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एससी-बीसी बच्चों को परीक्षा देने, डिग्री लेने में नहीं होगी दिक्कत
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चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने एससी-बीसी विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है। अब उन्हें परीक्षा देने, डिग्री लेने में कोई दिक्कत नहीं होगी। प्रदेश सरकार ने बीच का रास्ता निकाला है। विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति में से सहायता प्राप्त कॉलेजों को फीस दी जाएगी। विवि फीस की राशि काटकर शेष छात्रवृत्ति बच्चों के बैंक खातों में भेजेंगे।
वीरवार को शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद मंत्री ने बताया कि सहायता-प्राप्त कॉलेजों ने एससी विद्यार्थियों की विश्वविद्यालय फीस से जुड़े मुद्दे को उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार के नियमों का अध्ययन करने के निर्देश दिए, साथ ही कहा योजना में कुछ इस तरह का प्रावधान करें कि फीस की राशि विवि छात्रवृत्ति से काटकर कॉलेजों को दें और बाकी पैसे बच्चे के खाते में भेजें।
बैठक में अनेक एसोसिएशन का एतराज कॉलेजों में ऑनलाइन पोर्टल के चलते दाखिलों में हो रही देरी को लेकर था। पिछले साल कोरोना के चलते कुछ देरी हो गई थी, लेकिन अबकी बार इस तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी। पोर्टल को जल्द ही परिवार पहचान पत्र से जोड़ा जाएगा ताकि विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति समेत विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्राप्त करने में आसानी हो। उन्होंने अधिकारियों को ग्रेजुएशन के द्वितीय और तृतीय वर्ष की दाखिला प्रक्रिया का सरलीकरण करने के निर्देश दिए।
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आंबेडकर स्टूडेंट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष गौतम भोरिया, दिनेश दहिया व हरिश कांटिवल ने बताया कि पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के मुद्दे को लेकर शिक्षा मंत्री कंवर पाल के साथ बैठक सार्थक रही। उन्होंने शिक्षा मंत्री को बताया कि एससी-बीसी विद्यार्थियों की लगभग 4-5 साल तक की छात्रवृत्ति नहीं आई है। विद्यार्थियों के सामने पढ़ाई छोड़ने तक की नौबत है। जिस तरह पंजाब एससी विद्यार्थियों की पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में कोई फीस नहीं लगती है, उसी तरह हरियाणा के भी एससी विद्यार्थियों की पंजाब विश्वविद्यालय समेत हरियाणा में भी फीस न लगे। हरियाणा सरकार छात्रवृत्ति का पैसा सीधा पंजाब विश्वविद्यालय व अन्य विवि को भेजे। कंवर पाल सभी मांगों को उचित ठहराया व जल्द समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सात यूनियनों की जायज मांगों को मान लिया गया है। कुछ मांगों में पेचीदगियां हैं, जांच कराकर उनकी व्यवहारिकता का पता लगाया जाएगा।
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वीरवार को शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद मंत्री ने बताया कि सहायता-प्राप्त कॉलेजों ने एससी विद्यार्थियों की विश्वविद्यालय फीस से जुड़े मुद्दे को उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार के नियमों का अध्ययन करने के निर्देश दिए, साथ ही कहा योजना में कुछ इस तरह का प्रावधान करें कि फीस की राशि विवि छात्रवृत्ति से काटकर कॉलेजों को दें और बाकी पैसे बच्चे के खाते में भेजें।
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बैठक में अनेक एसोसिएशन का एतराज कॉलेजों में ऑनलाइन पोर्टल के चलते दाखिलों में हो रही देरी को लेकर था। पिछले साल कोरोना के चलते कुछ देरी हो गई थी, लेकिन अबकी बार इस तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी। पोर्टल को जल्द ही परिवार पहचान पत्र से जोड़ा जाएगा ताकि विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति समेत विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्राप्त करने में आसानी हो। उन्होंने अधिकारियों को ग्रेजुएशन के द्वितीय और तृतीय वर्ष की दाखिला प्रक्रिया का सरलीकरण करने के निर्देश दिए।
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आंबेडकर स्टूडेंट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष गौतम भोरिया, दिनेश दहिया व हरिश कांटिवल ने बताया कि पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के मुद्दे को लेकर शिक्षा मंत्री कंवर पाल के साथ बैठक सार्थक रही। उन्होंने शिक्षा मंत्री को बताया कि एससी-बीसी विद्यार्थियों की लगभग 4-5 साल तक की छात्रवृत्ति नहीं आई है। विद्यार्थियों के सामने पढ़ाई छोड़ने तक की नौबत है। जिस तरह पंजाब एससी विद्यार्थियों की पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में कोई फीस नहीं लगती है, उसी तरह हरियाणा के भी एससी विद्यार्थियों की पंजाब विश्वविद्यालय समेत हरियाणा में भी फीस न लगे। हरियाणा सरकार छात्रवृत्ति का पैसा सीधा पंजाब विश्वविद्यालय व अन्य विवि को भेजे। कंवर पाल सभी मांगों को उचित ठहराया व जल्द समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सात यूनियनों की जायज मांगों को मान लिया गया है। कुछ मांगों में पेचीदगियां हैं, जांच कराकर उनकी व्यवहारिकता का पता लगाया जाएगा।