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अपराधी का गरीब मजदूर होना उसकी सजा में रियायत का आधार नहीं : हाईकोर्ट

Thu, 03 Mar 2022 01:47 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 01:47 AM IST
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The criminal being a poor laborer is not the basis for concession in his punishment: High Court
चंडीगढ़। तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी की सजा के खिलाफ अपील को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने अपील खारिज करते हुए कहा कि दोषी का गरीब मजदूर होना उसकी सजा कम करने की मांग के लिए आधार नहीं हो सकता।
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14 जनवरी, 2010 को पीड़ित बच्ची घर से निकली थी और इस दौरान याचिकाकर्ता शंभू उसे अपने साथ ले गया। पीड़िता की मां ने देखा तो सोचा कि वह बच्ची के साथ खेलने के लिए उसे लेकर गया है। याची अक्सर उनके घर आता रहता था इसलिए बच्ची की मां ने इतना ध्यान नहीं दिया। जब बच्ची देर तक नहीं लौटी तो उसे ढूंढना शुरू किया। बाद में बच्ची निर्वस्त्र हालत में मिली और शंभू वहां पेंट की जिप बंद कर रहा था। इसके बाद जब बच्ची को उठाया तो वह खून से लथपथ थी। सेक्टर-34 पुलिस को सूचना दी गई। सूचना पर पुलिस पहुंची और बच्ची को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इस दौरान परीक्षण में पाया गया कि बच्ची से दुष्कर्म हुआ था।
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चंडीगढ़ की ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में एफएसएल रिपोर्ट और मेडिकल रिपोर्ट सहित प्रत्यक्षदर्शी के बयान को आधार बनाकर शंभू को दोषी करार देकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में दाखिल अपील में शंभू ने कहा कि दूसरी बार डीएनए सैंपल लेते हुए याची की इजाजत नहीं ली गई। हाईकोर्ट ने जब सारी दलीलें खारिज कर दी तो याची पक्ष ने कहा कि वह एक गरीब मजदूर है ऐसे में उसकी सजा कम की जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार के कृत्य की स्थिति में याची सजा में किसी भी प्रकार की राहत का हकदार नहीं है।
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