{"_id":"5f5fa96c8ebc3e4d8c338487","slug":"petition-filed-in-the-high-court-for-the-cbi-investigation-of-the-stipend-scam-panchkula-news-pkl387878691","type":"story","status":"publish","title_hn":"पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाले की सीबीआई जांच के लिए उच्च न्यायालय पहुंची जनहित याचिका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाले की सीबीआई जांच के लिए उच्च न्यायालय पहुंची जनहित याचिका
विज्ञापन
चंडीगढ़। अनुसूचित जाति वर्ग के आवेदकों को दी जाने वाली पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप में करोड़ों के घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग को लेकर पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका पर न्यायालय जल्द सुनवाई करेगा।
चंडीगढ़ के सतबीर सिंह वालिया ने एडवोकेट फेरी सोफेट के जरिये दायर याचिका में न्यायालय को बताया है कि पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप के जरिये केंद्र अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग आदि के होनहार छात्रों को आर्थिक सहायता देती है। यह राशि राज्य सरकार के जरिये जारी की जाती है। केंद्र ने इसके लिए मार्च 2019 में तीन किस्तों में 303.92 करोड़ जारी किए थे। गत वर्ष 18 दिसंबर की ट्रेजरी एक्सपेंडिचर रिपोर्ट के अनुसार विभाग 248.11 करोड़ निकलवा चूका था और खाते में 55.81 करोड़ बचे थे, जिसे बाद में 2015-16 और 2016-17 के छात्रों के मेंटेनेंस अलाउंस के नाम पर निकाला गया। जो 248.11 करोड़ निकले गए थे, उनमे से ट्रेजरी विभाग को काफी मशक्कत के बाद भी 39 करोड़ की पेमेंट्स की कोई फाइल मिली ही नहीं। बताया जाता है कि यह राशि कई संस्थानों को जारी की गई है।
याचिकाकर्ता ने बताया कि इस पूरे घोटाले के सामने आने के बाद जनवरी में मुख्यमंत्री ने ऑडिट रिव्यू के आदेश दिए थे। इसके बाद मई में हुई केबिनेट की बैठक में निर्णय लिया गया कि जहां क्लेम अवैध पाए गए हैं, उन पर 9 प्रतिशत पीनल ब्याज लगाया जाएगा और जहां आपत्तिजनक राशि 50 या उससे ज्यादा है उन पर आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस घोटाले के खुलासे के बाद पंजाब ने तीन आईएएस अधिकारियों को दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। केंद्र ने भी दो संयुक्त सचिव स्तर के अफसरों को जांच के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि चाहे राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार दोनों ने ही बिना कोई मामला दर्ज किए जांच शुरू कर दी है। साफ है कि इस मामले में सही जांच नहीं की जा रही, लिहाजा इस जांच सीबीआई को सौंपी जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़ के सतबीर सिंह वालिया ने एडवोकेट फेरी सोफेट के जरिये दायर याचिका में न्यायालय को बताया है कि पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप के जरिये केंद्र अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग आदि के होनहार छात्रों को आर्थिक सहायता देती है। यह राशि राज्य सरकार के जरिये जारी की जाती है। केंद्र ने इसके लिए मार्च 2019 में तीन किस्तों में 303.92 करोड़ जारी किए थे। गत वर्ष 18 दिसंबर की ट्रेजरी एक्सपेंडिचर रिपोर्ट के अनुसार विभाग 248.11 करोड़ निकलवा चूका था और खाते में 55.81 करोड़ बचे थे, जिसे बाद में 2015-16 और 2016-17 के छात्रों के मेंटेनेंस अलाउंस के नाम पर निकाला गया। जो 248.11 करोड़ निकले गए थे, उनमे से ट्रेजरी विभाग को काफी मशक्कत के बाद भी 39 करोड़ की पेमेंट्स की कोई फाइल मिली ही नहीं। बताया जाता है कि यह राशि कई संस्थानों को जारी की गई है।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता ने बताया कि इस पूरे घोटाले के सामने आने के बाद जनवरी में मुख्यमंत्री ने ऑडिट रिव्यू के आदेश दिए थे। इसके बाद मई में हुई केबिनेट की बैठक में निर्णय लिया गया कि जहां क्लेम अवैध पाए गए हैं, उन पर 9 प्रतिशत पीनल ब्याज लगाया जाएगा और जहां आपत्तिजनक राशि 50 या उससे ज्यादा है उन पर आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस घोटाले के खुलासे के बाद पंजाब ने तीन आईएएस अधिकारियों को दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। केंद्र ने भी दो संयुक्त सचिव स्तर के अफसरों को जांच के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि चाहे राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार दोनों ने ही बिना कोई मामला दर्ज किए जांच शुरू कर दी है। साफ है कि इस मामले में सही जांच नहीं की जा रही, लिहाजा इस जांच सीबीआई को सौंपी जाए।
विज्ञापन