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Panchkula News: करोड़ों के सरकारी फंड घोटाले में चार आरोपी 7 दिन के पुलिस रिमांड पर
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फर्जी चेक-डेबिट नोट से निकाली गई राशि; एंटी करप्शन ब्यूरो ने मांगा था 14 दिन का रिमांड
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के खातों से निजी फर्मों में भेजी गई करोड़ों की रकम
बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
संवाद न्यूज एजेंस
पंचकूला। हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग से जुड़े सरकारी खातों से करीब 75 करोड़ रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी) पंचकूला ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पंचकूला निवासी ऋषभ ऋषि, चंडीगढ़ निवासी अभय कुमार, स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला के रूप में हुई है। विजिलेंस ने अदालत से 14 दिन के पुलिस रिमांड की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने चारों आरोपियों को 7 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
जांच में सामने आए तथ्य
जांच के अनुसार 26 सितंबर 2025 को मनरेगा-2.0 योजना के तहत आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, सेक्टर-32 चंडीगढ़ और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में दो सरकारी खाते खोले थे, जिनमें क्रमशः 50 करोड़ और 25 करोड़ रुपये जमा किए गए। आरोप है कि इन खातों से बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति फर्जी चेक और डेबिट नोट के माध्यम से करोड़ों रुपये अन्य खातों में ट्रांसफर किए गए। कई चेकों पर तत्कालीन महानिदेशक के फर्जी हस्ताक्षर पाए गए, जबकि वे पद छोड़ चुके थे। कुछ चेकों में अंकों और शब्दों में राशि अलग-अलग होने के बावजूद भुगतान कर दिया गया।
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46.56 करोड़ रुपये का ट्रांसफर
जांच में सामने आया कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से 46.56 करोड़ रुपये एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के खाते में भेजे गए, जहां से यह राशि निजी फर्मों और अन्य खातों में ट्रांसफर की गई। संबंधित निजी फर्म में स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला साझेदार बताए गए हैं।
बैंक अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में
जांच एजेंसियों को संदेह है कि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी राशि का ट्रांसफर संभव नहीं था। कई डेबिट नोट और बैंक विवरण फर्जी पाए गए हैं। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक पर जांच में सहयोग न करने के आरोप भी लगे हैं। हरियाणा सरकार के निर्देश पर एसवी एंड एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम व अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। चारों आरोपियों को 24 फरवरी को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया।
बड़े नेटवर्क की आशंका
जांच में यह भी सामने आया है कि सरकारी राशि निजी फर्मों, ज्वैलर्स और अन्य व्यक्तियों के खातों में भेजी गई। एजेंसियां आरोपियों के बैंक खातों, संपत्तियों, डिजिटल रिकॉर्ड और कॉल डिटेल की जांच कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार यह घोटाला संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है और आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं। सरकारी धन की रिकवरी और पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए जांच जारी है।
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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के खातों से निजी फर्मों में भेजी गई करोड़ों की रकम
बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
संवाद न्यूज एजेंस
पंचकूला। हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग से जुड़े सरकारी खातों से करीब 75 करोड़ रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी) पंचकूला ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पंचकूला निवासी ऋषभ ऋषि, चंडीगढ़ निवासी अभय कुमार, स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला के रूप में हुई है। विजिलेंस ने अदालत से 14 दिन के पुलिस रिमांड की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने चारों आरोपियों को 7 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
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जांच में सामने आए तथ्य
जांच के अनुसार 26 सितंबर 2025 को मनरेगा-2.0 योजना के तहत आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, सेक्टर-32 चंडीगढ़ और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में दो सरकारी खाते खोले थे, जिनमें क्रमशः 50 करोड़ और 25 करोड़ रुपये जमा किए गए। आरोप है कि इन खातों से बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति फर्जी चेक और डेबिट नोट के माध्यम से करोड़ों रुपये अन्य खातों में ट्रांसफर किए गए। कई चेकों पर तत्कालीन महानिदेशक के फर्जी हस्ताक्षर पाए गए, जबकि वे पद छोड़ चुके थे। कुछ चेकों में अंकों और शब्दों में राशि अलग-अलग होने के बावजूद भुगतान कर दिया गया।
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46.56 करोड़ रुपये का ट्रांसफर
जांच में सामने आया कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से 46.56 करोड़ रुपये एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के खाते में भेजे गए, जहां से यह राशि निजी फर्मों और अन्य खातों में ट्रांसफर की गई। संबंधित निजी फर्म में स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला साझेदार बताए गए हैं।
बैंक अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में
जांच एजेंसियों को संदेह है कि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी राशि का ट्रांसफर संभव नहीं था। कई डेबिट नोट और बैंक विवरण फर्जी पाए गए हैं। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक पर जांच में सहयोग न करने के आरोप भी लगे हैं। हरियाणा सरकार के निर्देश पर एसवी एंड एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम व अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। चारों आरोपियों को 24 फरवरी को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया।
बड़े नेटवर्क की आशंका
जांच में यह भी सामने आया है कि सरकारी राशि निजी फर्मों, ज्वैलर्स और अन्य व्यक्तियों के खातों में भेजी गई। एजेंसियां आरोपियों के बैंक खातों, संपत्तियों, डिजिटल रिकॉर्ड और कॉल डिटेल की जांच कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार यह घोटाला संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है और आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं। सरकारी धन की रिकवरी और पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए जांच जारी है।