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नाराजगी : आखिर कब लावारिस पशुओं से मुक्त होगा पंचकूला, पशुओं से हो रहे हैं हादसे, कइयों की जा चुकी है जान, गांव सुखदर्शनपुर की गोशाला से भी नहीं मिली राहत

Mon, 23 Aug 2021 01:20 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 23 Aug 2021 01:20 AM IST
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Outrage: After all, when will Panchkula be free from unclaimed animals, accidents are happening due to animals, many lives have been lost, even the Gaushala of village Sukhdarshanpur did not get relief
पंचकूला। शहरवासी लावारिस पशुओं की समस्याओं से भी जूझ रहे हैं। पंचकूला-यमुनानगर हाईवे और हर सेक्टर में लावारिस पशु घूमते देखे जा सकते हैं। ये लावारिस पशु सड़क दुर्घटनाओं का कारण भी बन रहे हैं। पिछले चार सालों में जिले के 16 लोगों की जान इन लावारिस पशुओं के कारण सड़क दुर्घटना में जा चुकी है। जिले को लावारिस पशुओं से मुक्त करने के लिए गांव सुखदर्शनपुर में करोड़ों की लागत से गोशाला का निर्माण करवाया गया, जिसे शुरू हुए भी सात माह बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक जिला लावारिस पशुओं से मुक्त नहीं हो पाया है। 2019 में नगर निगम के एक सर्वेक्षण के अनुसार, पंचकूला प्रशासन द्वारा कुल 803 लावारिस पशुओं की पहचान की गई थी, जबकि 2021 में दायर एक आरटीआई में खुलासा हुआ कि शहर के 20 वार्डों में 1700 लावारिस पशु हैं।
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बीते सप्ताह ही लावारिस पशु के चलते रायपुररानी निवासी एक युवक की मौत हो गई थी। इसके बाद भी समस्या को लेकर नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारी गंभीर नहीं दिख रहे हैं। इस मामले को लेकर घग्गर पास निवासियों द्वारा एक याचिका भी लगाई गई थी। इस पर संज्ञान लेकर उच्च न्यायालय ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को आदेश हैं कि इस समस्या का जल्द समाधान करें। बता दें कि जनवरी में सुखदर्शनपुर में बनी गोशाला का उद्घाटन तत्कालीन कैबिनेट मंत्री रतनलाल कटारिया, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष और स्थानीय विधायक ज्ञानचंद गुप्ता के साथ-साथ मेयर ने किया था। सुखदर्शनपुर गोशाला के उद्घाटन के दौरान हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक ज्ञानचंद गुप्ता ने कहा था कि लावारिस पशुओं के चलते अब हादसे नहीं होंगे और न ही किसी की जान जाएगी। लेकिन नगर निगम का गठन होने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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निगम का प्रयास जारी, गोशाला पहुंचाए जा रहे पशु
मेयर कुलभूषण गोयल ने कहा की लावारिस पशुओं को उठाने के लिए निगम की तरफ से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि शहर को जल्द पशुओं से मुक्त करवाया जा सके। उन्होंने बताया कि रोजाना 4 से 5 पशुओं को एनफोर्समेंट विंग की टीम उठाने का काम कर रही है। 920 पशुओं को गोशालाओं पहुंचाने का काम किया जा चुका है। इसमें से 700 लावारिस पशुओं को सुखदर्शनपुर गांव में बनी गोशाला में रखा गया है, जबकि 220 पशुओं को माता मनसा देवी गोशाला में छोड़ा गया है। मेयर कुलभूषण गोयल ने कहा कि शहर को लावारिस पशुओं से मुक्त करने को लेकर वह वचनबद्ध हैं और जल्द ही वादे को पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे पंचकूला में लावारिस पशुओं से होने वाली मौत के आंकड़े में भी गिरावट आएगी।
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घायल पशुओं को भी उठाया जा रहा
पशु को पकड़ने के साथ-साथ नगर निगम की एनफोर्समेंट विंग की टीम घायल पशुओं को भी उठाने का काम कर रही है। घायल पशुओं को उठाकर गोशाला ले जाया जाता है, वहीं पर उनका इलाज किया जाता है। निगम एनफोर्समेंट विंग की निगरानी में कैटल कैचर टीम पंचकूला से लावारिस पशुओं को मुक्त कराने में लगी है। कोई भी लावारिस पशु यदि सड़क पर घूमता नजर आता है तो टीम उसे पकड़ लेती है। लावारिस पशुओं के मालिक पर भी जुर्माना लगाया जाता है। निगम की तरफ से प्रति पशु पांच हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है, जबकि बछड़ी या बछड़े के लिए 2500 रुपये जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है।

डेयरी संचालक खुला छोड़ देते हैं पशु
नगर निगम के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि शहर को लावारिस पशुओं से मुक्त करने के लिए उनका प्रयास जारी है। वह पशुओं को पकड़कर गोशाला पहुंचा रहे हैं। इसके बाद शहर में लावारिस पशुओं क्यों नजर आ रहे हैं, ये कहां से आ रहे हैं। इस बारे में मेयर कुलभूषण गोयल का कहना है कि पंचकूला के आसपास बहुत से लोग दूध का व्यापार करते हैं। उन्होंने डेयरी खोल रखी है। यही लोग सुबह और शाम पशुओं को खुला छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि पंचकूला यमुनानगर हाईवे पर ज्यादातर सांड़ हैं, जिन्हें भी पकड़ने का काम जारी है।
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