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Panchkula News: जंजीरों में कैद इंसानियत...पीड़ित बोला-45 हजार रुपये के लिए आढ़ती ने बंधक बनाया पीड़ित की पत्नी का आरोप-मुझे नशे में मारता-पीटता था इसलिए बांधा
Fri, 31 Oct 2025 01:03 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
Updated Fri, 31 Oct 2025 01:03 AM IST
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गांव मधीर में मां-बेटे को घर में ही बांधा जंजीरों में, वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया, मां-बेटे की जंजीरें खुलवा करवाया आजाद
संवाद न्यूज एजेंसी
मुक्तसर। गिद्दड़बाहा के गांव मधीर में मां-बेटे को लोहे की जंजीरों से चारपाई के साथ घर में ही बांध दिया गया। पड़ोसियों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और दोनों को आजाद करवाया। थाना कोटभाई के प्रभारी जसवीर सिंह ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पीड़ित किसान निर्मल सिंह ने बताया एक आढ़ती 45 हजार रुपये के लिए दोनों को 13 अक्तूबर को अगवा कर अपने पोल्ट्री फार्म ले गया और वहां कैद कर दिया। उनके साथ मारपीट की गई और चूजों की गंदगी खिलाई गई। जैसे-तैसे दोनों वहां से भागकर अपने घर पहुंचे। आढ़ती घर आ गया और वहां पर चारपाई के साथ दोनों को लोहे ही जंजीरों से कैद कर दिया। वहीं पीड़ित निर्मल की पत्नी ने अपने पति पर ही आरोप लगाया हैं । उसने शिकायत की कि उसका पति नशे की हालत में उसे रोज मारता-पीटता था। इसी बात से परेशान होकर उसने पति और सास को जंजीरों से बांध दिया। हालांकि सास को क्यों बांधा, इस बारे में उसने कुछ नहीं बताया।
वीडियो बयां कर रहा कुछ और ही कहानी
जो वीडियो वायरल हुआ है उसमें साफ देखा जा सकता है कि दोनाें जंजीरों से बंधे हुए हैं और घर में बाकी लोग खुले घूम रहे हैं। अगर आढ़ती ने दोनों को बांधा था तो फिर बाकी सदस्यों ने पुलिस से शिकायत क्यों नहीं की। इससे यह बात साफ है कि इस मामले में परिवार भी शामिल है क्योंकि जब एक व्यक्ति वीडियो बना रहा होता है तब घर की एक छोटी बच्ची वीडियो बनाने से उसे रोकती है और दादी के सामने पर्दा डाल देती है। इस मामले में जब पुलिस से बात की तो थाना प्रभारी ने कहाकि दंपती को थाने बुलाकर पूछताछ की जाएगी। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसकी के आधार पर कार्रवाई होगी।
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जंजीरों में बांधना मानवाधिकारों का उल्लंघन
किसी भी व्यक्ति की आजादी को जंजीरों में बांधकर खत्म करना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। किसी भी परिस्थिति में ऐसा करना अपराध है। अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं कि नशे से रोकने के लिए जंजीरों में बांधा गया या मानसिक स्थिति ठीक न होने की वजह सेे ऐसा किया गया। कानून इस बात का अधिकार किसी को नहीं देता। इस मामले में ह्यूमन राइट्स कमीशन से भी शिकायत की गई है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुक्तसर। गिद्दड़बाहा के गांव मधीर में मां-बेटे को लोहे की जंजीरों से चारपाई के साथ घर में ही बांध दिया गया। पड़ोसियों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और दोनों को आजाद करवाया। थाना कोटभाई के प्रभारी जसवीर सिंह ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पीड़ित किसान निर्मल सिंह ने बताया एक आढ़ती 45 हजार रुपये के लिए दोनों को 13 अक्तूबर को अगवा कर अपने पोल्ट्री फार्म ले गया और वहां कैद कर दिया। उनके साथ मारपीट की गई और चूजों की गंदगी खिलाई गई। जैसे-तैसे दोनों वहां से भागकर अपने घर पहुंचे। आढ़ती घर आ गया और वहां पर चारपाई के साथ दोनों को लोहे ही जंजीरों से कैद कर दिया। वहीं पीड़ित निर्मल की पत्नी ने अपने पति पर ही आरोप लगाया हैं । उसने शिकायत की कि उसका पति नशे की हालत में उसे रोज मारता-पीटता था। इसी बात से परेशान होकर उसने पति और सास को जंजीरों से बांध दिया। हालांकि सास को क्यों बांधा, इस बारे में उसने कुछ नहीं बताया।
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वीडियो बयां कर रहा कुछ और ही कहानी
जो वीडियो वायरल हुआ है उसमें साफ देखा जा सकता है कि दोनाें जंजीरों से बंधे हुए हैं और घर में बाकी लोग खुले घूम रहे हैं। अगर आढ़ती ने दोनों को बांधा था तो फिर बाकी सदस्यों ने पुलिस से शिकायत क्यों नहीं की। इससे यह बात साफ है कि इस मामले में परिवार भी शामिल है क्योंकि जब एक व्यक्ति वीडियो बना रहा होता है तब घर की एक छोटी बच्ची वीडियो बनाने से उसे रोकती है और दादी के सामने पर्दा डाल देती है। इस मामले में जब पुलिस से बात की तो थाना प्रभारी ने कहाकि दंपती को थाने बुलाकर पूछताछ की जाएगी। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसकी के आधार पर कार्रवाई होगी।
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जंजीरों में बांधना मानवाधिकारों का उल्लंघन
किसी भी व्यक्ति की आजादी को जंजीरों में बांधकर खत्म करना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। किसी भी परिस्थिति में ऐसा करना अपराध है। अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं कि नशे से रोकने के लिए जंजीरों में बांधा गया या मानसिक स्थिति ठीक न होने की वजह सेे ऐसा किया गया। कानून इस बात का अधिकार किसी को नहीं देता। इस मामले में ह्यूमन राइट्स कमीशन से भी शिकायत की गई है।