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Panchkula News: वीके भावरा रिटायर हो चुके, डीजीपी नियुक्त करने की मांग वाली याचिका हो खारिजः पंजाब
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डीजीपी पद पर नियुक्ति की मांग खारिज करने के खिलाफ हाईकोर्ट में लंबित है भावरा की याचिका
याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, पंजाब सरकार, डीजीपी सहित सभी पक्ष रखने का दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के डीजीपी बनाने का दावा खारिज करने के आदेश को चुनौती देने वाली पूर्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वीके भावरा की अपील को पंजाब सरकार ने खारिज करने की मांग की है। पंजाब सरकार ने कहा कि वह 31 मई को रिटायर हो चुके हैं। ऐसे में यह याचिका औचित्य विहीन हो गई है। हाईकोर्ट ने अब याची व प्रतिवादियों को अगली सुनवाई पर पक्ष रखने का आदेश दिया है।
भावरा ने कैट में याचिका दाखिल करते हुए गौरव यादव की डीजीपी के तौर पर नियुक्ति को चुनौती दी थी। याची ने कहा था कि यादव की नियुक्ति में यूपीएससी की तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इस पद पर नियुक्ति करते हुए नियमों को ताक पर रखा गया जिसके चलते गृह मंत्रालय को पंजाब सरकार को पत्र लिखना पड़ा था। याची ने बताया कि वह 1987 बैच का अफसर हैं, जबकि गौरव यादव 1992 बैच के। इस लिहाज से गौरव यादव याची से बहुत जूनियर हैं। पंजाब बॉर्डर स्टेट है और संवेदनशील भी, इसलिए यहां डीजीपी के पद पर तय प्रक्रिया के तहत ही नियुक्ति की जानी चाहिए। किसी को कार्यकारी डीजीपी नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए।
कैट ने पिछले दिनों भावरा की याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि गौरव यादव जुलाई 2022 से इस पद पर हैं, लेकिन नियुक्ति को एक साल बीतने के बाद चुनौती दी गई। ऐसे में देरी के आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। याची ने कहा कि कैट ने उसकी याचिका को खारिज करते हुए देरी का आधार बनाया है जो सही नहीं है। ऐसे में हाईकोर्ट से आग्रह किया गया कैट के आदेश को रद्द कर डीजीपी गौरव यादव की जगह उन्हें डीजीपी (हेड ऑफ फोर्स) नियुक्त करने के आदेश दे।
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पंजाब सरकार ने वीरवार को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि 31 मई को रिटायर हो चुके हैं और ऐसे में अब इस याचिका का कोई औचित्य नहीं है। पंजाब सरकार ने याचिका के औचित्य विहीन होने के चलते इसे खारिज करने की मांग की है।
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याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, पंजाब सरकार, डीजीपी सहित सभी पक्ष रखने का दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के डीजीपी बनाने का दावा खारिज करने के आदेश को चुनौती देने वाली पूर्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वीके भावरा की अपील को पंजाब सरकार ने खारिज करने की मांग की है। पंजाब सरकार ने कहा कि वह 31 मई को रिटायर हो चुके हैं। ऐसे में यह याचिका औचित्य विहीन हो गई है। हाईकोर्ट ने अब याची व प्रतिवादियों को अगली सुनवाई पर पक्ष रखने का आदेश दिया है।
भावरा ने कैट में याचिका दाखिल करते हुए गौरव यादव की डीजीपी के तौर पर नियुक्ति को चुनौती दी थी। याची ने कहा था कि यादव की नियुक्ति में यूपीएससी की तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इस पद पर नियुक्ति करते हुए नियमों को ताक पर रखा गया जिसके चलते गृह मंत्रालय को पंजाब सरकार को पत्र लिखना पड़ा था। याची ने बताया कि वह 1987 बैच का अफसर हैं, जबकि गौरव यादव 1992 बैच के। इस लिहाज से गौरव यादव याची से बहुत जूनियर हैं। पंजाब बॉर्डर स्टेट है और संवेदनशील भी, इसलिए यहां डीजीपी के पद पर तय प्रक्रिया के तहत ही नियुक्ति की जानी चाहिए। किसी को कार्यकारी डीजीपी नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए।
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कैट ने पिछले दिनों भावरा की याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि गौरव यादव जुलाई 2022 से इस पद पर हैं, लेकिन नियुक्ति को एक साल बीतने के बाद चुनौती दी गई। ऐसे में देरी के आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। याची ने कहा कि कैट ने उसकी याचिका को खारिज करते हुए देरी का आधार बनाया है जो सही नहीं है। ऐसे में हाईकोर्ट से आग्रह किया गया कैट के आदेश को रद्द कर डीजीपी गौरव यादव की जगह उन्हें डीजीपी (हेड ऑफ फोर्स) नियुक्त करने के आदेश दे।
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पंजाब सरकार ने वीरवार को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि 31 मई को रिटायर हो चुके हैं और ऐसे में अब इस याचिका का कोई औचित्य नहीं है। पंजाब सरकार ने याचिका के औचित्य विहीन होने के चलते इसे खारिज करने की मांग की है।