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जेपी गारबेज प्लांट को प्रशासन ने दिया झटका
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चंडीगढ़। जेपी गारबेज प्लांट को यूटी प्रशासन ने बड़ा झटका दिया है। प्रशासन के प्रिंसिपल होम सेक्रेट्री अरुण कुमार गुप्ता ने सुनवाई के बाद जेपी गारबेज की नगर निगम से कचरे के बदले में टिपिंग फीस देने के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। साथ ही प्रिंसिपल होम सेक्रेट्री ने मेसर्स जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड को आदेश दिया कि वह 15 दिनों के भीतर निगम के द्वारा पहले से भुगतान की गई फीस को वापस कर दें अन्यथा मेसर्स को 12 प्रतिशत के ब्याज के साथ मूल राशि का भुगतान करना होगा।
नगर निगम के द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर टिपिंग शुल्क का भुगतान जेपी गारबेज को किया गया था। एनजीटी ने नगर निगम को 500 रुपये प्रति टन के हिसाब से जेपी गारबेज प्लांट को भुगतान करने के निर्देश दिए थे। इसी के आधार पर निगम के द्वारा जेपी प्लांट को भुगतान किया जा रहा था। इसके साथ ही एनजीटी ने 24 जुलाई 2017 को अपने आदेश में समझौते की धारा 11 के अनुसार मध्यस्थता कार्यवाही शुरू करने के लिए की बात कही थी। एनजीटी के निर्देश पर प्रिंसिपल होम सेक्रेट्री के यहां मामले की सुनवाई चल रही थी।
सुनवाई के बाद दिया निर्णय
यहां दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रिंसिपल होम सेक्रेट्री ने हाल ही में सुनाए गए अपने आदेश में निष्कर्ष निकाला कि पहले से तय एजेंडे के मुताबिक टिपिंग शुल्क का भुगतान करने के लिए एमसी पर कोई बाध्यता नहीं है। आदेश में कहा गया है कि निगम, जेपी संयंत्र को जमा की गई टिपिंग राशि के मुद्दे पर अन्य कोई विचार कर सकता है। नगर ने अपने पक्ष में बताया कि दावेदार के दावों पर पहले विचार किया था और कंपनी की फीस भरने के दावे को खारिज कर दिया था। चूंकि निगम पहले ही इस पर विचार करके खारिज कर चुका है। इस लिए दावेदार टिपिंग को अधिकार का मामला नहीं कह सकता है। यह निश्चित रूप से इसे देने के लिए बाध्यकारी नहीं है।
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यह है पूरा मामला
बताते चलें कि संयंत्र 2008 में शुरू किया गया था तब से यह समस्या का सामना कर रहा है। एमसी द्वारा सभी कचरे को लेने के आदेश के बाद प्लांट की स्थिति अब गंभीर हो गई है। लेकिन संयंत्र सभी कचरे को संशोधित करने में विफल रहा है। जिसके चलते शहर के पूरे कचरे को संशोधित नहीं किया जा रहा है। एनजीटी ने जेपी प्लांट को निर्देश दिया है कि वह निगम के 450 टन कचरे का निस्तारण करे। यदि ऐसा नहीं होता है तो प्लांट को प्रतिदिन पर्यावरण को होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति के रूप में 50 हजार रुपये का भुगतान करना होगा।
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नगर निगम के द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर टिपिंग शुल्क का भुगतान जेपी गारबेज को किया गया था। एनजीटी ने नगर निगम को 500 रुपये प्रति टन के हिसाब से जेपी गारबेज प्लांट को भुगतान करने के निर्देश दिए थे। इसी के आधार पर निगम के द्वारा जेपी प्लांट को भुगतान किया जा रहा था। इसके साथ ही एनजीटी ने 24 जुलाई 2017 को अपने आदेश में समझौते की धारा 11 के अनुसार मध्यस्थता कार्यवाही शुरू करने के लिए की बात कही थी। एनजीटी के निर्देश पर प्रिंसिपल होम सेक्रेट्री के यहां मामले की सुनवाई चल रही थी।
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सुनवाई के बाद दिया निर्णय
यहां दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रिंसिपल होम सेक्रेट्री ने हाल ही में सुनाए गए अपने आदेश में निष्कर्ष निकाला कि पहले से तय एजेंडे के मुताबिक टिपिंग शुल्क का भुगतान करने के लिए एमसी पर कोई बाध्यता नहीं है। आदेश में कहा गया है कि निगम, जेपी संयंत्र को जमा की गई टिपिंग राशि के मुद्दे पर अन्य कोई विचार कर सकता है। नगर ने अपने पक्ष में बताया कि दावेदार के दावों पर पहले विचार किया था और कंपनी की फीस भरने के दावे को खारिज कर दिया था। चूंकि निगम पहले ही इस पर विचार करके खारिज कर चुका है। इस लिए दावेदार टिपिंग को अधिकार का मामला नहीं कह सकता है। यह निश्चित रूप से इसे देने के लिए बाध्यकारी नहीं है।
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यह है पूरा मामला
बताते चलें कि संयंत्र 2008 में शुरू किया गया था तब से यह समस्या का सामना कर रहा है। एमसी द्वारा सभी कचरे को लेने के आदेश के बाद प्लांट की स्थिति अब गंभीर हो गई है। लेकिन संयंत्र सभी कचरे को संशोधित करने में विफल रहा है। जिसके चलते शहर के पूरे कचरे को संशोधित नहीं किया जा रहा है। एनजीटी ने जेपी प्लांट को निर्देश दिया है कि वह निगम के 450 टन कचरे का निस्तारण करे। यदि ऐसा नहीं होता है तो प्लांट को प्रतिदिन पर्यावरण को होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति के रूप में 50 हजार रुपये का भुगतान करना होगा।