Haryana: हरियाणा एयरपोर्ट विकास लिमिटेड कंपनी करेगी हवाई अड्डों से जुड़े विकास कार्य, सीएम ने दी गठन को मंजूरी
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि नागरिक उड्डयन विभाग और राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम लिमिटेड (एनआईसीडीसी) संयुक्त उद्यम के जरिये अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर परियोजना पर कार्य करेंगे। कंपनी हिसार हवाई अड्डे के अलावा अन्य क्षेत्रों में एकीकृत विमानन हब स्थापित करेगी।
विस्तार
हरियाणा में हवाई अड्डों, हवाई पट्टियों और हैलीपेड से जुड़े विकास कार्य अब सरकारी कंपनी करेगी। केंद्र सरकार के अधीन एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर स्थापित करने और अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पूरा करने के लिए सरकार ने हरियाणा विमानपत्तन विकास निगम लिमिटेड कंपनी गठित की है। बुधवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में कंपनी के गठन को मंजूरी दे दी।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि नागरिक उड्डयन विभाग और राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम लिमिटेड (एनआईसीडीसी) संयुक्त उद्यम के जरिये अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर परियोजना पर कार्य करेंगे। कंपनी हिसार हवाई अड्डे के अलावा अन्य क्षेत्रों में एकीकृत विमानन हब स्थापित करेगी। साथ ही इनके संचालन, रखरखाव, विकास, डिजाइन, निर्माण, उन्नयन, आधुनिकीकरण और प्रबंधन का काम देखेगी। रनवे, टैक्सी-वे, एप्रन, यात्रियों के लिए टर्मिनल, कार्गो सुविधाओं के प्रावधान सहित हवाई अड्डों के नवीनीकरण, विमानन गतिविधियों और सेवाओं के भवन विस्तार और प्रबंधन के लिए भूमि की खरीद और भूमि अधिग्रहण में मदद का जिम्मा भी कंपनी पर रहेगा।
ये काम भी करेगी कंपनी
- विमानन परियोजनाओं का वित्तपोषण, निगरानी, स्थापना, सुदृढ़ीकरण, मरम्मत, पुनर्वास, सुधार, संचालन, निर्माण, रखरखाव सीधे या सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत।
- नागरिक उड्डयन विभाग के परियोजना स्थल, भूमि और निर्मित क्षेत्रों की योजना, विकास और निपटान कार्य निर्धारित कानूनों को ध्यान में रखते हुए करेगी।
इसलिए पड़ी कंपनी की जरूरत
हरियाणा ने भारत सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना के तहत केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के साथ 7 जुलाई 2017 को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। केंद्र सरकार की अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर योजना के अंतर्गत महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट हिसार के समेकित विनिर्माण क्लस्टर विकसित करने के प्रस्ताव पर काम किया जा रहा है। पहले चरण के लिए लगभग 1605 एकड़ भूमि चिह्नित की जा चुकी है। उड्डयन विभाग अपने स्तर पर सारी परियोजनाओं का रखरखाव और क्रियान्वयन तेजी से नहीं कर पा रहा था। इसलिए कंपनी गठित कर विभाग के काम का बोझ कम किया गया है।