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पंजाब में जमीनी सक्रियता बढ़ाने लगे राज्यपाल, छह सीमांत जिलों के दौरे का कार्यक्रम तैयार
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चंडीगढ़। पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित की ओर से राज्य के छह सीमांत जिलों के दौरे का फैसला लिए जाने के साथ ही सियासी गलियारों में हलचल बढ़ गई है। राज्यपाल की ओर से जिलों में जाकर आम लोगों से मिलना और केंद्र सरकार द्वारा लिए फैसलों पर उनकी राय जानने की इस मुहिम को विपक्षी दल सूबे की राजनीति में भाजपा की पिछले दरवाजे से घुसपैठ मान रहा है। वहीं सत्ताधारी आम आदमी पार्टी इसे दिल्ली की केजरीवाल सरकार के खिलाफ केंद्र सरकार द्वारा अपनाई गई रणनीति का हिस्सा मान रहा है।
आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि जिस तरह दिल्ली में लोगों द्वारा चुनी गई सरकार को दरकिनार कर केंद्र सरकार ने एलजी (उपराज्यपाल) को सर्वेसर्वा घोषित कर दिया है, लगभग उसी तरह अपने राज्यपाल के जरिये पंजाब की सरकार में सीधे दखल का यह एक प्रयास है। उधर, कांग्रेस और अकाली दल के नेताओं का मानना है कि किसान आंदोलन के बाद से केंद्र की भाजपा सरकार पंजाब के हितों को कम करने की लगातार साजिश रच रही है।
बीबीएमबी से पंजाब को बाहर करना, भारत-पाक सीमा से पंजाब में बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 5 किमी से बढ़ाकर 50 किमी करना, राजधानी चंडीगढ़ में पंजाब के हिस्से को अनदेखा करते हुए यूटी कैडर के अफसरों की नियुक्ति और केंद्रीय सर्विस रूल लागू कर केंद्र सरकार पंजाब को लगातार कमजोर कर रही है। गौरतलब है कि पंजाब में यह पहला अवसर भी होगा जब राजभवन सीधे तौर जनता से जुड़ने का प्रयास करेगा, क्योंकि अब तक राज्यपाल का सीधा संपर्क सूबे की सरकार तक ही सीमित रहता था। राज्यपाल इसी माह प्रदेश के छह जिलों- पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और फाजिल्का में जनसंपर्क अभियान शुरू करते हुए आम लोगों से मिलेंगे और केंद्रीय योजनाओं से हो रहे लाभ के अलावा बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने से उत्पन्न हालात के बारे में विचार जानेंगे।
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इसके साथ ही वह छह जिलों की जमीनी हकीकत जानने की भी कोशिश करेंगे। इसी दौरान राज्यपाल इन जिलों में सीमा पर तैनात बीएसएफ के अफसरों से भी मुलाकात करेंगे। राज्यपाल के इस दौरे को लेकर संबंधित जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को राज्यपाल की सुरक्षा के प्रबंध करने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। जानकारी के अनुसार, राज्यपाल ने 26 मार्च को इन जिलों के दौरे का कार्यक्रम बनाया था और इसे लेकर उन्होंने प्रदेश के मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी और डीजीपी वीके भावरा के साथ बैठक भी की थी।
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आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि जिस तरह दिल्ली में लोगों द्वारा चुनी गई सरकार को दरकिनार कर केंद्र सरकार ने एलजी (उपराज्यपाल) को सर्वेसर्वा घोषित कर दिया है, लगभग उसी तरह अपने राज्यपाल के जरिये पंजाब की सरकार में सीधे दखल का यह एक प्रयास है। उधर, कांग्रेस और अकाली दल के नेताओं का मानना है कि किसान आंदोलन के बाद से केंद्र की भाजपा सरकार पंजाब के हितों को कम करने की लगातार साजिश रच रही है।
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बीबीएमबी से पंजाब को बाहर करना, भारत-पाक सीमा से पंजाब में बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 5 किमी से बढ़ाकर 50 किमी करना, राजधानी चंडीगढ़ में पंजाब के हिस्से को अनदेखा करते हुए यूटी कैडर के अफसरों की नियुक्ति और केंद्रीय सर्विस रूल लागू कर केंद्र सरकार पंजाब को लगातार कमजोर कर रही है। गौरतलब है कि पंजाब में यह पहला अवसर भी होगा जब राजभवन सीधे तौर जनता से जुड़ने का प्रयास करेगा, क्योंकि अब तक राज्यपाल का सीधा संपर्क सूबे की सरकार तक ही सीमित रहता था। राज्यपाल इसी माह प्रदेश के छह जिलों- पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और फाजिल्का में जनसंपर्क अभियान शुरू करते हुए आम लोगों से मिलेंगे और केंद्रीय योजनाओं से हो रहे लाभ के अलावा बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने से उत्पन्न हालात के बारे में विचार जानेंगे।
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इसके साथ ही वह छह जिलों की जमीनी हकीकत जानने की भी कोशिश करेंगे। इसी दौरान राज्यपाल इन जिलों में सीमा पर तैनात बीएसएफ के अफसरों से भी मुलाकात करेंगे। राज्यपाल के इस दौरे को लेकर संबंधित जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को राज्यपाल की सुरक्षा के प्रबंध करने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। जानकारी के अनुसार, राज्यपाल ने 26 मार्च को इन जिलों के दौरे का कार्यक्रम बनाया था और इसे लेकर उन्होंने प्रदेश के मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी और डीजीपी वीके भावरा के साथ बैठक भी की थी।