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Panchkula News: गोशाला बनाने के बाद भी सड़क पर भटक रहे लावारिस पशु
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पंचकूला। पंचकूला को लावारिस पशुओं से मुक्त किए जाने के दावे भले ही नगर निगम, प्रशासन की ओर से किए जा रहे हों, लेकिन हकीकत अलग है। शहर की सड़कों पर अब भी लवारिस पशु भटक रहे हैं। सड़क पर इन पशुओं के टकराने से हादसे का खतरा बना हुआ है। नंदीशाला बनाए जाने के बाद भी गलियों में नंदी घूम रहे हैं। पंचकूला को लावारिस पशुओं से मुक्त करने के लिए जिले में 11 गोशालाओं का संचालन हो रहा है। इसके बाद भी सड़कों पर करीब 4555 लावारिस पशु भटक रहे हैं। इनकी वजह से वर्ष 2019 से 2024 के बीच में 12 लोगों की जानें जा चुकी हैं, जबकि 40 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।
जिले में सबसे ज्यादा हादसे पंचकूला-यमुनानगर और कालका-शिमला नेशनल हाईवे पर हुए हैं। स्थिति यह है कि पंचकूला में प्रति माह लावारिस पशुओं से दो से तीन हादसे होते हैं।
नगर निगम पिछले पांच साल से दावा कर रहा है कि शहर को जल्द लावारिस पशुओं से मुक्त बनाया जाएगा। इसके लिए निगम ने करोड़ों की लागत से गोशाला और नंदीशाला बनाने में खर्च किए हैं। इसके बाद भी जिले के लोगों की लावारिस पशुओं से राहत नहीं मिल रही है। ये पशु शहर के इंडस्टि्रयल एरिया फेज-1 और 2 के अलावा शहर के सेक्टर -10, 9, 8, 7, 6, 5, 4 सहित शहर के घग्गर पार भी घूम रहे हैं।
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सड़क पर पशुओं का घूमना नहीं हुआ बंद
जिले की सड़कों पर पशुओं का घूमना बंद नहीं हुआ है। इस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस शहर में 30 साल से रह रहा हूं। पशुओं पकड़ने की बातें भले ही जा रही हैं, लेकिन इन्हें अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है।
-सुभाष पपनेजा, महासिचव, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, सेक्टर -16
वादे के बजाय इस पर काम करे निगम
वादे के बजाय निगम की ओर से लावारिस पशुओं को पकड़ने का काम किया जाए। अगर यह सही समय पर किया जाएगा तो लोगों के साथ कोई दुर्घटना नहीं होगी। इसके लिए निगम जमीनी स्तर पर काम करे, जिससे कि शहर से लावारिस पशुओं को हटाया जा सके।
एसके नैय्यर, प्रेसिडेंट, पंचकूला सिटीजंस वेलफेयर एसोसिएशन
नगर निगम की ओर से लावारिस पशुओं को पकड़ने का काम किया जा रहा है। इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शहर में कहीं पर भी लावारिस पशु घूमते दिखें तो वहां अभियान चलाकर इन्हें पकड़ें। इसके लिए युद्धस्तर पर निगम काम कर रहा है।
-कुलभूषण गोयल, महापौर, पंचकूला नगर निगम
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जिले में सबसे ज्यादा हादसे पंचकूला-यमुनानगर और कालका-शिमला नेशनल हाईवे पर हुए हैं। स्थिति यह है कि पंचकूला में प्रति माह लावारिस पशुओं से दो से तीन हादसे होते हैं।
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नगर निगम पिछले पांच साल से दावा कर रहा है कि शहर को जल्द लावारिस पशुओं से मुक्त बनाया जाएगा। इसके लिए निगम ने करोड़ों की लागत से गोशाला और नंदीशाला बनाने में खर्च किए हैं। इसके बाद भी जिले के लोगों की लावारिस पशुओं से राहत नहीं मिल रही है। ये पशु शहर के इंडस्टि्रयल एरिया फेज-1 और 2 के अलावा शहर के सेक्टर -10, 9, 8, 7, 6, 5, 4 सहित शहर के घग्गर पार भी घूम रहे हैं।
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सड़क पर पशुओं का घूमना नहीं हुआ बंद
जिले की सड़कों पर पशुओं का घूमना बंद नहीं हुआ है। इस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस शहर में 30 साल से रह रहा हूं। पशुओं पकड़ने की बातें भले ही जा रही हैं, लेकिन इन्हें अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है।
-सुभाष पपनेजा, महासिचव, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, सेक्टर -16
वादे के बजाय इस पर काम करे निगम
वादे के बजाय निगम की ओर से लावारिस पशुओं को पकड़ने का काम किया जाए। अगर यह सही समय पर किया जाएगा तो लोगों के साथ कोई दुर्घटना नहीं होगी। इसके लिए निगम जमीनी स्तर पर काम करे, जिससे कि शहर से लावारिस पशुओं को हटाया जा सके।
एसके नैय्यर, प्रेसिडेंट, पंचकूला सिटीजंस वेलफेयर एसोसिएशन
नगर निगम की ओर से लावारिस पशुओं को पकड़ने का काम किया जा रहा है। इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शहर में कहीं पर भी लावारिस पशु घूमते दिखें तो वहां अभियान चलाकर इन्हें पकड़ें। इसके लिए युद्धस्तर पर निगम काम कर रहा है।
-कुलभूषण गोयल, महापौर, पंचकूला नगर निगम