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हरियाणा : विपक्षी दल कर रहे गलत प्रचार, िवकास शुल्क में एकरूपता के लिए संशोधन जरूरी
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चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने विकास शुल्क में संशोधन पर हो-हल्ला कर रहे विपक्ष को आंकड़ों के जरिये जवाब दिया है। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार एकरूपता लाने के लिए विकास शुल्कों में संशोधन किया गया है। पहले 50 करोड़ रुपये की संपत्ति हो या 50 लाख रुपये की संपत्ति, दोनों पर एक जैसा विकास शुल्क लगता था। यह संपत्ति मालिकों के लिए सही नहीं था।
प्रवक्ता ने कहा कि संशोधन से भेदभाव खत्म होगा। सरकार को विकास शुल्क के माध्यम से प्राप्त होने वाला राजस्व उसी क्षेत्र के विकास पर खर्च किया जाएगा। इससे स्थानीय निवासियों को बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। विकास शुल्कों में संशोधन को विपक्षी लोग गलत प्रचारित कर रहे हैं। प्रत्येक क्षेत्र का कलेक्टर रेट वहां की भौगोलिक स्थिति और मूल्य सूचकांक के अनुसार भिन्न-भिन्न हैं। गुरुग्राम में जहां एक लाख रुपये प्रति गज का कलेक्टर रेट है, वहीं जींद में 2000 रुपये प्रति गज का रेट भी है। यदि 100 वर्ग गज के मकान का नक्शा पास करवाने के लिए 1.50 से 2 लाख रुपये तक फीस देनी पड़ रही है, तो इसका मतलब है कि 100 वर्ग गज के प्लॉट की कीमत 1.50 से 2 करोड़ रुपये होनी चाहिए, जो संभव नहीं है।
शुल्क, विकास कार्यों और मूल्य सूचकांक के अनुपात में तय होते हैं
प्रवक्ता ने बताया कि विकास शुल्क में पहली बार संशोधन नहीं किए गए हैं। वर्ष 1992 से 2003, वर्ष 2013 से 2018 तक भी समय-समय पर विकास शुल्क संशोधित किए गए हैं। यह समय एवं जरूरत के हिसाब से निरंतर प्रक्रिया है। यह दरें विकास कार्यों और मूल्य सूचकांक में होने वाली बढ़ोतरी के अनुपात में तय की जाती हैं। सरकार का लक्ष्य संतुलित, मजबूत और पारदर्शी गुणवत्ता विकास सुनिश्चित करना है, इसलिए यह महसूस किया गया कि विकास शुल्क ऐसे कार्यों को निष्पादित करने के लिए आवश्यक संसाधनों के मूल्य सूचकांक के अनुपात में होने चाहिए।
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एफआरबीएम एक्ट के तहत रेट में होता है संशोधन
प्रवक्ता ने बताया कि देश की राजकोषीय व्यवस्था में अनुशासन लाने के लिए और सरकारी खर्च तथा घाटे जैसे कारकों पर नजर रखने के लिए राजकोषीय जवाबदेही एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) कानून पूरे देश में लागू है। राजस्व और राजकोषिय घाटे को कम करने के लिए इस अधिनियम के तहत ही रेट में संशोधन किया जाता है। हरियाणा के अलावा अन्य राज्य में इसी अधिनियम का अनुपालन कर दरों में संशोधन करते हैं।
लोगों को मिल रही बेहतर सुविधाएं
सरकार ने लोगों को पीने का पानी, बिजली उपलब्ध करवाने से लेकर सड़कों का निर्माण और सीवरेज व्यवस्था मुहैया करवाने के लिए वर्षों पुराने नियमों में संशोधन कर विभिन्न सुविधाओं का क्रियान्वयन आसान किया है। शहरों का पुराना नगरपालिका क्षेत्र अत्यधिक आबादी वाला हो गया था और इसमें संकरी गलियां, सड़कें, पार्किंग की कम जगह, अवैध निर्माण, अतिक्रमण और आवश्यक नागरिक बुनियादी ढांचे का अभाव होने के कारण समय-समय पर विकास शुल्क में संशोधन करने की भी आवश्यकता महसूस हुई। अब सरकार ऐसे क्षेत्रों में नागरिक सुविधाएं और बुनियादी ढांचे जल निकासी, सीवरेज, पार्किंग स्थान, खुले स्थान, हरे भरे स्थान, वनस्पति आदि मुहैया करवा सकेगी।
