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Panchkula News: गांव-गांव जाकर किसानों को पराली जलाने को लेकर किया जाएगा जागरूक
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अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए इस बार सरकार पहले से ही एक्शन मोड़ में है। इसी के तहत धान की पराली जलाने से होने वाले नुकसानों के बारे में किसानों को जागरूक करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पंजाब द्वारा तैयार की गई वैनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। वैन अगले 40 दिनों में जिले के 934 गांवों में जाकर किसानों और आम जनता को जागरूक करेंगी। इस मौके पर किसानों से अपील करते हुए डीसी प्रीति यादव ने कहा कि धान की पराली जलाने से जहां इंसान सांस के रोग सहित अन्य घातक बीमारियों का शिकार बनता है, वहीं मिट्टी में मौजूद मित्र कीटों सहित अन्य पशु-पक्षी भी जलने के कारण विलुप्त होने के कगार पर हैं। उन्होंने बताया कि 1 टन पराली मिट्टी में मिलाने से नाइट्रोजन, सल्फर, पोटाश, कार्बनिक कार्बन आदि प्राप्त होते हैं, जिससे किसान को प्रति एकड़ 1500 से 2000 रुपये की बचत होती है। जबकि इन तत्वों को जलाने से मिट्टी के पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं। इतना ही नहीं, पूरा पर्यावरण भी प्रदूषित होता है, जिसका हमारे जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने बताया कि सरकार की (सीआरएम) फसल अवशेष प्रबंधन योजना के अंतर्गत मशीनरी पर सब्सिडी योजना के तहत हैप्पी सीडर, सम्राट सीडर, सुपर सीडर, मल्चर, जीरो टिल, सुपर स्ट्रॉ एसएमएस, रिवर्सल मोल्ड बोर्ड प्लाऊ व चॉपर आदि मशीनरी व्यक्तिगत किसानों, सहकारी समितियों व समूहों को सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाती है।
मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. जसविंदर सिंह ने बताया कि जागरूकता के लिए पटियाला जिले में तीन वैन भेजी गई हैं, जो पटियाला जिले के सभी ब्लॉकों राजपुरा, पटियाला, घनौर, नाभा, भुनरहेड़ी और सनौर, समाना व पातड़ां में लगातार 40 दिनों तक पराली प्रबंधन पर प्रचार करेंगी। उन्होंने बताया कि वैन में कृषि विभाग का एक विशेषज्ञ भी रहेगा, जिसके साथ प्रचार सामग्री भी होगी जो किसानों को जागरूक करेगी।
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पटियाला। किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए इस बार सरकार पहले से ही एक्शन मोड़ में है। इसी के तहत धान की पराली जलाने से होने वाले नुकसानों के बारे में किसानों को जागरूक करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पंजाब द्वारा तैयार की गई वैनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। वैन अगले 40 दिनों में जिले के 934 गांवों में जाकर किसानों और आम जनता को जागरूक करेंगी। इस मौके पर किसानों से अपील करते हुए डीसी प्रीति यादव ने कहा कि धान की पराली जलाने से जहां इंसान सांस के रोग सहित अन्य घातक बीमारियों का शिकार बनता है, वहीं मिट्टी में मौजूद मित्र कीटों सहित अन्य पशु-पक्षी भी जलने के कारण विलुप्त होने के कगार पर हैं। उन्होंने बताया कि 1 टन पराली मिट्टी में मिलाने से नाइट्रोजन, सल्फर, पोटाश, कार्बनिक कार्बन आदि प्राप्त होते हैं, जिससे किसान को प्रति एकड़ 1500 से 2000 रुपये की बचत होती है। जबकि इन तत्वों को जलाने से मिट्टी के पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं। इतना ही नहीं, पूरा पर्यावरण भी प्रदूषित होता है, जिसका हमारे जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने बताया कि सरकार की (सीआरएम) फसल अवशेष प्रबंधन योजना के अंतर्गत मशीनरी पर सब्सिडी योजना के तहत हैप्पी सीडर, सम्राट सीडर, सुपर सीडर, मल्चर, जीरो टिल, सुपर स्ट्रॉ एसएमएस, रिवर्सल मोल्ड बोर्ड प्लाऊ व चॉपर आदि मशीनरी व्यक्तिगत किसानों, सहकारी समितियों व समूहों को सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाती है।
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मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. जसविंदर सिंह ने बताया कि जागरूकता के लिए पटियाला जिले में तीन वैन भेजी गई हैं, जो पटियाला जिले के सभी ब्लॉकों राजपुरा, पटियाला, घनौर, नाभा, भुनरहेड़ी और सनौर, समाना व पातड़ां में लगातार 40 दिनों तक पराली प्रबंधन पर प्रचार करेंगी। उन्होंने बताया कि वैन में कृषि विभाग का एक विशेषज्ञ भी रहेगा, जिसके साथ प्रचार सामग्री भी होगी जो किसानों को जागरूक करेगी।
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