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फैसलाः हरियाणा अपने कानूनों से हटाएगा पंजाब का नाम, गठित होगी अफसरों की उच्च स्तरीय बैठक

Fri, 25 Sep 2020 04:44 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 25 Sep 2020 04:44 PM IST
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Haryana will remove Punjab's name from its laws
फाइल फोटो
हरियाणा अपने कानूनों (अधिनियमों) से पंजाब का नाम हटाने जा रहा है। इसके लिए हरियाणा की विधान पालिका और कार्यपालिका मिल कर योजना बना रही है। इस संबंध में वीरवार को विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने प्रदेश की मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा, कानून एवं विधि निर्माण विभाग में कानून सचिव बिमलेश तंवर और विधान सभा के अवर सचिव विष्णु देव के साथ बैठक की।
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विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्य सचिव से कहा कि प्रदेश के सभी अधिनियम पंजाब के बजाय हरियाणा के नाम से करने की योजना तैयार करें। इसके लिए जल्द ही कानून एवं विधि निर्माण विभाग की कानून सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी। फिलहाल हरियाणा में करीब 237 ऐसे अधिनियम हैं जो पंजाब के नाम से ही चल रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष इन सभी अधिनियमों से पंजाब शब्द हटाना चाहते हैं।
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पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के तहत वर्ष 1966 में हरियाणा राज्य का गठन किया गया था। तब पंजाब में जिन अधिनियमों का अस्तित्व था, वे ही हरियाणा में लागू रहे। व्यवस्था यह बनी थी कि अगले 2 वर्ष में हरियाणा अपनी जरूरतों के मुताबिक इनमें आवश्यक संशोधन कर सकेगा। अनावश्यक अधिनियमों को हटाने का अधिकार भी प्रदेश की विधानसभा को है।
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हरियाणा को विरासत में जो अधिनियम मिले थे, वे सभी पंजाब के नाम पर थे और बीते 54 वर्षों से हरियाणा की शासन व्यवस्था इन्हीं कानूनों के आधार पर चल रही है। इसके चलते प्रदेश की जनता और जनप्रतिनिधि इन कानूनों को हरियाणा के नाम पर करने की मांग करते रहे हैं। गुप्ता ने कहा कि हरियाणा प्रदेश का गौरवशाली इतिहास रहा है। 1966 में स्थापना के बाद इस प्रदेश ने शिक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्र में भी विशिष्ट पहचान बनाई है।


आर्थिक विकास की तीव्र रफ्तार से प्रदेश ने बुलंदियों को छुआ है। इसके बावजूद इसके सभी पुराने अधिनियम पंजाब के नाम पर ही है। उन्होंने कहा कि प्रमुख अधिनियमों में हरियाणा शब्द जुड़ने से यहां नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में स्वाभिमान की भावना जागृत होगी, जो किसी भी आगे बढ़ते प्रदेश के लिए जरूरी है।
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