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पंजाब की बेटियों ने अपनाया गतका तो परिवार को मिली आजीविका
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पंचकूला। मां-बाप पर कभी बोझ नहीं होती हैं बेटियां। बेटों का हर फर्ज निभाती हैं बेटियां, हर दुख दर्द में साथ निभाती है बेटियां... जैसे अनगिनत कथनों को सार्थक किया है ‘खेलो इंडिया यूथ गेम्स’ में पहली बार गतका में हिस्सा लेने पहुंची हरमीत और परनीत कौर ने। इन दोनों बेटियों न सिर्फ गतका की ट्रेनिंग लेकर पंजाब की पारंपरिक कला को बढ़ावा दिया है, बल्कि इसे अपने परिवार के आजीविका का माध्यम भी बनाया है। इन बेटियों को स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की तरफ से 10-10 हजार रुपये का हर माह स्कॉलरशिप मिलता है। इससे इनके घर और पढ़ाई का खर्च चलता है। पिता मंजीत सिंह कारपेंटर हैं।
लगातार नेशनल में दो बार स्वर्ण पदक जीता
बठिंडा स्थित गांव भुच्चो खुर्द की रहने वाली हरमीत और परनीत कौर ने गतका में नेशनल स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर लगातार दो बार स्वर्ण पदक हासिल किया है। हरमीत और परनीत ने बताया कि दोनों सगी बहनें हैं। दोनों ने 2018 और 2021 में नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया था। अब खेलो इंडिया की बारी है। हरमीत और परनीत ने बताया कि जसकरण सिंह से इस पारंपरिक कला को ग्रहण करने की प्रेरणा मिली थी। पहले वह कीर्तन और गुरुवाणी की कक्षा लेती थी, धीरे-धीरे दोनों ने आत्मरक्षा के लिए गतका सीखना शुरू किया। बाद में इसे कॅरियर के रूप में चुन लिया और आज हमारे पूूरे परिवार का खर्च इसी से चलता है।
खेलो इंडिया में हरमीत और परनीत कौर का दबदबा
एक तरफ जहां हरमीत कौर ने फ्री स्टीक इवेंट में अपने टीम के साथ राजस्थान को 136 प्वाइंट, हरियाणा को 42 प्वाइंट, महाराष्ट्र को 98 प्वाइंट से हराकर फाइनल में दिल्ली से मुकाबले के लिए तैयार हैं। यह मुकाबला ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में रविवार को खेला जाएगा। वहीं उनकी छोटी बहन परनीत कौर क्वार्टर फाइनल में सिंगल स्टीक में 150 की लीड के साथ सेमीफाइनल में चंडीगढ़ की टीम के साथ मुकाबले के लिए तैयार हैं।
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गतका
पंजाब सरकार ने इस खेल को मार्शल आर्ट के तौर पर मान्यता दी है। इंटरनेशनल गतका फेडरेशन की स्थापना 1982 में हुई थी। पंजाब का यह पारंपरिक कला पहली बार खेलो इंडिया यूथ गेम्स में शामिल किया गया है। इससे पहले पंजाब यूनिवर्सिटी की इंटर कॉलेज गेम्स में भी इसके मुकाबले आयोजित हुए हैं। गतका निहंग सिख योद्धाओं की पारंपरिक युद्ध शैली है। इसका प्रयोग आत्मरक्षा के साथ खेल के रूप में भी करते हैं। सिखों के धार्मिक उत्सवों में इस कला का प्रदर्शन किया जाता है।
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लगातार नेशनल में दो बार स्वर्ण पदक जीता
बठिंडा स्थित गांव भुच्चो खुर्द की रहने वाली हरमीत और परनीत कौर ने गतका में नेशनल स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर लगातार दो बार स्वर्ण पदक हासिल किया है। हरमीत और परनीत ने बताया कि दोनों सगी बहनें हैं। दोनों ने 2018 और 2021 में नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया था। अब खेलो इंडिया की बारी है। हरमीत और परनीत ने बताया कि जसकरण सिंह से इस पारंपरिक कला को ग्रहण करने की प्रेरणा मिली थी। पहले वह कीर्तन और गुरुवाणी की कक्षा लेती थी, धीरे-धीरे दोनों ने आत्मरक्षा के लिए गतका सीखना शुरू किया। बाद में इसे कॅरियर के रूप में चुन लिया और आज हमारे पूूरे परिवार का खर्च इसी से चलता है।
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खेलो इंडिया में हरमीत और परनीत कौर का दबदबा
एक तरफ जहां हरमीत कौर ने फ्री स्टीक इवेंट में अपने टीम के साथ राजस्थान को 136 प्वाइंट, हरियाणा को 42 प्वाइंट, महाराष्ट्र को 98 प्वाइंट से हराकर फाइनल में दिल्ली से मुकाबले के लिए तैयार हैं। यह मुकाबला ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में रविवार को खेला जाएगा। वहीं उनकी छोटी बहन परनीत कौर क्वार्टर फाइनल में सिंगल स्टीक में 150 की लीड के साथ सेमीफाइनल में चंडीगढ़ की टीम के साथ मुकाबले के लिए तैयार हैं।
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गतका
पंजाब सरकार ने इस खेल को मार्शल आर्ट के तौर पर मान्यता दी है। इंटरनेशनल गतका फेडरेशन की स्थापना 1982 में हुई थी। पंजाब का यह पारंपरिक कला पहली बार खेलो इंडिया यूथ गेम्स में शामिल किया गया है। इससे पहले पंजाब यूनिवर्सिटी की इंटर कॉलेज गेम्स में भी इसके मुकाबले आयोजित हुए हैं। गतका निहंग सिख योद्धाओं की पारंपरिक युद्ध शैली है। इसका प्रयोग आत्मरक्षा के साथ खेल के रूप में भी करते हैं। सिखों के धार्मिक उत्सवों में इस कला का प्रदर्शन किया जाता है।