सेक्टर-8 पहुंचती हैं और यहां से अखबार उठाकर सुबह 9 बजे तक इसका वितरण करतीं हैं। वह मुख्य रूप से पंचकूला सेक्टर-2 की कोठियों और स्थानीय बाजारों में अखबार का वितरण करतीं हैं। कनिका कहती हैं कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता और यह काम तो बेहद जिम्मेदारी भरा है। पढ़ाई के साथ मैं लोगों तक देश-दुनिया से लेकर उनके आसपास घटित होने वाली हर छोटी-बड़ी पहुंचाती हूं। मुझे इस बात से खुशी मिलती है।
बहादुर है मेरी बेटी, परिवार को संभाल रही : अनिल
पिता अनिल कुमार ने बताया कि 16 अगस्त को हार्ट में ब्लॉकेज के बाद उन्हें हार्ट अटैक हुआ था और पंचकूला सेक्टर-6 के नागरिक अस्पताल में उन्हें दाखिल करवाया गया था। यहीं से उनका उपचार चल रहा है। कहते हैं मेरी बेटी बहुत बहादुर है, जिस दिन से उन्हें हार्ट अटैक आया है बेटी तब से पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही है। पढ़ाई के साथ वह उनका काम भी खुद करती है। अनिल कहते हैं कि मुझे अपनी बेटी पर गर्व है। वह किसी बेटे से कम नहीं। बताया कि सुबह साढ़े 4 से 9 बजे तक अखबार वितरित करने के बाद कॉलेज जाती है। कॉलेज से छुट्टी के बाद में मेरा ख्याल भी रखती है।
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प्रतियोगी परीक्षाएं भी दे रहीं कनिका
कनिका ने बताया कि वह गणित से एमएससी कर रही हैं। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं में भी हाथ आजमा रही हैं। इसमें बैंक और एसएससी की परीक्षा की तैयारी भी शामिल है। वह कहती हैं कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद वह अपने पूरे परिवार को बेहतर जिंदगी दे पाएंगी। कनिका ने बताया कि डॉक्टरों ने उनके पिता को वजन उठाने से साफ मना कर दिया है।
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कनिका का परिवार बलटाना की गिल कॉलोनी में रहता है। पिता की बीमारी के बाद से कनिका रोजाना सुबह साढ़े चार बजे उठकर पंचकूला सेक्टर-8 पहुंचती हैं और यहां से अखबार उठाकर सुबह 9 बजे तक इसका वितरण करतीं हैं। वह मुख्य रूप से पंचकूला सेक्टर-2 की कोठियों और स्थानीय बाजारों में अखबार का वितरण करतीं हैं। कनिका कहती हैं कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता और यह काम तो बेहद जिम्मेदारी भरा है। पढ़ाई के साथ मैं लोगों तक देश-दुनिया से लेकर उनके आसपास घटित होने वाली हर छोटी-बड़ी पहुंचाती हूं। मुझे इस बात से खुशी मिलती है।
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बहादुर है मेरी बेटी, परिवार को संभाल रही : अनिल
पिता अनिल कुमार ने बताया कि 16 अगस्त को हार्ट में ब्लॉकेज के बाद उन्हें हार्ट अटैक हुआ था और पंचकूला सेक्टर-6 के नागरिक अस्पताल में उन्हें दाखिल करवाया गया था। यहीं से उनका उपचार चल रहा है। कहते हैं मेरी बेटी बहुत बहादुर है, जिस दिन से उन्हें हार्ट अटैक आया है बेटी तब से पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही है। पढ़ाई के साथ वह उनका काम भी खुद करती है। अनिल कहते हैं कि मुझे अपनी बेटी पर गर्व है। वह किसी बेटे से कम नहीं। बताया कि सुबह साढ़े 4 से 9 बजे तक अखबार वितरित करने के बाद कॉलेज जाती है। कॉलेज से छुट्टी के बाद में मेरा ख्याल भी रखती है।
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प्रतियोगी परीक्षाएं भी दे रहीं कनिका
कनिका ने बताया कि वह गणित से एमएससी कर रही हैं। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं में भी हाथ आजमा रही हैं। इसमें बैंक और एसएससी की परीक्षा की तैयारी भी शामिल है। वह कहती हैं कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद वह अपने पूरे परिवार को बेहतर जिंदगी दे पाएंगी। कनिका ने बताया कि डॉक्टरों ने उनके पिता को वजन उठाने से साफ मना कर दिया है।