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लंपी की जद में लावारिस गोवंश, विभाग नहीं ले रहा सुध

Tue, 23 Aug 2022 02:01 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 23 Aug 2022 02:01 AM IST
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Unclaimed cows in Lumpi's JD, the department is not taking care
पंचकूला। जिले में लंपी का प्रकोप लगातार बढ़ता ही जा रहा है। हर रोज गोवंश इसकी चपेट में आ रहे हैं। सोमवार को भी 341 पशुओं में लंपी का संक्रमण पाया गया है। इसके अलावा चार पशुओं की मौत की भी पुष्टि हुई है। इस बीमारी की सबसे ज्यादा मार लावारिस पशुओं को झेलनी पड़ रही है। पालतु पशुओं की देखभाल उनके मालिक कर रहे हैं मगर इनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। वहीं अब तक पशुपालन विभाग ने भी इसके उपचार या देखभाल के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
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लंपी स्किन के संक्रमण में आने वाले पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। साथ ही संक्रमण की जद में आने वाले गांवों की संख्या भी बढ़ रही है। सोमवार को लंपी का संक्रमण जिले के 11 नए गांवों में फैल गया है। अब तक कुल 140 गांव और वार्ड संक्रमण की जद में आ चुके हैं। तीन नई गोशालाओं में लंपी से संक्रमित गोवंश मिले हैं। इस तरह कुल 12 गोशालाएं इसकी चपेट में आ चुकी हैं। जिले में कुल 2248 पशु लंपी का शिकार हो चुके हैं, जिनमें से 19 की मौत हो गई है और 657 पशु ठीक हो चुके हैं।
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उपनिदेशक ने किया गोशालाओं का दौरा
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक अनिल बनवाला ने चिकित्सकों की टीम और विभाग के अधिकारियों के साथ शहर की गोशालाओं का दौरा किया। सोमवार को वे चंद्रशेखर गोशाला, नग्गल और श्री माधव गोशाला सुखदर्शनपुर पहुंचे। वहां उन्होंने पशुओं के स्वास्थ्य की जानकारी ली। चिकित्सकों ने पशुओं की जांच की। इसके अलावा उन्होंने गोशाला पदाधिकारियों और विभाग के अधिकारियों को इस बारे में निर्देश जारी किए। इस मौके पर उनके साथ उपमंडल अधिकारी डॉ. सुदेश कुमार, पशु चिकित्सक डॉ. मनीषा चौहान भी उपस्थित रहीं।
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जिले में लंपी का संक्रमण बढ़ रहा है, मगर पशुपालकों को घबराने की जरूरत नहीं है। अगर उन्हें पशु में संक्रमण के लक्षण दिखाई दें तो पशुपालन विभाग को सूचित करें। इसके अलावा लावारिस घूमने वाले पशुओं में संक्रमण की जानकारी मिलने पर उनका भी टीकाकरण किया जा रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी दूध देने वाली और गर्भवती गायों को हो रही है। उनकी देखभाल सबसे ज्यादा की जा रही है। - अनिल बनवाला, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग
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