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संकट कितना भी गंभीर हो, मानव अधिकारों से समझौता नहीं : दीप भाटिया
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भानु में नॉर्थ जोन इंटर-सीएपीएफ डिबेट प्रतियोगिता-2026 आयोजित, हिंदी और अंग्रेजी दोनों वर्गों में असम राइफल्स का दबदबा
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। मानव अधिकार गंभीर से गंभीर संकट की स्थिति में भी वैकल्पिक नहीं हो सकते। सुरक्षा चुनौतियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, मानव गरिमा और अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है। यह बात हरियाणा मानव अधिकार आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने मंगलवार को आईटीबीपी के बेसिक ट्रेनिंग सेंटर भानु में आयोजित नॉर्थ जोन इंटर-सीएपीएफ डिबेट प्रतियोगिता-2026 में कही। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के तत्वावधान में मानव अधिकार जागरूकता वर्ष के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों और जवानों ने ‘सबसे बुरे संकट में भी मानव अधिकार वैकल्पिक नहीं हैं’ विषय पर पक्ष और विपक्ष में अपने विचार रखे। प्रतियोगिता के हिंदी और अंग्रेजी दोनों वर्गों में असम राइफल्स की टीम प्रथम रही।
हिंदी वर्ग में असम राइफल्स का दबदबा
हिंदी वर्ग के पक्ष में असम राइफल्स के राइफलमैन/जीडी सूरज कुमार झा प्रथम, सीआईएसएफ के एएसआई/एक्सई विकाश कुमार मिश्रा द्वितीय और बीएसएफ की कांस्टेबल अंकिता सिंह तृतीय रहीं। विपक्ष में असम राइफल्स के राइफलमैन/जीडी किशन रॉय प्रथम, सीआईएसएफ के एसआई/एक्सई विशाल कपासिया द्वितीय और आईटीबीपी के कांस्टेबल/जीडी कैलाश कुमार रावत तृतीय रहे। टीम वर्ग में असम राइफल्स प्रथम और सीआईएसएफ द्वितीय रही। दोनों टीमों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई किया।
अंग्रेजी वर्ग में भी असम राइफल्स प्रथम
अंग्रेजी वर्ग के पक्ष में असम राइफल्स के मेजर एस. कृष्ण कुमार प्रथम, आईटीबीपी के एसआई/जीडी कमलप्रीत सिंह द्वितीय और सीआईएसएफ के कांस्टेबल/जीडी युमखैबाम एल. लिवांग तृतीय रहे। विपक्ष में असम राइफल्स की राइफलमैन/जीडी सपना चौहान प्रथम, आरपीएफ की एसआई रेशमा कौर द्वितीय और आईटीबीपी के कांस्टेबल/टेली मोहन सिंह तृतीय रहे। टीम वर्ग में असम राइफल्स प्रथम और आईटीबीपी द्वितीय रही। प्रतियोगिता में आईटीबीपी, बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आरपीएफ, असम राइफल्स और एसएसबी की टीमों ने हिंदी और अंग्रेजी वर्ग में हिस्सा लिया। प्रत्येक भाषा में 14 प्रतिभागियों ने पक्ष और विपक्ष में अपने विचार रखे। प्रतिभागियों ने मानव गरिमा, संकट के समय अधिकारों की सुरक्षा तथा सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन जैसे मुद्दों पर तर्क प्रस्तुत किए।
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तीन सदस्यीय जूरी ने किया मूल्यांकन
प्रतियोगिता का मूल्यांकन तीन सदस्यीय जूरी ने किया। इसमें हरियाणा मानव अधिकार आयोग के सदस्य दीप भाटिया, पंजाब विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. नमिता गुप्ता और पंचकूला की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुक्ता कुमार शामिल रहीं। प्रतिभागियों के तर्क, विषय की समझ, अभिव्यक्ति और प्रस्तुतीकरण के आधार पर मूल्यांकन किया गया। दीप भाटिया ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं सुरक्षाकर्मियों को सामाजिक और कानूनी विषयों पर अलग-अलग दृष्टिकोण समझने का अवसर देती हैं। हरियाणा मानव अधिकार आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने कहा कि ऐसे आयोजन सुरक्षाबलों में मानव अधिकार, मानव गरिमा, संवैधानिक मूल्यों और कानून के शासन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण हैं।
आईटीबीपी भानु की रही अहम भूमिका
