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Panchkula News: सोसायटी में बने फ्लैटों के हस्तांतरण विलेख में छूट रहे पसीने, निर्धारित से ज्यादा वसूल रहे फीस
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संवाद न्यूज एजेंसीपंचकूला। सोसायटी में बने फ्लैट को स्थानांतरित करने के लिए जरूरी हस्तांतरण विलेख -कन्वेयन्स डीड- करवाने में शहरवासियों के पसीने छूट रहे हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण 15 से 20 दिन के इस काम के लिए लोगों को 8 से 10 माह तक चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वहीं लोगों का यह भी आरोप है कि प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए निर्धारित से दोगुना फीस वसूली जा चुकी है। इसके बावजूद उनका काम नहीं किया जा रहा है। शहर के सेक्टर-20 में करीब 120 सोसायटी हैं। इसके अलावा अन्य सेक्टरों में भी सोसायटी बनी हुई हैं। इन सभी में रहने वाले लोगों को कन्वेयन्स डीड करवानी होती है। सेक्टर-20 की सोसायटी नंबर-104 जी, 108, 104 सी और सेक्टर-23 की न्यू आशीर्वाद सोसायटी में रहने वाले सैकड़ों लोगों को यह डीड करवाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोग महीनों एचएसवीपी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। मगर अभी तक उनकी डीड नहीं हई है।
सितंबर 2019 में हमने कन्वेयन्स डीड के लिए 9,14,350 रुपये फीस के तौर पर जमा करवा दिए थे। उसके बाद से लगातार एचएसवीपी के चक्कर काट रहे हैं। ट्रांसफर के लिए निर्धारित से ज्यादा फीस वसूली जा रही है। पॉलिसी में 20 हजार से ज्यादा फीस लेने का प्रावधान नहीं है, जबकि उनकी सोसायटी के 17 लोगों से 30 हजार रुपये के हिसाब से फीस ली गई है, जो सरासर गलत है। - अविनाश मलिक, जीएच-104 जी, सेक्टर-20
प्राधिकरण में कोई चेक लिस्ट नहीं है। जब भी फाइल अगली टेबल पर जाती है तो एक नया ऑब्जेक्शन लगा दिया जाता है। एक साथ यह नहीं बताया जाता कि इसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं। इससे लोगों को प्राधिकरण के चक्कर काटने पड़ते हैं। इससे उनका समय और पैसा दोनों ही बर्बाद होते हैं। अधिकारियों को भी इस बारे में अवगत कराया जाता है, मगर कोई खास सुनवाई नहीं होती है। - इंद्रजीत सिंह सेठी, जीएच-108, सेक्टर-120
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फीस और दस्तावेज दोनों ही जमा करवा दिए। इसके बावजूद पांच महीने से प्राधिकरण के चक्कर काट रहे हैं। एचएसवीपी के अधिकारी और कर्मचारी न तो फाइल में कोई कमी बताते हैं और न ही उसे आगे बढ़ाते हैं। जिन लोगों की फाइल रिजेक्ट हो जाती है उनको कारण तक नहीं बताया जाता है। ऐसा पूरे शहर में बनी सैकड़ों सोसायटी में रहने वाले लोगों के साथ हो रहा है। अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए। - अनिल बिहानी, जीएच-104सी, सेक्टर-20
फाइल महीनों तक प्राधिकरण के टेबलों पर पड़ी रहती हैं। इस दौरान कर्मचारी बदल जाते हैं। नए कर्मचारी को फिर से पूरा मामला समझाना पड़ता है। इसी जद्दोजहद में कुछ दिन में होने वाला काम महिनों तक अटका पड़ा रहता है। लोग अपना काम-धाम छोड़कर पूरा का पूरा दिन प्राधिकरण में बिता देते हैं। इससे लोगों को काफी मानसिक परेशानी का सामना भी करना पड़ता है। अधिकारियों और कर्मचारियों का काम करने का तरीका बहुत ही धीमा है। - टीके शर्मा, जीएच104आई, सेक्टर-20
जिन सोसायटी की फाइल में कोई अड़चन नहीं होती है, उनकी कन्वेयन्स डीड होने में कोई समय नहीं लगता है। जिनकी फाइल में तकनीकी दिक्कतें होती हैं, उनमें कानूनी सलाह लेनी पड़ती है। कोई और आपत्ति उसमें दर्ज होती है तो थोड़ा समय लग जाता है। हमारा प्रयास रहता है कि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। - मानव मलिक, ईओ पंचकूला, एचएसवीपी
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सितंबर 2019 में हमने कन्वेयन्स डीड के लिए 9,14,350 रुपये फीस के तौर पर जमा करवा दिए थे। उसके बाद से लगातार एचएसवीपी के चक्कर काट रहे हैं। ट्रांसफर के लिए निर्धारित से ज्यादा फीस वसूली जा रही है। पॉलिसी में 20 हजार से ज्यादा फीस लेने का प्रावधान नहीं है, जबकि उनकी सोसायटी के 17 लोगों से 30 हजार रुपये के हिसाब से फीस ली गई है, जो सरासर गलत है। - अविनाश मलिक, जीएच-104 जी, सेक्टर-20
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प्राधिकरण में कोई चेक लिस्ट नहीं है। जब भी फाइल अगली टेबल पर जाती है तो एक नया ऑब्जेक्शन लगा दिया जाता है। एक साथ यह नहीं बताया जाता कि इसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं। इससे लोगों को प्राधिकरण के चक्कर काटने पड़ते हैं। इससे उनका समय और पैसा दोनों ही बर्बाद होते हैं। अधिकारियों को भी इस बारे में अवगत कराया जाता है, मगर कोई खास सुनवाई नहीं होती है। - इंद्रजीत सिंह सेठी, जीएच-108, सेक्टर-120
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फीस और दस्तावेज दोनों ही जमा करवा दिए। इसके बावजूद पांच महीने से प्राधिकरण के चक्कर काट रहे हैं। एचएसवीपी के अधिकारी और कर्मचारी न तो फाइल में कोई कमी बताते हैं और न ही उसे आगे बढ़ाते हैं। जिन लोगों की फाइल रिजेक्ट हो जाती है उनको कारण तक नहीं बताया जाता है। ऐसा पूरे शहर में बनी सैकड़ों सोसायटी में रहने वाले लोगों के साथ हो रहा है। अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए। - अनिल बिहानी, जीएच-104सी, सेक्टर-20
फाइल महीनों तक प्राधिकरण के टेबलों पर पड़ी रहती हैं। इस दौरान कर्मचारी बदल जाते हैं। नए कर्मचारी को फिर से पूरा मामला समझाना पड़ता है। इसी जद्दोजहद में कुछ दिन में होने वाला काम महिनों तक अटका पड़ा रहता है। लोग अपना काम-धाम छोड़कर पूरा का पूरा दिन प्राधिकरण में बिता देते हैं। इससे लोगों को काफी मानसिक परेशानी का सामना भी करना पड़ता है। अधिकारियों और कर्मचारियों का काम करने का तरीका बहुत ही धीमा है। - टीके शर्मा, जीएच104आई, सेक्टर-20
जिन सोसायटी की फाइल में कोई अड़चन नहीं होती है, उनकी कन्वेयन्स डीड होने में कोई समय नहीं लगता है। जिनकी फाइल में तकनीकी दिक्कतें होती हैं, उनमें कानूनी सलाह लेनी पड़ती है। कोई और आपत्ति उसमें दर्ज होती है तो थोड़ा समय लग जाता है। हमारा प्रयास रहता है कि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। - मानव मलिक, ईओ पंचकूला, एचएसवीपी