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Punjab: बहाल होंगे भंग किए गए 28 सुधार ट्रस्ट, सफेद हाथी बने 10 ट्रस्टों पर लटका रहेगा ताला

Thu, 06 Oct 2022 01:51 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Thu, 06 Oct 2022 01:51 AM IST
सार

पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार के गठन के बाद 30 मार्च, 2022 को मुख्यमंत्री ने सभी नगर सुधार ट्रस्टों को भंग करने के आदेश जारी किए थे। इस आदेश के साथ ही इन ट्रस्टों में पिछली कांग्रेस सरकार के समय से तैनात चेयरमैन और ट्रस्टियों की सेवाएं समाप्त हो गई थीं।

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Lock will be hanged on 10 city improvement trusts
सीएम भगवंत मान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पंजाब सरकार ने 30 मार्च को भंग किए राज्य के सभी 28 नगर सुधार ट्रस्टों को फिर से बहाल करने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि इस फैसले के तहत सबसे पहले उन्हीं ट्रस्टों को बहाल किया जाएगा, जिनके कामकाज का रिकॉर्ड सही पाया गया है। स्थानीय निकाय विभाग द्वारा नगर सुधार ट्रस्टों के कामकाज की समीक्षा के बाद ऐसे 10 ट्रस्टों की भी सूची तैयार की है, जो लंबे समय से राज्य सरकार के लिए ‘सफेद हाथी’ साबित हो रहे हैं। यह ट्रस्ट फिलहाल बहाल नहीं किए जाएंगे।

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मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, स्थानीय निकाय विभाग की ओर से भेजी गई सूची में ऐसे 10 ट्रस्टों को छोड़ बाकी में चेयरमैन और जरूरी स्टाफ की नियुक्ति को मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दे दी है। अब इस संबंध में अगली कार्रवाई स्थानीय निकाय विभाग द्वारा की जाएगी। विभाग ने मुख्यमंत्री को सभी नगर सुधार ट्रस्टों द्वारा पिछली सरकार के समय किए गए कामकाज और उनकी वित्तीय स्थिति की जानकारी दी थी। इस पर तय किया गया है कि जो नगर सुधार ट्रस्ट अपने बलबूते पर कार्य करने में सक्षम हैं और विकास कार्यों के लिए सरकारी ग्रांट का उपयोग करने में दागदार नहीं हैं, उनकी बहाली पहले कर दी जाए।
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पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार के गठन के बाद 30 मार्च, 2022 को मुख्यमंत्री ने सभी नगर सुधार ट्रस्टों को भंग करने के आदेश जारी किए थे। इस आदेश के साथ ही इन ट्रस्टों में पिछली कांग्रेस सरकार के समय से तैनात चेयरमैन और ट्रस्टियों की सेवाएं समाप्त हो गई थीं। ट्रस्टों के मुलाजिमों को नगर पालिकाओं में एडजस्ट कर दिया गया था और नए चेयरमैनों की नियुक्ति तक इन ट्रस्टों के कामकाज का जिम्मा संबंधित जिले के उपायुक्त को सौंप दिया गया था।
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इसके साथ ही, स्थानीय निकाय विभाग को नगर सुधार ट्रस्टों के कामकाज की समीक्षा करने को भी कहा गया था। इसी समीक्षा में 10 नगर सुधार ट्रस्ट सफेद हाथी के रूप में सामने आए हैं, जिनके पास अपने मुलाजिमों को वेतन देने के लिए भी पैसा नहीं हैं और राजस्व जुटाने के किसी कार्य में यह ट्रस्ट शामिल भी नहीं हैं। इन ट्रस्टों के जरिये लंबे समय से क्षेत्र में किसी विकास कार्य में भी योगदान नहीं दिया गया है। स्थानीय निकाय विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ये ट्रस्ट अपना गुजारा चलाने के लिए सरकारी खजाने पर ही निर्भर होकर रह गए हैं। अब मुख्यमंत्री की ओर से मंजूरी मिल गई है, जैसे ही नगर सुधार ट्रस्टों को बहाल किया जाएगा, उसी दौरान इन 10 नगर सुधार ट्रस्टों की सूची भी विभाग द्वारा जारी की जाएगी।

चेयरमैन पद के दावेदारों का भी दबाव

इस बीच, यह भी पता चला है कि मुख्यमंत्री पर उनकी पार्टी की ओर से भी, नगर सुधार ट्रस्टों को जल्द से जल्द बहाल करने का दबाव बनाया जा रहा था। दरअसल, पार्टी के जो नेता सरकार बनने के बाद कोई बड़ा ओहदा हासिल नहीं कर सके हैं, वे अपने क्षेत्रों में नगर सुधार ट्रस्टों की चेयरमैनी की आस लगाए बैठे हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री ने बोर्ड व कारपोरेशनों के चेयरमैन पदों पर अपने विधायकों को नियुक्तियां दी हैं, लेकिन चेयरमैन के बाकी पद नगर सुधार ट्रस्टों में खाली हैं और ट्रस्टों की बहाली के बाद ही इन पर नियुक्ति का रास्ता खुल सकेगा।

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