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तैयारी : नंदीशाला निर्माण की कवायद तेज, जमीन तलाशने में जुटा निगम, शहर को लावारिस पशुओं से मुक्त करने घोषणा बनी गले की हड्डी
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पंचकूला। शहर को लावारिस पशुओं से मुक्त करने के लिए नंदीशाला के निर्माण की कवायद तेज हो गई है। नगर निगम नंदीशाला के लिए लगातार जमीन तलाश रहा है। खगेशरा में निगम की खाली पड़ी पांच एकड़ जमीन पर निगम अधिकारियों ने नंदीशाला का निर्माण करवाने का फैसला किया है। नगर निगम सदन के सदस्यों की सहमति के लिए इस प्रस्ताव को पटल पर रखा जाएगा। जैसे ही सदन के सदस्य मंजूरी प्रदान करेंगे निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता और मेयर कुलभूषण गोयल नंदीशाला निर्माण के प्रस्ताव को पहले ही हरी झंडी दे चुके हैं।
शहरवासियों को लावारिस पशुओं से होने वाली परेशानी को दूर करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। निगम ने गांव सुखदर्शनपुर में करोड़ों की लागत से गोशाला का निर्माण करवाया है, इसका संचालन माधव गोशाला प्रबंधन कमेटी कर रही है। इस गोशाला में करीब एक हजार लावारिस पशुओं को निगम की टीम पहुंचा चुकी है। वहीं, माता मनसा देवी गोधाम गोशाला में तीन सौ से अधिक पशुओं को पहुंचाया जा चुका है। इसके बाद भी शहर के अंदर सड़कों पर लावारिस पशु इधर-उधर घूमते साफ दिखाई दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में शहरवासियों को इस समस्या से कैसे निजात दिलाई जाए इस पर लगातार मंथन किया जा रहा है।
गाय पहुंचीं गोशाला, सड़कों पर नंदी
नगर निगम के अधिकारियों का दावा है कि शहर के अंदर से गाय और उनके गोवंश को पकड़ कर गोशालाओं में पहुंचा दिया गया है। वर्तमान में सड़कों पर नंदी घूम रहे हैं। इनके रखने का अभी कोई प्रबंध नहीं है। इसके लिए नंदीशाला के निर्माण का फैसला लिया गया है। इस प्रोजेक्ट को जल्द धरातल पर उतारा जाएगा और शहरवासियों को इस परेशानी से निजात दिलाई जाएगी। उधर, नगर निगम के मेयर कुलभूषण गोयल का कहना है कि गांव कोट के खगेशरा में नंदीशाला के निर्माण को लेकर जमीन चिह्नित कर ली गई है। सदन की मीटिंग में फैसला होने के बाद निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
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हादसों का कारण बंद रहे लावारिस पशु
शहर के अंदर और पंचकूला-यमुननागर, कालका-शिमला हाईवे पर सबसे ज्यादा हादसे लावारिस पशुओं के कारण हो रहे हैं। इन हादसों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है और वाहन भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। लोग इस समस्या से निजात दिलाने के लिए लगातार मांग कर रहे हैं। लोगों की मांग यह भी है कि शहर के अंदर संचालित डेयरियों को भी बाहर शिफ्ट किया जाए, क्योंकि डेयरी संचालक दूध निकालने के बाद पशुओं को खुला छोड़ देते हैं जो हादसे का कारण बनते हैं।
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शहरवासियों को लावारिस पशुओं से होने वाली परेशानी को दूर करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। निगम ने गांव सुखदर्शनपुर में करोड़ों की लागत से गोशाला का निर्माण करवाया है, इसका संचालन माधव गोशाला प्रबंधन कमेटी कर रही है। इस गोशाला में करीब एक हजार लावारिस पशुओं को निगम की टीम पहुंचा चुकी है। वहीं, माता मनसा देवी गोधाम गोशाला में तीन सौ से अधिक पशुओं को पहुंचाया जा चुका है। इसके बाद भी शहर के अंदर सड़कों पर लावारिस पशु इधर-उधर घूमते साफ दिखाई दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में शहरवासियों को इस समस्या से कैसे निजात दिलाई जाए इस पर लगातार मंथन किया जा रहा है।
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गाय पहुंचीं गोशाला, सड़कों पर नंदी
नगर निगम के अधिकारियों का दावा है कि शहर के अंदर से गाय और उनके गोवंश को पकड़ कर गोशालाओं में पहुंचा दिया गया है। वर्तमान में सड़कों पर नंदी घूम रहे हैं। इनके रखने का अभी कोई प्रबंध नहीं है। इसके लिए नंदीशाला के निर्माण का फैसला लिया गया है। इस प्रोजेक्ट को जल्द धरातल पर उतारा जाएगा और शहरवासियों को इस परेशानी से निजात दिलाई जाएगी। उधर, नगर निगम के मेयर कुलभूषण गोयल का कहना है कि गांव कोट के खगेशरा में नंदीशाला के निर्माण को लेकर जमीन चिह्नित कर ली गई है। सदन की मीटिंग में फैसला होने के बाद निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
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हादसों का कारण बंद रहे लावारिस पशु
शहर के अंदर और पंचकूला-यमुननागर, कालका-शिमला हाईवे पर सबसे ज्यादा हादसे लावारिस पशुओं के कारण हो रहे हैं। इन हादसों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है और वाहन भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। लोग इस समस्या से निजात दिलाने के लिए लगातार मांग कर रहे हैं। लोगों की मांग यह भी है कि शहर के अंदर संचालित डेयरियों को भी बाहर शिफ्ट किया जाए, क्योंकि डेयरी संचालक दूध निकालने के बाद पशुओं को खुला छोड़ देते हैं जो हादसे का कारण बनते हैं।