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Panchkula News: जेल में मोबाइल उपलब्ध करवाने के आरोपी सहायक जेल अधीक्षक को हाईकोर्ट का जमानत से इन्कार
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कैदी का वीडियो अपलोड करने के बाद मामले में आईजी ने दिया था जांच का आदेश, बाद में दर्ज हुई थी एफआईआर
1.63 लाख रुपये लेकर जेल में मोबाइल उपलब्ध करवाने का लगाया गया था आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जेल में नशा तस्करी के आरोपी को मोबाइल उपलब्ध करवाने और इसकी एवज में आरोपी की पत्नी से 1.63 लाख रुपये वसूलने के आरोपी सहायक जेल अधीक्षक को अग्रिम जमानत देने से इन्कार करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उसकी याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं और याची से हिरासत में पूछताछ बहुत जरूरी है।
याचिका दाखिल करते हुए तरसेम पाल ने बताया कि वह फिरोजपुर जेल में सहायक जेल अधीक्षक के तौर पर कार्यरत था। इस दौरान एक कैदी ने जेल में वीडियो बनाया था जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो के सामने आने के बाद जांच हुई और एफआईआर दर्ज कर ली गई। याची ने बताया कि वह अब रिटायर हो चुका है और उसकी जेल विभाग में नौकरी के दौरान छवि साफ रही है। केवल एक कैदी के बयान के आधार पर याची को इस मामले में फंसाया जा सकता है। ऐसे मेंं उसे जमानत दी जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में याची कैदी की पत्नी के संपर्क में था जो कॉल रिकार्ड से स्पष्ट होता है। इसके साथ ही पैसे के लेन-देन के आरोप गंभीर हैं। ऐसे में याची से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। याची को डिप्टी सुपरिंटेंडेंट गुरजीत सिंह की तर्ज पर समानता के आधार पर जमानत नहीं मिल सकती क्योंकि याची पर पैसे के लेन-देन का आरोप है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
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1.63 लाख रुपये लेकर जेल में मोबाइल उपलब्ध करवाने का लगाया गया था आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जेल में नशा तस्करी के आरोपी को मोबाइल उपलब्ध करवाने और इसकी एवज में आरोपी की पत्नी से 1.63 लाख रुपये वसूलने के आरोपी सहायक जेल अधीक्षक को अग्रिम जमानत देने से इन्कार करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उसकी याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं और याची से हिरासत में पूछताछ बहुत जरूरी है।
याचिका दाखिल करते हुए तरसेम पाल ने बताया कि वह फिरोजपुर जेल में सहायक जेल अधीक्षक के तौर पर कार्यरत था। इस दौरान एक कैदी ने जेल में वीडियो बनाया था जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो के सामने आने के बाद जांच हुई और एफआईआर दर्ज कर ली गई। याची ने बताया कि वह अब रिटायर हो चुका है और उसकी जेल विभाग में नौकरी के दौरान छवि साफ रही है। केवल एक कैदी के बयान के आधार पर याची को इस मामले में फंसाया जा सकता है। ऐसे मेंं उसे जमानत दी जानी चाहिए।
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हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में याची कैदी की पत्नी के संपर्क में था जो कॉल रिकार्ड से स्पष्ट होता है। इसके साथ ही पैसे के लेन-देन के आरोप गंभीर हैं। ऐसे में याची से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। याची को डिप्टी सुपरिंटेंडेंट गुरजीत सिंह की तर्ज पर समानता के आधार पर जमानत नहीं मिल सकती क्योंकि याची पर पैसे के लेन-देन का आरोप है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
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