{"_id":"62fc029a5aba1e928f8c6eb35f2ccbe3","slug":"panic-in-the-city-of-stray-dogs","type":"story","status":"publish","title_hn":"रात में कौन भागता है वाहनों के पीछे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रात में कौन भागता है वाहनों के पीछे
अमर उजाला पंचकूला
Updated Tue, 15 Oct 2013 01:57 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर में कुत्तों ने आतंक मचा रखा है। ऐसी कोई सड़क नहीं है, जहां कुत्ते नजर न आएं। खास तौर से रात के वक्त तो कुत्तों की दादागिरी पूरी चलती है।
सड़क से गुजरने वाली हर बाइक, स्कूटर के पीछे कुत्ते भागते हैं। कई जगह पर तो गाड़ियां भी नहीं बक्शी जाती हैं। जब वाहन रुक जाता है, तो कुत्ते भी थम जाते हैं, लेकिन जैसे ही दोबारा चलने लगते हैं, तो फिर कुत्ते पीछे पड़ जाते हैं।
निगम के मुताबिक शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 300 से ज्यादा कुत्ते हैं। शहर में कराए गए सर्वे में पता चला कि ज्यादातर कुत्ते ऐसी सड़कों पर हैं, जो या तो तंग हैं या वहां आवाजाही कम है।
हालात किस हद तक खराब हैं, इसका अंदाजा सरकारी अस्पताल के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। पिछले तीन साल में एक हजार के करीब ऐसे केस आए, जिन्हें कुत्ता काटा था।
विज्ञापन
अगर इस साल की बात करें तो आंकड़ा 300 को पार कर चुका है। अलाम यह है कि पिछले डेढ़ साल में कुत्तों को पकड़ने का टेंडर ही नहीं हुआ था।
टेंडर हुआ, लेकिन ऑपरेशन नहीं हो पाया गत सप्ताह नगर निगम की तरफ से कुत्तों को पकड़ने का टेंडर जारी हो गया था। 525 रुपए प्रति कुत्ते के हिसाब से दाम तय हुए।
कुत्ते पकड़ने वाली टीम ने चार-पांच कुत्ते पकड़कर सेक्टर-3 स्थित पेट एनिमल सेंटर मे पहुंचाए भी, ताकि उनका ऑपरेशन किया जा सके, लेकिन सेंटर के आस-पास रहने वाले लोगों ने विरोध किया, क्योंकि पकड़े जाने के बाद कुत्तों ने काफी शोर किया।
सूत्रों के मुताबिक विरोध के चलते एक बार फिर कुत्ते पकड़ने का काम अटक गया है।
अब आगे क्या होगा
सरकारी पेट सेंटर में तो विरोध के चलते ऑप्रेशन नहीं हो पाएंगे। अब निगम को इसका कोई अल्टरनेट नहीं मिल रहा है कि आखिर कहां पर कुत्तों का ऑप्रेशन कराया जाए? ऐसा कोई सेंटर नहीं है, जहां ऑप्रेशन हो सके, तो तय है कि कुत्ते ऐसे ही भागते रहेंगे और लोगों को काटते रहेंगे।
यह एरिया सबसे खतरनाक
- घग्गर पार, सेक्टर-24, 25 व 26
- सेक्टर-15, 14 व इंडस्ट्रीयल एरिया
- सेक्टर-16 लेबर चौक
- रेलवे स्टेशन से पंचकूला के रास्ते में
विज्ञापन
सड़क से गुजरने वाली हर बाइक, स्कूटर के पीछे कुत्ते भागते हैं। कई जगह पर तो गाड़ियां भी नहीं बक्शी जाती हैं। जब वाहन रुक जाता है, तो कुत्ते भी थम जाते हैं, लेकिन जैसे ही दोबारा चलने लगते हैं, तो फिर कुत्ते पीछे पड़ जाते हैं।
निगम के मुताबिक शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 300 से ज्यादा कुत्ते हैं। शहर में कराए गए सर्वे में पता चला कि ज्यादातर कुत्ते ऐसी सड़कों पर हैं, जो या तो तंग हैं या वहां आवाजाही कम है।
विज्ञापन
हालात किस हद तक खराब हैं, इसका अंदाजा सरकारी अस्पताल के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। पिछले तीन साल में एक हजार के करीब ऐसे केस आए, जिन्हें कुत्ता काटा था।
विज्ञापन
अगर इस साल की बात करें तो आंकड़ा 300 को पार कर चुका है। अलाम यह है कि पिछले डेढ़ साल में कुत्तों को पकड़ने का टेंडर ही नहीं हुआ था।
टेंडर हुआ, लेकिन ऑपरेशन नहीं हो पाया गत सप्ताह नगर निगम की तरफ से कुत्तों को पकड़ने का टेंडर जारी हो गया था। 525 रुपए प्रति कुत्ते के हिसाब से दाम तय हुए।
कुत्ते पकड़ने वाली टीम ने चार-पांच कुत्ते पकड़कर सेक्टर-3 स्थित पेट एनिमल सेंटर मे पहुंचाए भी, ताकि उनका ऑपरेशन किया जा सके, लेकिन सेंटर के आस-पास रहने वाले लोगों ने विरोध किया, क्योंकि पकड़े जाने के बाद कुत्तों ने काफी शोर किया।
सूत्रों के मुताबिक विरोध के चलते एक बार फिर कुत्ते पकड़ने का काम अटक गया है।
अब आगे क्या होगा
सरकारी पेट सेंटर में तो विरोध के चलते ऑप्रेशन नहीं हो पाएंगे। अब निगम को इसका कोई अल्टरनेट नहीं मिल रहा है कि आखिर कहां पर कुत्तों का ऑप्रेशन कराया जाए? ऐसा कोई सेंटर नहीं है, जहां ऑप्रेशन हो सके, तो तय है कि कुत्ते ऐसे ही भागते रहेंगे और लोगों को काटते रहेंगे।
यह एरिया सबसे खतरनाक
- घग्गर पार, सेक्टर-24, 25 व 26
- सेक्टर-15, 14 व इंडस्ट्रीयल एरिया
- सेक्टर-16 लेबर चौक
- रेलवे स्टेशन से पंचकूला के रास्ते में