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सर्वर हो रहा डाउन, पंजीकरण नहीं आसान
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चंडीगढ़। गिरते भूजल स्तर में सुधार लाने के लिए सरकार की ओर से शुरू की गई ‘मेरा पानी मेरी योजना’ के लिए पंजीकरण कराने में किसानों को परेशानी आ रही है। सर्वर डाउन होने से और एक साथ अधिक लोगों के पोर्टल पर जाने के कारण किसानों का पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। पिछले दो दिन से पोर्टल पर लोड अधिक होने से रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहे हैं। उधर, पंजीकरण की आथिरी तिथि 25 जून है, ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ रही है।
सीएम मनोहर लाल ने 11 जून से इस पोर्टल की शुुरुआत की थी। इसके बाद से किसान इस पर रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। पिछली बार मेरा पानी और मेरी विरासत के लिए अलग से पोर्टल था, लेकिन इस बार किसानों को दो स्थानों पर पंजीकरण न कराना पड़े। इसलिए इसको मेरी फसल मेरा ब्यौरा से जोड़ा गया है। ऐसे में एक साथ दोनों पोर्टल के जोड़ने से डाटा काफी हैवी हो गया हैै। डबवाली के किसान रवि कुमार, महेंद्र सिंह ने बताया कि वे इस बार धान की बजाए बागवानी की खेती करेंगे। पिछले दो दिनों से पोर्टल पर पंजीकरण की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सर्वर डाउन बताया जा रहा है। वहीं, करनाल के अमित कुमार, प्रवीन ने बताया कि पोर्टल में शुरू से ही दिक्कत चल रही है। एक किसान का पंजीकरण कराने में ही घंटे से अधिक का समय लग रहा है। पंजीकरण में किसान का आधार कार्ड, पहचान पत्र, बैंक अकाउंट पासबुक और कृषि योग्य भूमि के कागज की जानकारी देनी होती है। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. जगराज ढांडा ने कहा कि पोर्टल में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। एक साथ अधिक लोगों के पोर्टल पर जाने से कुछ इश्यू होगा। इसके लिए बाकायदा आईटी सैल काम कर रही है।
7 हजार प्रति एकड़ देकर धान का रकबा घटाने की कोशिश
प्रदेश में गिरते भूजल के चलते इस बार प्रदेश सरकार ने धान का करीब दो लाख एकड़ रकबा कम करते करीब 12 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए सरकार मेरा पानी, मेरी विरासत योजना अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 7 हजार रुपए का भुगतान कर रही है। इसके तहत धान को छोड़कर मक्का, दाल या सब्जी या बागवानी फसल उगानी होगी। जो किसान ऐसा करते हैं, उनको मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण कराना जरूरी है, तभी किसान को सरकारी मदद मिल सकेगी। बता दें कि हरियाणा के 19 ब्लॉक ऐसे है, जो डार्क जोन में है, उसमें 11 ब्लॉक में धान की खेती नहीं होती है।
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सीएम मनोहर लाल ने 11 जून से इस पोर्टल की शुुरुआत की थी। इसके बाद से किसान इस पर रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। पिछली बार मेरा पानी और मेरी विरासत के लिए अलग से पोर्टल था, लेकिन इस बार किसानों को दो स्थानों पर पंजीकरण न कराना पड़े। इसलिए इसको मेरी फसल मेरा ब्यौरा से जोड़ा गया है। ऐसे में एक साथ दोनों पोर्टल के जोड़ने से डाटा काफी हैवी हो गया हैै। डबवाली के किसान रवि कुमार, महेंद्र सिंह ने बताया कि वे इस बार धान की बजाए बागवानी की खेती करेंगे। पिछले दो दिनों से पोर्टल पर पंजीकरण की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सर्वर डाउन बताया जा रहा है। वहीं, करनाल के अमित कुमार, प्रवीन ने बताया कि पोर्टल में शुरू से ही दिक्कत चल रही है। एक किसान का पंजीकरण कराने में ही घंटे से अधिक का समय लग रहा है। पंजीकरण में किसान का आधार कार्ड, पहचान पत्र, बैंक अकाउंट पासबुक और कृषि योग्य भूमि के कागज की जानकारी देनी होती है। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. जगराज ढांडा ने कहा कि पोर्टल में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। एक साथ अधिक लोगों के पोर्टल पर जाने से कुछ इश्यू होगा। इसके लिए बाकायदा आईटी सैल काम कर रही है।
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7 हजार प्रति एकड़ देकर धान का रकबा घटाने की कोशिश
प्रदेश में गिरते भूजल के चलते इस बार प्रदेश सरकार ने धान का करीब दो लाख एकड़ रकबा कम करते करीब 12 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए सरकार मेरा पानी, मेरी विरासत योजना अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 7 हजार रुपए का भुगतान कर रही है। इसके तहत धान को छोड़कर मक्का, दाल या सब्जी या बागवानी फसल उगानी होगी। जो किसान ऐसा करते हैं, उनको मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण कराना जरूरी है, तभी किसान को सरकारी मदद मिल सकेगी। बता दें कि हरियाणा के 19 ब्लॉक ऐसे है, जो डार्क जोन में है, उसमें 11 ब्लॉक में धान की खेती नहीं होती है।
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