कार्यक्रम के आयोजन में आईटीबीपी बेसिक ट्रेनिंग सेंटर भानु की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आईजी रामाकांत शर्मा और डीआईजी वी.वी. नेगी ने व्यवस्थाओं और समन्वय में सहयोग दिया। वी.वी. नेगी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। डीआईजी ब्रिगेडियर जे.एस. गोड़ाया ने आयोजन में आईटीबीपी की ओर से किए गए सहयोग की सराहना की।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। मानव अधिकार गंभीर से गंभीर संकट की स्थिति में भी वैकल्पिक नहीं हो सकते। सुरक्षा चुनौतियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, मानव गरिमा और अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है। यह बात हरियाणा मानव अधिकार आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने मंगलवार को आईटीबीपी के बेसिक ट्रेनिंग सेंटर भानु में आयोजित नॉर्थ जोन इंटर-सीएपीएफ डिबेट प्रतियोगिता-2026 में कही। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के तत्वावधान में मानव अधिकार जागरूकता वर्ष के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों और जवानों ने ‘सबसे बुरे संकट में भी मानव अधिकार वैकल्पिक नहीं हैं’ विषय पर पक्ष और विपक्ष में अपने विचार रखे। प्रतियोगिता के हिंदी और अंग्रेजी दोनों वर्गों में असम राइफल्स की टीम प्रथम रही।
हिंदी वर्ग में असम राइफल्स का दबदबा
हिंदी वर्ग के पक्ष में असम राइफल्स के राइफलमैन/जीडी सूरज कुमार झा प्रथम, सीआईएसएफ के एएसआई/एक्सई विकाश कुमार मिश्रा द्वितीय और बीएसएफ की कांस्टेबल अंकिता सिंह तृतीय रहीं। विपक्ष में असम राइफल्स के राइफलमैन/जीडी किशन रॉय प्रथम, सीआईएसएफ के एसआई/एक्सई विशाल कपासिया द्वितीय और आईटीबीपी के कांस्टेबल/जीडी कैलाश कुमार रावत तृतीय रहे। टीम वर्ग में असम राइफल्स प्रथम और सीआईएसएफ द्वितीय रही। दोनों टीमों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई किया।
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अंग्रेजी वर्ग में भी असम राइफल्स प्रथम
अंग्रेजी वर्ग के पक्ष में असम राइफल्स के मेजर एस. कृष्ण कुमार प्रथम, आईटीबीपी के एसआई/जीडी कमलप्रीत सिंह द्वितीय और सीआईएसएफ के कांस्टेबल/जीडी युमखैबाम एल. लिवांग तृतीय रहे। विपक्ष में असम राइफल्स की राइफलमैन/जीडी सपना चौहान प्रथम, आरपीएफ की एसआई रेशमा कौर द्वितीय और आईटीबीपी के कांस्टेबल/टेली मोहन सिंह तृतीय रहे। टीम वर्ग में असम राइफल्स प्रथम और आईटीबीपी द्वितीय रही। प्रतियोगिता में आईटीबीपी, बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आरपीएफ, असम राइफल्स और एसएसबी की टीमों ने हिंदी और अंग्रेजी वर्ग में हिस्सा लिया। प्रत्येक भाषा में 14 प्रतिभागियों ने पक्ष और विपक्ष में अपने विचार रखे। प्रतिभागियों ने मानव गरिमा, संकट के समय अधिकारों की सुरक्षा तथा सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन जैसे मुद्दों पर तर्क प्रस्तुत किए।
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तीन सदस्यीय जूरी ने किया मूल्यांकन
प्रतियोगिता का मूल्यांकन तीन सदस्यीय जूरी ने किया। इसमें हरियाणा मानव अधिकार आयोग के सदस्य दीप भाटिया, पंजाब विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. नमिता गुप्ता और पंचकूला की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुक्ता कुमार शामिल रहीं। प्रतिभागियों के तर्क, विषय की समझ, अभिव्यक्ति और प्रस्तुतीकरण के आधार पर मूल्यांकन किया गया। दीप भाटिया ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं सुरक्षाकर्मियों को सामाजिक और कानूनी विषयों पर अलग-अलग दृष्टिकोण समझने का अवसर देती हैं। हरियाणा मानव अधिकार आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने कहा कि ऐसे आयोजन सुरक्षाबलों में मानव अधिकार, मानव गरिमा, संवैधानिक मूल्यों और कानून के शासन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण हैं।
आईटीबीपी भानु की रही अहम भूमिका
कार्यक्रम के आयोजन में आईटीबीपी बेसिक ट्रेनिंग सेंटर भानु की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आईजी रामाकांत शर्मा और डीआईजी वी.वी. नेगी ने व्यवस्थाओं और समन्वय में सहयोग दिया। वी.वी. नेगी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। डीआईजी ब्रिगेडियर जे.एस. गोड़ाया ने आयोजन में आईटीबीपी की ओर से किए गए सहयोग की सराहना की।