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गांव देवी नगर जमीन विवाद: अब 22 और 23 दिसंबर को विभागीय टीम करेगी जमीन की निशानदेही

Tue, 21 Dec 2021 01:21 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 21 Dec 2021 01:21 AM IST
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National Painting Competition: 1200 school students from 150 schools participated
पंचकूला। गांव देवी नगर की 20 एकड़ जमीन के विवाद में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण कोई ठोस फैसला नहीं ले पा रहा है। इससे गांव के लोगों में रोष बढ़ता ही जा रहा है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने दोबारा से जमीन की निशानदेही करवाने का फैसला लिया है। हालांकि टीम में शामिल अधिकारियों में कोई फेरबदल नहीं किया है। यह निशानदेही 22 और 23 दिसंबर को होगी। इस संबंध में प्राधिकरण ने जमीन से संबंधित लोगों को एक पत्र भेजकर सूचित कर दिया है वह मौके पर मौजूद रहें। गांव के लोगों ने बताया कि प्राधिकरण ने मुख्य प्रशासक अजीत बालाजी जोशी ने आश्वासन दिया है कि वह इस मामले को 15 दिन में निपटा देंगे। उधर संपदा अधिकारी राकेश संधू का कहना है कि अधिकारियों की टीम केवल मौके का निरीक्षण करने जाएगी।
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उधर, गांव देवी नगर के निवासी रघुबीर चौधरी और सुभाष चौधरी ने बताया कि सेक्टर-21 और सेक्टर-23 के बीच बना घग्गर पुल खसरा नंबर 594 के तहत गांव की जमीन पर बना है। यदि प्राधिकरण जमीन का अधिग्रहण कर 2010 में ही मुआवजा दे देता तो उसे करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का सामना न करना पड़ा। रघुबीर चौधरी ने बताया कि जमीन का जीपीएस के जरिए दो बार सर्वे हो चुका है। पहला सर्वे गांव के लोगों द्वारा करवाया गया, जिसकी रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सेक्टर-22 के आईटी पार्क में प्लॉट नंबर-1 में आईटी कंपनी की आधी से ज्यादा बिल्डिंग गांव वासियों की जमीन पर बनी है। जबकि, दूसरा सर्वे वन विभाग ने करवाया, जिसकी रिपोर्ट में सामने आया कि कंपनी का आगे का आधा हिस्सा उनकी जमीन में है।
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इसके बाद 15 जून को प्रशासनिक अधिकारी कोर्ट के आदेश पर मालिकाना हक दिलाने पहुंचे थे। उन्होंने एचएचवीपी के संपदा अधिकारी को फोन कर मौके पर बुलाया, लेकिन वह किसी कारणवश नहीं पहुंच पाए। जब यह मामला मुख्य प्रशासक के पास पहुंचा तो उन्होंने जिला प्रशासन, एचएसआईआईडीसी और एचएचएसवीपी संपत्ति विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त मीटिंग बुलाई और पूरे मामले की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने पहले की निशानदेही को नामंजूर कर तीनों विभागों के अधिकारियों की एक संयुक्त कमेटी गठित करने का आदेश दिया। प्रशासक ने यह भी आदेश दिया कि संयुक्त अधिकारियों की टीम दोबारा से मौके पर जाकर जमीन की पैमाइश और निशानदेही करेगी। इसके बाद वह आगे की कार्रवाई के लिए फैसला लेंगे।
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14 जून को जमीन का मालिकाना हक दिलाने पहुंची थे अधिकारी
एचएसआईआईडीसी ने सेक्टर-22 में इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी पार्क विकसित करते हुए जमीन को आगे आईटी इंडस्ट्री को अलॉट कर दिया, जो उसकी थी ही नहीं। अब इस जगह आईटी पार्क की सबसे ऊंची बिल्डिंग बनी है। यहां बनी 12 मंजिला बिल्डिंग पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि कोर्ट ने जमीन पर गांव देवीनगर के निवासियों के मालिकाना हक को सही बताया है। इनमें कालका के विधायक प्रदीप चौधरी की भी यहां जमीन है। कोर्ट के निर्देश पर 14 जून को तहसीलदार पुण्यदीप शर्मा के नेतृत्व में पंचकूला प्रशासन की टीम गांव देवीनगर के निवासियों को जमीन का मालिकाना हक दिलाने के लिए पहुंचे थे।
ज्वाइंट कमेटी में इस विभाग के अधिकारी शामिल
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक के आदेश पर गठित ज्वाइंट कमेटी में इस्टेट ऑफिसर, एलएओ पंचकूला, डीटीपी पंचकूला, तहसीलदार पंचकूला, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एचएसवीपी डिवीजन नंबर-2 पंचकूला, सीनियर मैनेजर (इंजीनियरिंग) एचएसआईआईडीसी, आईई बरवाला, नायब तहसीलदार हरियाणा फारेस्ट डिपार्टमेंट, बच्चा राम और अन्य याचिकाकर्ता शामिल हैं।
कोर्ट ने फैसले में माना कि बिल्डिंग की कुछ जमीन गांव की
साल 2015 में कोर्ट ने दिए अपने फैसले में माना है कि जिस जगह पर आईटी कंपनी की बिल्डिंग बनी है, वह जगह देवीनगर गांव के निवासियों की है। राजस्व रिकॉर्ड में भी आज तक जमीन का अधिग्रहण करने पर किसी को मुआवजा नहीं दिया गया है। आईटी कंपनी की बिल्डिंग वाली जमीन के अलावा गोल्फ क्लब भी उनकी ही जमीन पर बना है। किसी ने उनकी जमीन पर कब्जा कर मंदिर भी बनाया हुआ है। देवीनगर के निवासियों ने साल 2015 में जमीन का कब्जा लेने के लिए केस डाला था। कोर्ट से जमीन खाली कराने की मांग की गई। कोर्ट ने 23 नवंबर 2019 को पंचकूला के तहसीलदार को जमीन खाली कराने और उन्हें मालिकाना हक देने के आदेश दिए थे। इसके बाद से ही गांव देवी नगर निवासियों को जमीन का कब्जा देने की प्रक्रिया चल रही थी।

बिल्डिंग गिरानी होगी या जमीन अधिग्रहण का मुआवजा देना होगा
कोर्ट के निर्देश पर गांववासियों को जमीन का कब्जा देने के लिए या तो बिल्डिंग को गिराना होगा या जमीन अधिग्रहण का मुआवजा देना होगा। गांव देवीनगर के निवासी रघुबीर सिंह का आरोप है कि करीब 30 से 35 साल से एचएसवीपी और एचएसआईआईडीसी ने गांववासियों की जमीन पर कब्जा कर रखा है। एचएसवीपी ने साल 2003 में यह जमीन कॉरपोरेशन को आईटी पार्क विकसित करने के लिए दी थी। एचएसआईआईडीसी ने साल 2014 में यहां आईटी कंपनियों को जमीन अलॉट किया था। गांव देवीनगर के निवासियों ने साल 2010 में अपनी जमीन की सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर निशानदेही कराई थी। इसके बाद से वह जमीन वापस लेने के लिए पंचकूला कोर्ट में केस लड़ रहे थे।
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