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जांच दर जांच, मिल नहीं रहा गायब चकबंदी रिकॉर्ड
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चंडीगढ़। हरियाणा के फरीदाबाद जिले के सदपुरा गांव का गायब चकबंदी रिकॉर्ड अबूझ पहेली बन गया है। अब तक तीन जांच हो चुकीं, लेकिन रिकॉर्ड का कोई पता नहीं। दो जांच में तत्कालीन पटवारी व एक में तत्कालीन कार्यालय कानूनगो को दोषी ठहराया जा चुका है, लेकिन कार्रवाई किसी पर नहीं हुई। चूंकि, जिला प्रशासन किसी नतीजे पर पहुंच ही नहीं पा रहा। डीसी फरीदाबाद ने दो वरिष्ठ अधिकारियों एडीसी व एसडीएम से जांच कराने के बाद अब चौथी जांच जिला राजस्व अधिकारी को सौंप दी है। अब जिला राजस्व अधिकारी पता लगाएंगे कि रिकॉर्ड किसने गुम किया, कैसे गुम हुआ, कौन दोषी है और किस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
मामले में शिकायतकर्ता सदपुरा गांव निवासी मांगे राम का कहना है कि जांच में दोषी पाए जाने वालों को बचाने की जिला प्रशासन पूरी कोशिश कर रहा है। जब भी जांच रिपोर्ट पूरी कर डीसी को सौंपी जाती है, उसके बाद उच्च स्तरीय दबाव के बाद अगली जांच की भूमिका प्रशासन तैयार कर देता है। शिकायकर्ता के आग्रह पर निदेशक चकबंदी ने डीसी फरीदाबाद को पत्र लिखा है कि चकबंदी रिकॉर्ड गुम करने वालों की जिम्मेदारी तय की जाए। अगर रिकॉर्ड को दोबारा तैयार करने की जरूरत है तो कराएं।
शिकायतकर्ता मांगे राम का कहना है कि जिला प्रशासन ने जांच दर जांच कर पूरे मामले की गंभीरता ही खत्म कर दी है। शुरूआती दो जांच में तत्कालीन पटवारी को दोषी पाया गया है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि रिकॉर्ड का बस्ता लेने के बाद जमा ही नहीं करवाया। तीसरी जांच में तो कार्यालय कानूनगो को दोषी ठहराया गया, जबकि उस समय वे इस पद पर थे ही नहीं। शिकायतकर्ता ने वित्तायुक्त संजीव कौशल व निदेशक चकबंदी से मांग की है कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ अतिशीघ्र कड़ी कार्रवाई की जाए।
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मामले में शिकायतकर्ता सदपुरा गांव निवासी मांगे राम का कहना है कि जांच में दोषी पाए जाने वालों को बचाने की जिला प्रशासन पूरी कोशिश कर रहा है। जब भी जांच रिपोर्ट पूरी कर डीसी को सौंपी जाती है, उसके बाद उच्च स्तरीय दबाव के बाद अगली जांच की भूमिका प्रशासन तैयार कर देता है। शिकायकर्ता के आग्रह पर निदेशक चकबंदी ने डीसी फरीदाबाद को पत्र लिखा है कि चकबंदी रिकॉर्ड गुम करने वालों की जिम्मेदारी तय की जाए। अगर रिकॉर्ड को दोबारा तैयार करने की जरूरत है तो कराएं।
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शिकायतकर्ता मांगे राम का कहना है कि जिला प्रशासन ने जांच दर जांच कर पूरे मामले की गंभीरता ही खत्म कर दी है। शुरूआती दो जांच में तत्कालीन पटवारी को दोषी पाया गया है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि रिकॉर्ड का बस्ता लेने के बाद जमा ही नहीं करवाया। तीसरी जांच में तो कार्यालय कानूनगो को दोषी ठहराया गया, जबकि उस समय वे इस पद पर थे ही नहीं। शिकायतकर्ता ने वित्तायुक्त संजीव कौशल व निदेशक चकबंदी से मांग की है कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ अतिशीघ्र कड़ी कार्रवाई की जाए।
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