{"_id":"610858ae8ebc3e842a03a9a0","slug":"if-break-ties-with-private-companies-there-will-be-a-power-cut-of-6-8-hours-bureau-news-pkl4222420136","type":"story","status":"publish","title_hn":"निजी कंपनियों से नाता तोड़ा तो लगेंगे 6-8 घंटे के बिजली कट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निजी कंपनियों से नाता तोड़ा तो लगेंगे 6-8 घंटे के बिजली कट
विज्ञापन
चंडीगढ़। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब में पिछली सरकार के दौरान निजी बिजली कंपनियों से किए समझौते रद्द करने का फरमान जारी कर दिया है, लेकिन सरकार के बिजली विभाग का अब कहना है कि अगर निजी कंपनियों के साथ समझौते रद्द हुए तो राज्य के लोगों को बिजली की भारी किल्लत का सामना करना पड़ेगा। संभवत: लोगों को हर रोज 6 से 8 घंटे के लंबे बिजली कटों से जूझना पड़ेगा।
यह बात पावरकॉम के चेयरमैन वेणु प्रसाद द्वारा वित्त विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी केएपी सिन्हा को लिखे जवाबी पत्र में सामने आई है। पावरकॉम के चेयरमैन ने प्रदेश में बिजली की मांग, उत्पादन, आपूर्ति और बाहरी राज्यों से खरीद के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि प्रदेश के सरकारी थर्मल प्लांट और बाहरी राज्यों से बिजली खरीदने की तय सीमा के हिसाब से पंजाब में बिजली की भारी किल्लत हो जाएगी। उन्होंने बताया कि पंजाब में इस समय 6600 मेगावाट बिजली तैयार हो रही है, जिसमें निजी थर्मल प्लांटों का योगदान 3920 मेगावाट का है। वहीं, बाहरी राज्यों से केवल 6400 मेगावाट बिजली खरीदने की सीमा निर्धारित है। अगर मौजूदा स्थिति में निजी थर्मल प्लांटों के उत्पादन को अलग कर दिया जाए तो पैदा होने वाली किल्लत को संभाल पाना संभव नहीं रह जाएगा।
उल्लेखनीय है कि हाल के धान के सीजन के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में धान बुवाई के लिए आठ घंटे बिजली देने के आदेश जारी किए तो उसी दौरान प्रदेश में गरमी के मौसम के कारण तापमान भी बढ़ा। इसके कारण पूरे राज्य में बिजली की भारी किल्लत हो गई थी। उस समय राज्य के पास उपलब्ध बिजली लगभग 14000 मेगावाट थी और मांग 16000 मेगावाट का आंकड़ा पार कर गई थी। इस तरह मात्र 2000 मेगावाट की कमी से इतना हाहाकार मचा कि सरकार को अपने दफ्तरों का समय भी सुबह 8 से दोपहर 2 बजे करते हुए दफ्तरों में एसी चलाने पर रोक लगाने को मजबूर होना पड़ा था।
विज्ञापन
प्रदेश में निजी थर्मल प्लांटों को बंद करने की मांग के पीछे यह दलील दी जाती रही है कि 25 साल की अवधि वाले समझौतों के तहत निजी कंपनियां सरकार को महंगी बिजली बेच रही हैं। मुख्यमंत्री की तरफ से भी निजी थर्मल प्लांटों को बंद करने के लिए यह दलील दी गई है कि इन कंपनियों को हर साल 1000 करोड़ रुपये फिक्स चार्ज के रूप में देना पड़ रहा है, जिससे राज्य को कोई लाभ नहीं हो रहा। लेकिन पावरकॉम की दलील अलग है। वेणु प्रसाद ने अपने पत्र में लिखा है कि पंजाब में इस समय निजी थर्मल प्लांटों से प्रति यूनिट 2.98 से 3.74 रुपये की दर से बिजली मिल रही है, जबकि सरकारी थर्मल प्लांटों से मिल रही बिजली की दर प्रति यूनिट 4 रुपये है। इस तरह, निजी कंपनियों से हुए बिजली समझौते फिलहाल राज्य के लिए नुकसानदायक नहीं हैं।
सरकार ने अपने थर्मल प्लांटों पर नहीं दिया ध्यान
पंजाब में पिछली अकाली-भाजपा सरकार ने निजी थर्मल प्लांटों से एकतरफा समझौते करके जहां राज्य को बिजली के मामले में सरप्लस स्टेट बनाने का दावा किया था, वहीं मौजूदा कैप्टन अमरिंदर सरकार साढ़े चार साल बाद निजी थर्मल प्लांटों से हुए विवादित समझौते रद्द करने में जुट गई है। यह एकतरफा समझौते रद्द होंगे या नहीं, इस बारे में कहना जल्दबाजी होगा, लेकिन कैप्टन सरकार ने अपने कार्यकाल में एक तरफ जहां सूबे के सरकारी थर्मल प्लांटों में बिजली उत्पादन बंद कर दिया, वहीं प्रस्तावित नए प्लांट लगाने के फैसलों पर अमल भी नहीं किया। राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर कैबिनेट सब-कमेटी का गठन किया। इसकी रिपोर्ट दिसंबर, 2017 में लागू करने की अनुमति भी कैबिनेट ने दे दी। इसके तहत रोपड़ में 5 सुपर क्रिटिकल प्लांट लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन इसे आज तक मूर्तरूप नहीं दिया जा सका। वहीं, कैप्टन सरकार के गठन के तुरंत बाद रोपड़ और बठिंडा में दो और एक प्लांट बंद करने का फैसला लिया गया, जिससे 800-800 मेगावाट उत्पादन सीधे घट गया।
