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जज नोट कांड में आया नया मोड़, पीएसओ अपने बयान से मुकरा और सीबीआई को लगा झटका

Mon, 22 Jul 2019 10:08 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Mon, 22 Jul 2019 10:08 AM IST
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judge nirmal yadav bribe case
जज निर्मल यादव।
बहुचर्चित जज नोट कांड में एक और मोड़ आ गया। दिल्ली के एक व्यापारी से 15 लाख रुपये की रिश्वत लेने के मामले में आरोपी जज निर्मल यादव के पीएसओ उदयबीर सिंह के बयान  जिला अदालत में हुए। इस दौरान पीएसओ अपने पहले दिए गए बयान से पलट गया। इससे सीबीआई को बड़ा झटका लगा है।
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साल 2008 में उसने बयान दिया था कि जब मैडम (जज निर्मल यादव) गुड़गांव जाया करती थीं तो वहां रविंदर उनसे मिलने आया करता था। कई बार मैडम के मोबाइल पर रविंदर का फोन भी आया करता था। साल 2008 में उसने एक और बयान दिया था, जिसमें उसने बताया था कि मैडम के साथ वह सोलन भी जाता रहता था।
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लेकिन शनिवार को पेशी के दौरान वह अपने उक्त दोनों बयानों से मुकर गया। उसने कहा कि ऐसा कोई बयान उसने नहीं दिया था। उधर, सुनवाई के दौरान एडवोकेट मंजीत सिंह व संतोष को गवाहों की लिस्ट में शामिल कर दोनों को समन जारी कर दिया गया है। अब तीन अगस्त को इस मामले की सुनवाई होनी है। दोनों को इस दिन पेश होने को कहा गया है।
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चार्जशीट के अनुसार, 13 अगस्त 2008 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की जज निर्मलजीत कौर के घर दिल्ली के एक व्यापारी की ओर से 15 लाख रुपये भेजे गए। जज ने इसकी सूचना चंडीगढ़ पुलिस को दी। उन्होंने पुलिस को बताया कि प्रकाश राम नाम के एक व्यक्ति ने पैकेट उन्हें दिया है। चंडीगढ़ पुलिस के बाद यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया।

सीबीआई की जांच में सामने आया कि जो रुपये जज निर्मलजीत कौर के पास पहुंचाए गए थे, वह रुपये जज निर्मल यादव को दिए जाने थे। गलती से रकम जज निर्मलजीत कौर के घर पहुंच गए। उसके बाद सीबीआई ने प्रकाश राम को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की। तब जाकर मामले का खुलासा हुआ। बाद में यह मामला जज नोट कांड के नाम से चर्चा में आ गया।

चार मार्च 2011 को सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की। जज नोट कांड के आरोप के मुताबिक, पंचकूला के एक प्लॉट के केस में एकतरफा फैसला देने के लिए 15 लाख रुपये की रिश्वत हाईकोर्ट की जज निर्मल यादव के नाम ली गई थी। नाम की गलती के चलते संजीव बंसल का मुंशी प्रकाश राम यह रकम न्यायाधीश निर्मलजीत कौर की कोठी पर ले गया था।


सीबीआई ने जस्टिस निर्मल यादव समेत पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल संजीव बंसल, बिल्डर राजीव गुप्ता, दिल्ली के होटेलियर रविंदर सिंह भसीन और निर्मल सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था।
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