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प्रवक्ता ने कहा कि संशोधन से भेदभाव खत्म होगा। सरकार को विकास शुल्क के माध्यम से प्राप्त होने वाला राजस्व उसी क्षेत्र के विकास पर खर्च किया जाएगा। इससे स्थानीय निवासियों को बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। विकास शुल्कों में संशोधन को विपक्षी लोग गलत प्रचारित कर रहे हैं। प्रत्येक क्षेत्र का कलेक्टर रेट वहां की भौगोलिक स्थिति और मूल्य सूचकांक के अनुसार भिन्न-भिन्न हैं। गुरुग्राम में जहां एक लाख रुपये प्रति गज का कलेक्टर रेट है, वहीं जींद में 2000 रुपये प्रति गज का रेट भी है। यदि 100 वर्ग गज के मकान का नक्शा पास करवाने के लिए 1.50 से 2 लाख रुपये तक फीस देनी पड़ रही है, तो इसका मतलब है कि 100 वर्ग गज के प्लॉट की कीमत 1.50 से 2 करोड़ रुपये होनी चाहिए, जो संभव नहीं है।
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शुल्क, विकास कार्यों और मूल्य सूचकांक के अनुपात में तय होते हैं
प्रवक्ता ने बताया कि विकास शुल्क में पहली बार संशोधन नहीं किए गए हैं। वर्ष 1992 से 2003, वर्ष 2013 से 2018 तक भी समय-समय पर विकास शुल्क संशोधित किए गए हैं। यह समय एवं जरूरत के हिसाब से निरंतर प्रक्रिया है। यह दरें विकास कार्यों और मूल्य सूचकांक में होने वाली बढ़ोतरी के अनुपात में तय की जाती हैं। सरकार का लक्ष्य संतुलित, मजबूत और पारदर्शी गुणवत्ता विकास सुनिश्चित करना है, इसलिए यह महसूस किया गया कि विकास शुल्क ऐसे कार्यों को निष्पादित करने के लिए आवश्यक संसाधनों के मूल्य सूचकांक के अनुपात में होने चाहिए।
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एफआरबीएम एक्ट के तहत रेट में होता है संशोधन
प्रवक्ता ने बताया कि देश की राजकोषीय व्यवस्था में अनुशासन लाने के लिए और सरकारी खर्च तथा घाटे जैसे कारकों पर नजर रखने के लिए राजकोषीय जवाबदेही एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) कानून पूरे देश में लागू है। राजस्व और राजकोषिय घाटे को कम करने के लिए इस अधिनियम के तहत ही रेट में संशोधन किया जाता है। हरियाणा के अलावा अन्य राज्य में इसी अधिनियम का अनुपालन कर दरों में संशोधन करते हैं।
लोगों को मिल रही बेहतर सुविधाएं
सरकार ने लोगों को पीने का पानी, बिजली उपलब्ध करवाने से लेकर सड़कों का निर्माण और सीवरेज व्यवस्था मुहैया करवाने के लिए वर्षों पुराने नियमों में संशोधन कर विभिन्न सुविधाओं का क्रियान्वयन आसान किया है। शहरों का पुराना नगरपालिका क्षेत्र अत्यधिक आबादी वाला हो गया था और इसमें संकरी गलियां, सड़कें, पार्किंग की कम जगह, अवैध निर्माण, अतिक्रमण और आवश्यक नागरिक बुनियादी ढांचे का अभाव होने के कारण समय-समय पर विकास शुल्क में संशोधन करने की भी आवश्यकता महसूस हुई। अब सरकार ऐसे क्षेत्रों में नागरिक सुविधाएं और बुनियादी ढांचे जल निकासी, सीवरेज, पार्किंग स्थान, खुले स्थान, हरे भरे स्थान, वनस्पति आदि मुहैया करवा सकेगी।