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नेचर ट्रेल : पुराने रास्तों पर बोर्ड लगाकर पूरा किया तीन करोड़ का प्रोजेक्ट

Sat, 06 Jan 2024 01:34 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jan 2024 01:34 AM IST
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Nature Trail: Project worth Rs 3 crore completed by installing boards on old paths
माई सिटी रिपोर्टर
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पंचकूला/मोरनी। प्रकृति और प्राकृतिक संपदा के प्रति लोगों को जागरूक करने वाली 150 किलोमीटर की कालका-कलेसर के जंगलों में नेचर ट्रेल परियोजना से जुड़े 90 फीसदी काम कागजों में पूरे हुए हैं। धरातल पर वन विभाग ने यहां पहले से निर्मित पंचायत और जंगलात विभाग के कच्चे रास्तों पर महज साइन बोर्ड और सीमेंट का बैंच ही लगवाए गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दशकों पुराने कच्चे रास्तों पर बोर्ड लगाकर नेचर ट्रेल का काम पूरा किया गया है। इस मामले की विजिलेंस से जांच होनी चाहिए। दरअसल कालका से यमुनानगर तक तीन डिवीजन पिंजौर, अंबाला और यमुनानगर तक लंबा ट्रेल बनाए जाने की योजना थी। इस योजना में करीब 10 फुट चौड़ा कच्चा नेचर ट्रेल बनाया जाना था। इसका उद्देश्य इलाके में एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के अलावा उन लोगों को आकर्षित करना था, जो कि नेचर के करीब से देखना और आनंद लेना चाहते है। साथ ही साइकिलिस्ट और पैदल पहाड़ों में ट्रैकिंग कर एडवेंचर करने वाले लोगों को प्रकृति के बारे में बारीकी से जानकारी देना था।
परियोजना पर बीस लाख भी खर्च नहीं किया
मोरनी के स्थानीय निवासी बलवंत ने बताया कि कालका से मोरनी के नींबवाल के बीच करीब 80 किलोमीटर एरिया में कुछ जगहों पर जहां पहले से कच्चे रास्ते बने हैं, वहां आठ से दस सीमेंटेड बैंच, प्लेटफार्म बनवाकर महज 20 लाख के खर्च में वन विभाग ने तीन करोड़ की परियोजना पूरी कर दी है। वर्तमान में इसका लाभ न तो पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मिल रहा है।
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विश्राम की सुविधा न छायाकार पौधे लगाए
गांवों में ऑक्सीवन की अवधारणा लाने की कवायद भी सफल नहीं हुई है। कालका से कलेसर तक 150 किमी नेचर ट्रेल के बीच लोगों के लिए सुगंधित व छायाकार पौधे लगाने और विश्राम स्थल की सुविधा देने की योजना थी। इस पर बजट सत्र के दौरान काम करने की योजना पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने दावा किया था, लेकिन इन रास्तों को देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि यहां पर काम हुआ है।
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कालका से कलेसर तक जंगलों के बीच 80 किलोमीटर पंचकूला के दायरे में नेचर ट्रेल का काम कराया गया है। इसमें पगडंडियों को चौड़ा कराया गया है, साथ ही सात से आठ जगहों पर सीमेंट के बेंच भी लगवाए गए हैं। बाकी एरिया हिमाचल और यमुनानगर में आता है। - भूपेंदर सिंह राघव, डीएफओ पंचकूला।
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