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हरियाणा : उदयभान ने संभाला हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष पद का जिम्मा, 25 समर्थक विधायकों के साथ हुड्डा ने दिखाई ताकत
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चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष उदयभान की ताजपोशी में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने समर्थक विधायकों के साथ अपनी सियासी ताकत दिखाई। विरोधी खेमे के दिग्गज नेता नए अध्यक्ष के पदभार ग्रहण समारोह से दूर रहे। राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला, विधायक कुलदीप बिश्नोई और ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय चेयरमैन कैप्टन अजय यादव सरीखे नेता नहीं पहुंचे। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा दिन में आकर लौट गईं।
हुड्डा के साथ इनकी दूरियां पहले से जगजाहिर हैं जो संगठन में फेरबदल के बावजूद बरकरार रहीं। उदयभान को बुधवार शाम चार बजे चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पदभार संभालना था लेकिन वह शाम आठ बजे के बाद मुख्यालय पहुंचे। दिल्ली से चंडीगढ़ तक हुड्डा ने उदयभान, दीपेंद्र हुड्डा, कार्यकारी अध्यक्ष जितेंद्र भारद्वाज, समर्थक विधायकों, नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ चंडीगढ़ तक रोड शो निकाला। राई, सोनीपत से चंडीगढ़ तक 20 से अधिक स्थानों पर उनका स्वागत हुआ।
सैलजा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तीन से साढ़े तीन के बीच कांग्रेस मुख्यालय पहुंची। वह कुछ देर रुकी लेकिन कार्यक्रम तीन से चार घंटे लेट होने पर वह वापस लौट गईं। उनकी दिल्ली वापसी की फ्लाइट थी, हालांकि नए अध्यक्ष को कार्यभार पूर्व अध्यक्ष को ही सौंपना होता है। विधायक किरण चौधरी व कार्यकारी अध्यक्ष श्रुति चौधरी कोविड पॉजिटिव होने के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हुईं। सैलजा समर्थक कार्यकारी अध्यक्ष रामकिशन गुर्जर व सुरजेवाला समर्थक सुरेश गुप्ता हुड्डा के रोड शो से दूर रहे। वह सीधे कांग्रेस मुख्यालय ही पहुंचे। कैप्टन अजय यादव के बेटे चिरंजीव राव भी नहीं आए। 31 में से 26 विधायक ही कार्यक्रम में पहुंचे।
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कुलदीप बिश्नाई अध्यक्ष न बनाए जाने से नाराज हैं, उनका न आना पहले से तय था। वह पार्टी के फैसले से नाराज हैं और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करने पर अड़े हुए हैं। उसके बाद ही कांग्रेस में रहने या छोड़ने पर अंतिम निर्णय लेंगे।
हुड्डा पर ही पार्टी को सत्ता में लाने का दारोमदार
उदयभान के पदभार ग्रहण कार्यक्रम से साफ हो गया है कि विरोधी खेमे की चुनौती हुड्डा के सामने पहले की तरह बरकरार रहेगी। पार्टी को 2024 में सत्ता में लाने का दारोमदार उन्हीं पर रहेगा। उन्हें अपने दम पर ही चुनाव में विरोधी दलों को मात देने की बिसात बिछानी होगी। विरोधी खेमा आने वाले दिनों में उदयभान और हुड्डा के सामने चुनौतियां खड़ी कर सकता है। हालांकि, हुड्डा खेमे का अध्यक्ष बनने से पार्टी कार्यकर्ताओं में नए रक्त का संचार हुआ है।
उदयभान के सिर कांटों भरा ताज, सबको साथ लाना चुनौती
नए अध्यक्ष उदयभान के लिए यह जिम्मेदारी कांटों भरे ताज जैसी है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती सबको साथ लाना है। इसके बाद संगठन खड़ा करने में मुश्किलें आ सकती हैं। विरोधी खेमे के नेता अड़चन डाल सकते हैं। पार्टी को दस साल बाद सत्तासीन करने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी होगी, साथ ही सभी क्षत्रपों को साधना होगा। चूंकि, भाजपा-जजपा, आप और इनेलो से पार पाने के लिए एकजुटता ही सबसे बड़ा हथियार होगी।
