कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने का मामला: गवर्नर के उठाए सवालों के जवाब तैयार करने में जुटी पंजाब सरकार, सीएम खुद लेकर जाएंगे फाइल
मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी ने अपने 60 दिन के कार्यकाल के दौरान 10 नवंबर को 36000 कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने का एलान किया था। इस संबंध में नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया। मुख्यमंत्री के इस एलान को ताजा चुनावी माहौल में भुनाने के लिए राज्य सरकार ने इसका जोरशोर से प्रचार करते हुए राज्यभर में जगह-जगह पर बड़े होर्डिंग और बैनर भी लगा दिए थे।
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पंजाब की चरणजीत चन्नी सरकार विभिन्न विभागों के 36 हजार कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने के अपने एलान को किसी भी स्थिति में आगामी चुनाव से पहले लागू कर देना चाहती है। सीएमओ के सूत्रों के अनुसार इस संबंधी सरकार के प्रस्ताव पर राज्यपाल द्वारा जो छह सवाल उठाए गए हैं, उनका जवाब तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री ने एडवोकेट जनरल और संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह ने एजी और अन्य अधिकारियों को यह भी कह दिया है कि सवालों के जवाब सहित प्रस्ताव लेकर वह खुद भी राज्यपाल के पास जाएंगे ताकि सवालों के बारे में राज्यपाल को संतुष्ट किया जा सके और प्रस्ताव को तुरंत मंजूरी मिल सके। इस बीच, माना जा रहा है कि पंजाब में अगले हफ्ते चुनाव आचार संहिता लागू हो सकती है और राज्य सरकार उससे पहले ही 36 हजार मुलाजिमों को पक्का करने संबंधी नया नोटिफिकेशन जारी कर देना चाहती है।
वहीं, मंगलवार को मुख्यमंत्री चन्नी की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट की बैठक भी रखी गई है, जो मौजूदा सरकार की आखिरी कैबिनेट बैठक भी होगी। बैठक में सरकार कुछ अन्य एलान भी करेगी, जिनके संबंध में नोटिफिकेशन भी इसी हफ्ते लागू किए जाएंगे।
चन्नी ने लगाया गवर्नर पर फाइल रोकने का आरोप
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने बीते शनिवार को आरोप लगाया था कि उनकी सरकार द्वारा 36000 मुलाजिमों को पक्का करने संबंधी प्रस्ताव को राज्यपाल ने रोक लिया है। राज्यपाल ने रविवार को स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि राज्य सरकार को गत 31 दिसंबर को ही प्रस्ताव छह विभिन्न आपत्तियों के साथ लौटा दिया था और सरकार ने अब तक उन आपत्तियों को दूर करके प्रस्ताव वापस गवर्नर हाउस को नहीं भेजा।
ये है कच्चे मुलाजिम पक्के करने संबंधी कानून
पंजाब सरकार ने अपने दफ्तरों में 10 साल से भी ज्यादा समय से काम कर रहे कच्चे मुलाजिमों की पक्का करने के लिए विधानसभा के पिछले विशेष सत्र में ‘पंजाब प्रोटेक्शन एंड रेगुलराइजेशन ऑफ कांट्रैक्चुअल इंप्लाइज बिल-2021’ पेश कर ध्वनिमत से पारित करा लिया था। कानूनी रूप मिलने के बाद यह फैसला राजपत्र में इसके प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होना था। बिल में कहा गया था कि प्रदेश में 36000 ठेका मुलाजिमों को नियमित किया जाएगा। मुख्यमंत्री का यह एलान पंजाब कांग्रेस के उस वादे का भी हिस्सा है, जिसके तहत 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में जनता से ‘घर-घर रोजगार’ देने का वादा किया था।
इस फैसले के तहत ठेका आधारित मुलाजिम, जिनमें एडहॉक, अस्थायी, वर्क चार्ज्ड और दैनिक वेतन भोगी शामिल हैं, की सेवाएं नियमित की जानी हैं। नियमित किए जाने वाले मुलाजिमों में ग्रुप-सी और ग्रुप-डी पद पर कार्यरत कच्चे मुलाजिम हैं। इनमें से ग्रुप-सी के मुलाजिमों को समय-समय पर संशोधित पांचवें पंजाब वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार 1900-3799 रुपये ग्रेड पे पर नियमित किया जाएगा, जबकि ग्रुप-डी के मुलाजिमों को 1900 रुपये से कम ग्रेड वेतन वाले पद आंके गए हैं। इसके साथ ही, मुलाजिमों को नियमित करते समय आरक्षण नीति के उपबंधों को भी लागू किया जाएगा।
विपक्ष ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
पंजाब आप के सीनियर नेता हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी ने 36000 कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की हकीकत का शनिवार को खुद ही पर्दाफाश कर दिया है। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक तौर पर मान लिया है कि 36000 कच्चे कर्मचारी पक्के नहीं हुए हैं। आप के प्रदेश अध्यक्ष भगवंत मान मुख्यमंत्री चन्नी को खुली चुनौती देते रहे हैं कि 36000 तो दूर केवल 36 कर्मचारियों के नाम ही बता दें, जिनकी सेवाएं चन्नी सरकार ने पक्की की हों।
उधर, शिअद ने गवर्नर से अपील की है कि 36000 से अधिक कच्चे मुलाजिमों से धोखाधड़ी के मामले में मुख्यमंत्री के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया जाए। पार्टी के प्रवक्ता और सीनियर नेता डा. दलजीत सिंह चीमा ने सोमवार को कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री ने कच्चे मुलाजिमों को नियमित करने के बारे में झूठ बोला था। कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने के बारे में झूठे विज्ञापन जारी करने के लिए मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए। झूठे विज्ञापनों पर खर्च किए करोड़ों रुपये मुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी से वसूले जाने चाहिए।