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Panchkula News: प्रताड़ित पत्नी का एफआईआर करवाना, पति को आत्महत्या के लिए उकसाने का नहीं आधार
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चंडीगढ़। प्रताड़ित की गई पत्नी यदि पति के खिलाफ केस दर्ज करवाती है और इसके बाद यदि पति आत्महत्या कर लेता है तो पत्नी को इसके लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह आदेश मानसा की अदालत के फैसले के खिलाफ मृतक के परिजनों की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए कर्मजीत कौर ने बताया कि उसके बेटे सतनाम सिंह का विवाह 28 नवंबर 2019 को हुआ था। विवाह के बाद से ही लगातार पति-पत्नी में नहीं बनती थी। इसके बाद याची की बहू ने उसके बेटे के खिलाफ अप्राकृतिक संबंध बनाने व अन्य धाराओं में 11 सितंबर 2020 को एफआईआर दर्ज करवा दी थी। याची ने बताया कि इसके बाद से ही लगातार उसका बेटा जो पंजाब पुलिस में कांस्टेबल है तनाव में था।
1 अक्तूबर 2020 को उसने जहर पी लिया और 10 अक्तूबर को उसकी मौत हो गई थी। 11 अक्तूबर को पुलिस ने पत्नी व मृतक के ससुराल वालों पर एफआईआर दर्ज करवा दी। इस मामले में मानसा की अदालत ने याची की बहू व अन्य को बरी कर दिया था। इसी आदेश को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि एफआईआर के 20 दिन बाद याची के बेटे ने आत्महत्या की थी। इस अवधि में याची के बेटे व बहू के बीच संपर्क का कोई सबूत नहीं है। पत्नी ने अपने ऊपर हुए अत्याचारों के लिए कानूनी कार्रवाई की थी और इससे दुखी होकर पति आत्महत्या कर लेता है तो इसके लिए पत्नी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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याचिका दाखिल करते हुए कर्मजीत कौर ने बताया कि उसके बेटे सतनाम सिंह का विवाह 28 नवंबर 2019 को हुआ था। विवाह के बाद से ही लगातार पति-पत्नी में नहीं बनती थी। इसके बाद याची की बहू ने उसके बेटे के खिलाफ अप्राकृतिक संबंध बनाने व अन्य धाराओं में 11 सितंबर 2020 को एफआईआर दर्ज करवा दी थी। याची ने बताया कि इसके बाद से ही लगातार उसका बेटा जो पंजाब पुलिस में कांस्टेबल है तनाव में था।
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1 अक्तूबर 2020 को उसने जहर पी लिया और 10 अक्तूबर को उसकी मौत हो गई थी। 11 अक्तूबर को पुलिस ने पत्नी व मृतक के ससुराल वालों पर एफआईआर दर्ज करवा दी। इस मामले में मानसा की अदालत ने याची की बहू व अन्य को बरी कर दिया था। इसी आदेश को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि एफआईआर के 20 दिन बाद याची के बेटे ने आत्महत्या की थी। इस अवधि में याची के बेटे व बहू के बीच संपर्क का कोई सबूत नहीं है। पत्नी ने अपने ऊपर हुए अत्याचारों के लिए कानूनी कार्रवाई की थी और इससे दुखी होकर पति आत्महत्या कर लेता है तो इसके लिए पत्नी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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