तीन माह में खड़ा करेंगे संगठन : उदयभान
कांग्रेस अध्यक्ष उदयभान ने कहा कि तीन महीने में पार्टी प्रदेश में संगठन खड़ा करेगी। 7 व 11 मई को दो अहम बैठकें इसी संबंध में बुलाई हैं। पहले ब्लॉक, उसके बाद जिला और अंत में प्रदेश स्तर की कार्यकारिणी गठित होगी। उन्होंने कहा कि संगठन को मजबूत करना प्रमुख ध्येय है। सबको साथ लेकर चलना प्राथमिकता रहेगी।
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हुड्डा के साथ इनकी दूरियां पहले से जगजाहिर हैं जो संगठन में फेरबदल के बावजूद बरकरार रहीं। उदयभान को बुधवार शाम चार बजे चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पदभार संभालना था लेकिन वह शाम आठ बजे के बाद मुख्यालय पहुंचे। दिल्ली से चंडीगढ़ तक हुड्डा ने उदयभान, दीपेंद्र हुड्डा, कार्यकारी अध्यक्ष जितेंद्र भारद्वाज, समर्थक विधायकों, नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ चंडीगढ़ तक रोड शो निकाला। राई, सोनीपत से चंडीगढ़ तक 20 से अधिक स्थानों पर उनका स्वागत हुआ।
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सैलजा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तीन से साढ़े तीन के बीच कांग्रेस मुख्यालय पहुंची। वह कुछ देर रुकी लेकिन कार्यक्रम तीन से चार घंटे लेट होने पर वह वापस लौट गईं। उनकी दिल्ली वापसी की फ्लाइट थी, हालांकि नए अध्यक्ष को कार्यभार पूर्व अध्यक्ष को ही सौंपना होता है। विधायक किरण चौधरी व कार्यकारी अध्यक्ष श्रुति चौधरी कोविड पॉजिटिव होने के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हुईं। सैलजा समर्थक कार्यकारी अध्यक्ष रामकिशन गुर्जर व सुरजेवाला समर्थक सुरेश गुप्ता हुड्डा के रोड शो से दूर रहे। वह सीधे कांग्रेस मुख्यालय ही पहुंचे। कैप्टन अजय यादव के बेटे चिरंजीव राव भी नहीं आए। 31 में से 26 विधायक ही कार्यक्रम में पहुंचे।
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कुलदीप बिश्नाई अध्यक्ष न बनाए जाने से नाराज हैं, उनका न आना पहले से तय था। वह पार्टी के फैसले से नाराज हैं और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करने पर अड़े हुए हैं। उसके बाद ही कांग्रेस में रहने या छोड़ने पर अंतिम निर्णय लेंगे।
हुड्डा पर ही पार्टी को सत्ता में लाने का दारोमदार
उदयभान के पदभार ग्रहण कार्यक्रम से साफ हो गया है कि विरोधी खेमे की चुनौती हुड्डा के सामने पहले की तरह बरकरार रहेगी। पार्टी को 2024 में सत्ता में लाने का दारोमदार उन्हीं पर रहेगा। उन्हें अपने दम पर ही चुनाव में विरोधी दलों को मात देने की बिसात बिछानी होगी। विरोधी खेमा आने वाले दिनों में उदयभान और हुड्डा के सामने चुनौतियां खड़ी कर सकता है। हालांकि, हुड्डा खेमे का अध्यक्ष बनने से पार्टी कार्यकर्ताओं में नए रक्त का संचार हुआ है।
उदयभान के सिर कांटों भरा ताज, सबको साथ लाना चुनौती
नए अध्यक्ष उदयभान के लिए यह जिम्मेदारी कांटों भरे ताज जैसी है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती सबको साथ लाना है। इसके बाद संगठन खड़ा करने में मुश्किलें आ सकती हैं। विरोधी खेमे के नेता अड़चन डाल सकते हैं। पार्टी को दस साल बाद सत्तासीन करने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी होगी, साथ ही सभी क्षत्रपों को साधना होगा। चूंकि, भाजपा-जजपा, आप और इनेलो से पार पाने के लिए एकजुटता ही सबसे बड़ा हथियार होगी।
तीन माह में खड़ा करेंगे संगठन : उदयभान
कांग्रेस अध्यक्ष उदयभान ने कहा कि तीन महीने में पार्टी प्रदेश में संगठन खड़ा करेगी। 7 व 11 मई को दो अहम बैठकें इसी संबंध में बुलाई हैं। पहले ब्लॉक, उसके बाद जिला और अंत में प्रदेश स्तर की कार्यकारिणी गठित होगी। उन्होंने कहा कि संगठन को मजबूत करना प्रमुख ध्येय है। सबको साथ लेकर चलना प्राथमिकता रहेगी।