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पंचकूला प्लॉट आवंटन मामले में पूर्व सूचना आयुक्त डागर कत्याल भगोड़ा करार

Tue, 07 Sep 2021 02:17 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 07 Sep 2021 02:17 AM IST
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Former Information Commissioner Dagar Katyal absconding agreement in Panchkula plot allocation case
पंचकूला। पंचकूला प्लॉट आवंटन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अदालत में सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कोर्ट ने पूर्व सूचना आयुक्त रहे डागर कत्याल के अदालत में पेश नहीं होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने वकील से पूछा कि आरोपी पेश क्यों नहीं हुए। इस पर संतोषजनक जवाब नहीं देने के बाद ईडी की अदालत ने आरोपी डागर कत्याल को भगोड़ा घोषित कर दिया। ईडी कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को निर्देश दिए कि अगली सुनवाई पर डागर कत्याल की पूरी संपत्ति का ब्योरा पेश किया जाए। इनकी संपत्ति कितनी और कहां है। वहीं, ईडी कोर्ट ने निर्देश दिया कि डागर कत्याल के खिलाफ भगोड़ा होने का पर्चा स्थानीय थाने में दर्ज कराया जाए। अगली सुनवाई 20 सितंबर को होगी। इस मामले में अन्य आरोपी कोर्ट में पेश हुए। पंचकूला प्लॉट आवंटन के मामले में ईडी कोर्ट में फरवरी में चार्जशीट दायर की जा चुकी है।
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चार्जशीट के मुताबिक, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अन्य पर आरोप है कि उन्होंने 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के परिचितों को 30.34 करोड़ रुपये में 14 औद्योगिक भूखंडों को गलत तरीके से आवंटित किया था। आरोप पत्र में चार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शामिल हैं। ईडी ने हरियाणा सतर्कता ब्यूरो द्वारा एक प्राथमिकी के आधार पर 2015 में जांच शुरू की थी। प्राथमिकी को 2016 में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने ईडी को केस जांच के लिए ट्रांसफर किया था। ईडी की तरफ से इस मामले की जांच करने के बाद पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित चार आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की 120-बी, 201, 204, 409, 420, 467, 468, 471, 13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
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जांच में यह तथ्य आए थे सामने
जांच में पता चला है कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के पदेन अध्यक्ष रहे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और चार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने गलत तरीके से भूखंडों का आवंटन किया था। ईडी की जांच में पता चला कि भूखंडों को आवंटित करने के लिए निर्धारित मूल्य को सर्कल दर से पांच गुना और बाजार दर से सात से आठ गुना कम रखा गया था। इसके अलावा इस मामले में 21 आरोपी पेश हो रहे हैं। मामले में कुल 22 आरोपी हैं।
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