विज्ञापन
यह बात पावरकॉम के चेयरमैन वेणु प्रसाद द्वारा वित्त विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी केएपी सिन्हा को लिखे जवाबी पत्र में सामने आई है। पावरकॉम के चेयरमैन ने प्रदेश में बिजली की मांग, उत्पादन, आपूर्ति और बाहरी राज्यों से खरीद के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि प्रदेश के सरकारी थर्मल प्लांट और बाहरी राज्यों से बिजली खरीदने की तय सीमा के हिसाब से पंजाब में बिजली की भारी किल्लत हो जाएगी। उन्होंने बताया कि पंजाब में इस समय 6600 मेगावाट बिजली तैयार हो रही है, जिसमें निजी थर्मल प्लांटों का योगदान 3920 मेगावाट का है। वहीं, बाहरी राज्यों से केवल 6400 मेगावाट बिजली खरीदने की सीमा निर्धारित है। अगर मौजूदा स्थिति में निजी थर्मल प्लांटों के उत्पादन को अलग कर दिया जाए तो पैदा होने वाली किल्लत को संभाल पाना संभव नहीं रह जाएगा।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि हाल के धान के सीजन के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में धान बुवाई के लिए आठ घंटे बिजली देने के आदेश जारी किए तो उसी दौरान प्रदेश में गरमी के मौसम के कारण तापमान भी बढ़ा। इसके कारण पूरे राज्य में बिजली की भारी किल्लत हो गई थी। उस समय राज्य के पास उपलब्ध बिजली लगभग 14000 मेगावाट थी और मांग 16000 मेगावाट का आंकड़ा पार कर गई थी। इस तरह मात्र 2000 मेगावाट की कमी से इतना हाहाकार मचा कि सरकार को अपने दफ्तरों का समय भी सुबह 8 से दोपहर 2 बजे करते हुए दफ्तरों में एसी चलाने पर रोक लगाने को मजबूर होना पड़ा था।
विज्ञापन
प्रदेश में निजी थर्मल प्लांटों को बंद करने की मांग के पीछे यह दलील दी जाती रही है कि 25 साल की अवधि वाले समझौतों के तहत निजी कंपनियां सरकार को महंगी बिजली बेच रही हैं। मुख्यमंत्री की तरफ से भी निजी थर्मल प्लांटों को बंद करने के लिए यह दलील दी गई है कि इन कंपनियों को हर साल 1000 करोड़ रुपये फिक्स चार्ज के रूप में देना पड़ रहा है, जिससे राज्य को कोई लाभ नहीं हो रहा। लेकिन पावरकॉम की दलील अलग है। वेणु प्रसाद ने अपने पत्र में लिखा है कि पंजाब में इस समय निजी थर्मल प्लांटों से प्रति यूनिट 2.98 से 3.74 रुपये की दर से बिजली मिल रही है, जबकि सरकारी थर्मल प्लांटों से मिल रही बिजली की दर प्रति यूनिट 4 रुपये है। इस तरह, निजी कंपनियों से हुए बिजली समझौते फिलहाल राज्य के लिए नुकसानदायक नहीं हैं।
सरकार ने अपने थर्मल प्लांटों पर नहीं दिया ध्यान
पंजाब में पिछली अकाली-भाजपा सरकार ने निजी थर्मल प्लांटों से एकतरफा समझौते करके जहां राज्य को बिजली के मामले में सरप्लस स्टेट बनाने का दावा किया था, वहीं मौजूदा कैप्टन अमरिंदर सरकार साढ़े चार साल बाद निजी थर्मल प्लांटों से हुए विवादित समझौते रद्द करने में जुट गई है। यह एकतरफा समझौते रद्द होंगे या नहीं, इस बारे में कहना जल्दबाजी होगा, लेकिन कैप्टन सरकार ने अपने कार्यकाल में एक तरफ जहां सूबे के सरकारी थर्मल प्लांटों में बिजली उत्पादन बंद कर दिया, वहीं प्रस्तावित नए प्लांट लगाने के फैसलों पर अमल भी नहीं किया। राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर कैबिनेट सब-कमेटी का गठन किया। इसकी रिपोर्ट दिसंबर, 2017 में लागू करने की अनुमति भी कैबिनेट ने दे दी। इसके तहत रोपड़ में 5 सुपर क्रिटिकल प्लांट लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन इसे आज तक मूर्तरूप नहीं दिया जा सका। वहीं, कैप्टन सरकार के गठन के तुरंत बाद रोपड़ और बठिंडा में दो और एक प्लांट बंद करने का फैसला लिया गया, जिससे 800-800 मेगावाट उत्पादन सीधे घट गया।