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Panchkula News: मंत्रियों को नहीं विकास फंड खर्च करने का हक, पंचायत विभाग ने किसी मंत्री को नहीं दिया फंड का पैसा
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चंडीगढ़। पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने अपने मंत्रियों को प्रोटोकाल के अनुसार सुविधाएं तो दी हैं, लेकिन उन्हें यह अधिकार नहीं दिया है कि वह अपने हलके या पूरे सूबे के लिए किसी विकास योजना को शुरू करने के लिए फंड जारी कर सकें। राज्य में अब तक चली आ रही इस व्यवस्था पर आप सरकार ने रोक लगा दी है। खास बात यह है कि यह फैसला खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लिया है जबकि विकास फंड के रूप में उन्हें भी अपने हलके व प्रदेश में खर्च करने के लिए 10 करोड़ रुपये की राशि मिलनी थी, जिसे वह अपने विवेक से खर्च करते।
मंत्रियों को इस मद में हर महीने 3 करोड़ रुपये मिलते रहे हैं। राज्य का पंचायत विभाग जोकि उक्त फंड की राशि मंत्रियों और मुख्यमंत्री को जारी करने के लिए अथारिटी के रूप में काम करता है, के अधिकारियों ने बताया कि बीते नौ महीने से न तो मुख्यमंत्री और न ही किसी मंत्री को फंड का पैसा जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की तरफ से इस बारे में केवल मौखिक आदेश ही दिया गया था, जिसकी बीते नौ महीने से पालना की जा रही है। उधर, वित्त विभाग से पता चला है कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों को इस मद में जारी होने वाले फंड को लेकर पंचायत विभाग की तरफ से अब तक कोई पत्र नहीं मिला।
गौरतलब है कि राज्य में पिछली सरकारों के समय से चली आ रही विकास फंड संबंधी व्यवस्था पर इससे पहले कभी सवाल नहीं उठे। इस फंड का इस्तेमाल मंत्रियों और मंत्रियों द्वारा खासतौर पर अपने हलकों में निर्धारित योजनाओं से इतर विकास कार्य कराने के लिए इस फंड का उपयोग करते रहे हैं। पिछली सरकारों से समय हर महीने मंत्रियों और मुख्यमंत्री के नाम राशि जारी हो जाती थी लेकिन अब मुख्यमंत्री ने ही इस राशि पर रोक लगा दी है। इस फैसले से राज्य के मंत्री अपने स्तर पर कोई भी विकास कार्य कराने में पूरी तरह असमर्थ हैं और उन्हें अपने प्रस्तावों के बारे में मुख्यमंत्री से अनुमति लेनी पड़ती है। फिलहाल मंत्रियों द्वारा कैबिनेट की बैठकों के दौरान अपने हलकों के कामकाज के बारे में मुख्यमंत्री से चर्चा होती है।
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मंत्रियों को इस मद में हर महीने 3 करोड़ रुपये मिलते रहे हैं। राज्य का पंचायत विभाग जोकि उक्त फंड की राशि मंत्रियों और मुख्यमंत्री को जारी करने के लिए अथारिटी के रूप में काम करता है, के अधिकारियों ने बताया कि बीते नौ महीने से न तो मुख्यमंत्री और न ही किसी मंत्री को फंड का पैसा जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की तरफ से इस बारे में केवल मौखिक आदेश ही दिया गया था, जिसकी बीते नौ महीने से पालना की जा रही है। उधर, वित्त विभाग से पता चला है कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों को इस मद में जारी होने वाले फंड को लेकर पंचायत विभाग की तरफ से अब तक कोई पत्र नहीं मिला।
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गौरतलब है कि राज्य में पिछली सरकारों के समय से चली आ रही विकास फंड संबंधी व्यवस्था पर इससे पहले कभी सवाल नहीं उठे। इस फंड का इस्तेमाल मंत्रियों और मंत्रियों द्वारा खासतौर पर अपने हलकों में निर्धारित योजनाओं से इतर विकास कार्य कराने के लिए इस फंड का उपयोग करते रहे हैं। पिछली सरकारों से समय हर महीने मंत्रियों और मुख्यमंत्री के नाम राशि जारी हो जाती थी लेकिन अब मुख्यमंत्री ने ही इस राशि पर रोक लगा दी है। इस फैसले से राज्य के मंत्री अपने स्तर पर कोई भी विकास कार्य कराने में पूरी तरह असमर्थ हैं और उन्हें अपने प्रस्तावों के बारे में मुख्यमंत्री से अनुमति लेनी पड़ती है। फिलहाल मंत्रियों द्वारा कैबिनेट की बैठकों के दौरान अपने हलकों के कामकाज के बारे में मुख्यमंत्री से चर्चा होती है।
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