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‘हर साल 1.5 लाख से अधिक युवा और 30 हजार करोड़ जा रहे हैं विदेश’

Sun, 06 Mar 2022 01:35 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 06 Mar 2022 01:35 AM IST
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'Every year more than 1.5 lakh youth and 30 thousand crores are going abroad'
चंडीगढ़। पंजाब से हर साल 1.5 लाख युवा और औसतन 30 हजार करोड़ रुपये दूसरे देशों में जा रहे हैं। इस पर चिंता प्रकट करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद भगवंत मान ने कहा कि पंजाब सहित भारत से पैसा और टैलेंट (मनी एंड ब्रेन ड्रेन) विदेश जा रहा है। मान ने इसके लिए सत्तारूढ़ कांग्रेस, कैप्टन और अकाली-भाजपा सरकारों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से पंजाब और केंद्र में शासन करने वाली सरकारों ने डॉक्टरी, मेडिसन, इंजीनियरिंग, इन्फार्मेशन समेत विज्ञान के क्षेत्र में कोई आधुनिक और विश्व स्तरीय योजना और प्रणाली लागू नहीं की। यही कारण है कि आज देश का टैलेंट और पैसा दोनों विदेश जा रहा है।
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शनिवार को पार्टी कार्यालय से जारी बयान में भगवंत मान ने कहा कि, पंजाब देश के उन राज्यों में से एक है, जहां हर साल सबसे ज्यादा 1.50 लाख से 2 लाख युवा विदेश पढ़ाई करने और रोजी-रोटी कमाने जाते हैं। इन छात्रों के साथ लगभग 30 करोड़ रुपये भी विदेशों की यूनिवर्सिटीज, कॉलेजों और स्कूलों में फीस व अन्य खर्चों के तौर पर चला जाता है, जोकि पंजाब के कुल बजट का 20 फीसदी है। इसे रोकना बेहद जरूरी है। भगवंत मान ने कहा कि केंद्र और पंजाब की सरकारों ने राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों को हाशिए पर ला खड़ा कर दिया है। आजादी के बाद बनी योजनाओं के मुताबिक जिला स्तर पर एक भी सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं खोला गया।
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1966 के बाद पटियाला, फरीदकोट और अमृतसर मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, एमडी और एमएस की सीटों में जरूरत के मुताबिक बढ़ाने के बजाय मामूली बढ़ोतरी की गई। उन्होंने कहा कि मोहाली में पिछले साल खुले डॉ. बीआर आंबेडकर मेडिकल कॉलेज की 100 सीटों समेत चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल 675 एमबीबीएस की सीटें हैं, जोकि हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की तुलना में बेहद कम हैं। भले ही पंजाब के आधे से ज्यादा प्राइवेट कॉलेजों में एमबीबीएस की करीब 770 सीटें हैं, लेकिन इनके लिए 50 से 80 लाख रुपये वसूले जा रहे हैं। कम मेरिट वाले अमीर घरों के बच्चे करोड़ों रुपये खर्च करके एमबीबीएस की डिग्री कर रहे हैं, लेकिन मध्यमवर्गीय और आम घरों के बच्चे इतनी फीस देने के बारे में सोच भी नहीं सकते।
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